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Blog / 10 Sep 2026

ORV सागर मंथन

संदर्भ:

हाल ही में, कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए भारत का उन्नत स्वदेशी महासागर अनुसंधान पोत ORV सागर मंथन लॉन्च किया।840 करोड़ की लागत वाले इस पोत को 2028 की शुरुआत तक कमीशन किए जाने की उम्मीद है।

ORV सागर मंथन के बारे में:

सागर मंथन भारत का पहला उन्नत महासागर अनुसंधान पोत है, जिसे GRSE द्वारा बनाया गया है और यह 43 वर्ष पुराने ORV सागर कन्या का स्थान लेगा। इसकी लंबाई 89.5 मीटर, चौड़ाई 18.8 मीटर है, इसका सकल टन भार लगभग 5,900 टन है और यह 14 नॉट की गति से संचालन कर सकता है।

कठिन समुद्री परिस्थितियों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया यह पोत हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी, दक्षिणी महासागर और अंटार्कटिका के आसपास के जल क्षेत्रों में अनुसंधान करेगा। इसकी अपेक्षित सेवा अवधि लगभग 30 वर्ष है।

प्रमुख क्षमताएँ:

यह पोत निम्नलिखित सुविधाओं से सुसज्जित है:

  • 6 किमी गहराई तक स्वाथ मल्टीबीम और भू-भौतिकीय भूकंपीय सर्वेक्षण।
  • सब-बॉटम प्रोफाइलर और समुद्र विज्ञान संबंधी उपकरण।
  • CTD प्रोफाइलिंग, जल और जैविक नमूनों का संग्रह।
  • सीबेड कोरर, ग्रैब और रॉक-ड्रेजिंग सिस्टम।
  • उन्नत डॉप्लर मौसम रडार और वायुमंडलीय अवलोकन प्रणालियाँ।
  • AUVs और ROVs को तैनात करने और वापस लाने की सुविधाएँ।
  • मूरिंग्स, डेटा बॉय और ऑनबोर्ड डेटा-प्रोसेसिंग सुविधाएँ।

यह पोत समुद्री खनिजों, जलवायु परिवर्तन, सुनामी, महासागर की गतिशीलता और जैव विविधता से संबंधित अनुसंधान में सहायता करेगा।

डीप ओशन मिशन से संबंध:

डीप ओशन मिशन का उद्देश्य गहरे समुद्र के संसाधनों के सतत अन्वेषण के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। सागर मंथन इसके डीप ओशन सर्वे एंड एक्सप्लोरेशन घटक को काफी मजबूत करेगा।

डीप ओशन मिशन (DOM) के बारे में:

भारत का डीप ओशन मिशन, MoES द्वारा 2021 में लगभग ₹4,077 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था। यह गहरे समुद्र के अन्वेषण और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने के उद्देश्य से एक व्यापक पहल है।

इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं:

1.   समुद्रयान: MATSYA 6000 का विकास, एक स्वदेशी मानवयुक्त पनडुब्बी जिसे तीन एक्वानॉट्स को 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

2.   गहरे समुद्र में खनन: मध्य भारतीय महासागर बेसिन में निकेल, कोबाल्ट, मैंगनीज और तांबा युक्त पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स के अन्वेषण के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास।

3.   महासागर जलवायु परामर्श: उन्नत महासागर-जलवायु पूर्वानुमान और परामर्श सेवाओं का विकास।

4.   ऊर्जा और मीठा पानी: ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन और अपतटीय विलवणीकरण पर अनुसंधान।

5.   समुद्री जीव विज्ञान: जैव-प्रौद्योगिकी और संरक्षण के लिए ओशन बायोलॉजी हेतु उन्नत समुद्री स्टेशन की स्थापना।

सागर मंथन एक उन्नत स्वदेशी अनुसंधान मंच उपलब्ध कराकर DOM के डीप ओशन सर्वे एंड एक्सप्लोरेशन वर्टिकल को मजबूत करता है।

रणनीतिक महत्व:

  • आत्मनिर्भर भारत: आयातित अनुसंधान पोतों पर निर्भरता कम करता है।
  • ब्लू इकोनॉमी: समुद्री संसाधनों, नौवहन, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और महासागर-आधारित उद्योगों को समर्थन देता है।
  • जलवायु एवं आपदा प्रबंधन: महासागर-वायुमंडल अंतःक्रियाओं, चक्रवातों और सुनामी की बेहतर समझ विकसित करने में सहायता करता है।
  • महत्वपूर्ण खनिज: रणनीतिक गहरे समुद्री खनिज संसाधनों के अन्वेषण को सक्षम बनाता है।
  • समुद्री क्षमता: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक और रणनीतिक उपस्थिति को बढ़ाता है।

निष्कर्ष:

ORV सागर मंथन भारत के लिए महासागर अनुसंधान प्लेटफॉर्म आयात करने से लेकर उन्हें घरेलू स्तर पर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डीप ओशन मिशन के साथ एकीकृत होकर यह भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं, संसाधन सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और दीर्घकालिक ब्लू इकोनॉमी की महत्वाकांक्षाओं को मजबूत कर सकता है।

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