ओडिशा बना समुद्री स्थानिक योजना लागू करने वाला पहला राज्य
संदर्भ:
हाल ही में, ओडिशा सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को आधिकारिक रूप से समुद्री स्थानिक योजना (MSP) को लागू किया। इससे पहले इसके पायलट प्रोजेक्ट पुडुचेरी और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किए गए थे, लेकिन अब ओडिशा भारत की सतत महासागर योजना के दूसरे चरण में इसे अपनाने और लागू करने वाला पहला पूर्ण राज्य बन गया है।
समुद्री स्थानिक योजना के बारे में:
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- समुद्री स्थानिक योजना एक वैज्ञानिक और समेकित ढांचा है, जिसका उद्देश्य महासागर और तटीय क्षेत्रों का प्रबंधन करना है ताकि समुद्री संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
- यह निम्नलिखित क्षेत्रों के विकास को समर्थन देती है:
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि
- बंदरगाह और शिपिंग अवसंरचना
- समुद्री पर्यटन
- महासागरीय ऊर्जा परियोजनाएं
- तटीय जैव विविधता का संरक्षण
- मत्स्य पालन और जलीय कृषि
- समुद्री स्थानिक योजना (MSP) भारत की ब्लू इकोनॉमी और सतत समुद्री शासन पर केंद्रित व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- समुद्री स्थानिक योजना एक वैज्ञानिक और समेकित ढांचा है, जिसका उद्देश्य महासागर और तटीय क्षेत्रों का प्रबंधन करना है ताकि समुद्री संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य उद्देश्य एवं क्रियान्वयन:
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- वैज्ञानिक ज़ोनिंग: समुद्री स्थानिक योजना (MSP) में उन्नत तकनीकों जैसे बेंथिक मैपिंग (समुद्र तल का मानचित्रण) और भू-स्थानिक (geospatial) डेटा का उपयोग किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन, शिपिंग, पर्यटन और जलीय कृषि जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए समुद्री क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सके, साथ ही पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा सुनिश्चित हो।
- क्रियान्वयन भागीदार: इस योजना को ओडिशा सरकार और राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: यह पहल भारत और नॉर्वे के बीच 2019 में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित इंडो-नॉर्वे एकीकृत महासागर पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सतत समुद्री प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
- वैज्ञानिक ज़ोनिंग: समुद्री स्थानिक योजना (MSP) में उन्नत तकनीकों जैसे बेंथिक मैपिंग (समुद्र तल का मानचित्रण) और भू-स्थानिक (geospatial) डेटा का उपयोग किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन, शिपिंग, पर्यटन और जलीय कृषि जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए समुद्री क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सके, साथ ही पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा सुनिश्चित हो।
ओडिशा के लिए महत्व:
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- ओडिशा के पास 550 किमी से अधिक लंबी तटरेखा है, जिसमें मैंग्रोव, मुहाने (estuaries) और लैगून जैसे समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र मत्स्य पालन, पर्यटन और आजीविका का आधार हैं, लेकिन बढ़ते विकास और जलवायु जोखिमों के कारण इन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
- यह ओडिशा के तटीय क्षेत्र में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करेगा।
- समुद्री क्षेत्रों के स्पष्ट निर्धारण से विभिन्न क्षेत्रों के बीच टकराव कम होगा, जैसे बंदरगाह विस्तार और पारंपरिक मत्स्य पालन के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना।
- यह योजना मैंग्रोव और मुहानों (estuaries) जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा को मजबूत करती है, जो तटीय कटाव, तूफानों और चरम मौसम घटनाओं से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- ओडिशा के पास 550 किमी से अधिक लंबी तटरेखा है, जिसमें मैंग्रोव, मुहाने (estuaries) और लैगून जैसे समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं। ये क्षेत्र मत्स्य पालन, पर्यटन और आजीविका का आधार हैं, लेकिन बढ़ते विकास और जलवायु जोखिमों के कारण इन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
व्यापक महत्व:
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- भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति को मजबूत करता है।
- विज्ञान-आधारित तटीय शासन को बढ़ावा देता है।
- समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करता है।
- आर्थिक विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
- तटीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ करता है।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति को मजबूत करता है।
निष्कर्ष:
ओडिशा द्वारा समुद्री स्थानिक योजना (MSP) को अपनाना भारत के महासागरीय शासन ढांचे में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वैज्ञानिक मानचित्रण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतत विकास के सिद्धांतों के संयोजन से यह पहल समुद्री संसाधनों के संतुलित उपयोग को सुनिश्चित करती है, साथ ही नाजुक तटीय पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा भी करती है।
