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Blog / 30 Jun 2026

सिजेरियन प्रसव में ऑक्सीटोसिन: भूमिका और महत्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राजस्थान में सिजेरियन प्रसव (Caesarean Deliveries) से संबंधित मातृ मृत्यु के मामलों को संदिग्ध नकली (Spurious) ऑक्सीटोसिन से जोड़े जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं। इसी संदर्भ मे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत से जानकारी मांगी है।

सिजेरियन सेक्शन (C-Section) क्या है?

सिजेरियन सेक्शन (C-Section) एक शल्य चिकित्सा (Surgical Procedure) है, जिसमें शिशु का जन्म माँ के पेट (Abdomen) और गर्भाशय (Uterus) में चीरा लगाकर कराया जाता है, न कि सामान्य प्रसव मार्ग के माध्यम से।

सिजेरियन सेक्शन कब किया जाता है?

जब सामान्य प्रसव (Vaginal Delivery) माँ या शिशु के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है, तब सिजेरियन सेक्शन की सलाह दी जाती है। इसके सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

भ्रूण संकट (Fetal Distress), अर्थात शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना।
लंबे समय तक या अवरुद्ध प्रसव।
प्लेसेंटा प्रिविया (Placenta Previa), जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) को ढक लेता है।
शिशु की ब्रीच (Breech) या अनुप्रस्थ (Transverse) स्थिति।
बहु-गर्भावस्था (Multiple Pregnancies), जैसे जुड़वाँ, तीन या अधिक शिशु।
पूर्व में सिजेरियन प्रसव या माँ की कुछ विशेष चिकित्सीय स्थितियाँ (चयनित मामलों में)।

ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) के बारे में:

ऑक्सीटोसिन एक पेप्टाइड हार्मोन है, जिसका निर्माण हाइपोथैलेमस में होता है तथा इसका स्राव पश्च पिट्यूटरी ग्रंथि (Posterior Pituitary Gland) द्वारा किया जाता है। यह प्रसव के दौरान गर्भाशय संकुचन (Uterine Contractions) की क्रिया को तेज करने, प्लेसेंटा के निष्कासन में सहायता करने, स्तनपान को बढ़ावा देने तथा माँ और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध (Maternal-Infant Bonding) को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिंथेटिक ऑक्सीटोसिन को WHO की आवश्यक औषधियों की मॉडल सूची (Model List of Essential Medicines) में शामिल किया गया है और इसका व्यापक रूप से प्रसूति चिकित्सा (Obstetric Care) में उपयोग किया जाता है।

सिजेरियन प्रसव के दौरान ऑक्सीटोसिन क्यों महत्वपूर्ण है?

      • सिजेरियन सेक्शन (C-Section) एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शिशु का जन्म माँ के पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर कराया जाता है, न कि सामान्य प्रसव मार्ग (Vaginal Delivery) से।
      • सामान्य प्रसव के दौरान प्रसव पीड़ा (Labour) स्वाभाविक रूप से शरीर में ऑक्सीटोसिन का उच्च स्तर उत्पन्न करती है, जबकि सिजेरियन प्रसव कराने वाली महिलाओं में, विशेषकर स्पाइनल (Spinal) या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया (Epidural Anaesthesia) के दौरान, यह हार्मोनल प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं होती। इसलिए ऐसे मामलों में सिंथेटिक ऑक्सीटोसिन की आवश्यकता होती है।
      • प्रसव के तुरंत बाद दिया गया ऑक्सीटोसिन गर्भाशय को संकुचित करता है, प्लेसेंटा के स्थान पर रक्त वाहिकाओं को दबाता है, रक्तस्राव को कम करता है तथा प्रसवोत्तर रक्तस्राव (Postpartum Haemorrhage- PPH) को रोकने में सहायता करता है, जो विश्वभर में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।

नकली (Spurious) ऑक्सीटोसिन से उत्पन्न चुनौतियाँ:

सक्रिय औषधीय घटकों (Active Pharmaceutical Ingredients) से रहित नकली या निम्न गुणवत्ता वाला ऑक्सीटोसिन गर्भाशय में पर्याप्त संकुचन उत्पन्न नहीं कर पाता।

गंभीर प्रसवोत्तर रक्तस्राव (Postpartum Haemorrhage), आपातकालीन रक्त आधान (Emergency Blood Transfusions) तथा मातृ मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य संस्थानों और आवश्यक दवाओं के प्रति जनता का विश्वास कमजोर होता है।
यह विनिर्माण मानकों (Manufacturing Standards), गुणवत्ता परीक्षण (Quality Testing) तथा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की निगरानी में कमियों को दर्शाता है।

सरकारी उपाय:

        • नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार ने टीकों, एंटीमाइक्रोबियल, कैंसर-रोधी दवाओं, मादक दवाओं तथा अनुसूची H2 की दवाओं पर बेहतर ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने हेतु QR कोड और बारकोड अनिवार्य कर दिए हैं।
        • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन जो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत भारत की राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है, दवाओं की स्वीकृति, गुणवत्ता विनियमन, नैदानिक परीक्षण तथा राज्य औषधि नियंत्रण संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षित एवं प्रभावी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष:

ऑक्सीटोसिन एक जीवनरक्षक औषधि है, जो सिजेरियन प्रसव के दौरान प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मातृ स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को कम करने के लिए आवश्यक दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी को मजबूत नियामक व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

 

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