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Blog / 17 Jan 2026

नीति आयोग का एमएसएमई क्षेत्र के लिए रोडमैप

संदर्भ:

हाल ही में नीति आयोग ने "योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करना" शीर्षक से एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के बारे में:

यह रिपोर्ट एमएसएमई क्षेत्र के बेहतर परिणाम प्राप्त करने हेतु एक रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। इसमें योजनाओं के क्रियान्वयन को सरल और प्रभावी बनाने, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने तथा वित्त, कौशल विकास, विपणन और नवाचार से जुड़े सहयोग तंत्र को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही, रिपोर्ट में वर्तमान सरकारी योजनाओं की व्यापक समीक्षा, उनके बीच अभिसरण की स्थिति का आकलन तथा केंद्र, राज्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को सम्मिलित किया गया है।

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रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

      • अभिसरण की आवश्यकता:
        • वर्तमान में एमएसएमई मंत्रालय द्वारा 18 विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, जो ऋण सुविधा, कौशल विकास, विपणन सहायता, नवाचार, प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा अवसंरचना विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी हैं। इन योजनाओं ने सकारात्मक प्रभाव डाला है, लेकिन विभिन्न मंत्रालयों के बीच ओवरलैप और बिखरे हुए क्रियान्वयन के कारण अक्षमता, प्रयासों की पुनरावृत्ति और सीमित पहुंच जैसी समस्याएं सामने आई हैं। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि योजनाओं का युक्तिकरण और अभिसरण करने से पहुंच सरल होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पूरे क्षेत्र पर प्रभाव बढ़ेगा।
      • अभिसरण का ढांचा:
        • रिपोर्ट दोहरे दृष्टिकोण का प्रस्ताव करती है:
          • सूचना अभिसरण: केंद्र और राज्य स्तर पर सरकारी आंकड़ों का एकीकरण, ताकि बेहतर समन्वय हो सके, सूचित निर्णय लिए जा सकें और शासन के परिणाम मजबूत हों।
          • प्रक्रिया अभिसरण: योजनाओं का संरेखण और एकीकरण, जिससे अनावश्यक दोहराव कम हो, संचालन सरल बने और सेवा वितरण में सुधार हो। इसके अंतर्गत समान योजनाओं का विलय, साझा घटकों का एकीकरण और मंत्रालयों व राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रमुख सिफारिशें:

      • केंद्रीकृत एआई-संचालित एमएसएमई पोर्टल: एक ऐसा एकल डिजिटल मंच विकसित किया जाए जो योजनाओं की जानकारी, अनुपालन, वित्त और बाजार से जुड़ी सूचनाओं को एकीकृत करे। इसमें एआई चैटबॉट, डैशबोर्ड और मोबाइल एक्सेस के माध्यम से वास्तविक समय में सहायता उपलब्ध हो।
      • क्लस्टर विकास योजनाएं: एसएफयूआरटीआई और एमएसई-सीडीपी को एकीकृत शासन ढांचे के अंतर्गत लाया जाए तथा पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प के लिए अलग से निधि सुनिश्चित की जाए।
      • कौशल विकास का युक्तिकरण: तीन-स्तरीय संरचना अपनाई जाए, जिसमें उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल, तकनीकी कौशल तथा ग्रामीण/महिला कारीगरों का प्रशिक्षण शामिल हो। साथ ही, ओवरलैप करने वाली योजनाओं को मिलाकर लक्षित हस्तक्षेप बनाए रखे जाएं।
      • विपणन सहायता इकाई: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एमएसएमई की सहायता के लिए एक समर्पित विपणन इकाई की स्थापना की जाए, जो व्यापार मेलों और बी2बी मंचों में भागीदारी को प्रोत्साहित करे।
      • नवाचार और एएसपीआईआरई का एकीकरण: कृषि और ग्रामीण उद्यमों के लिए एएसपीआईआरई को एमएसएमई इनोवेटिव के अंतर्गत शामिल किया जाए, ताकि निरंतर वित्तपोषण और इनक्यूबेशन सुविधाओं तक पहुंच बनी रहे।

भारत में एमएसएमई:

      • एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 के तहत (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी) एमएसएमई का वर्गीकरण इस प्रकार है:
      • श्रेणी
        • सूक्ष्म: निवेश ≤ ₹2.5 करोड़; टर्नओवर ≤ ₹10 करोड़
          लघु: निवेश ≤ ₹25 करोड़; टर्नओवर ≤ ₹100 करोड़
          मध्यम: निवेश ≤ ₹125 करोड़; टर्नओवर ≤ ₹500 करोड़
      • विनिर्माण एवं सेवाएं इन सभी श्रेणियों के अंतर्गत आती हैं।
      • एमएसएमई आर्थिक विकास, रोजगार और निर्यात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
        • जीडीपी में लगभग 30% और निर्यात में लगभग 45% का योगदान
        • लगभग 29.77 करोड़ लोगों को रोजगार, जिनमें 51% से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में हैं
        • नवाचार को बढ़ावा देना, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना और वैश्विक बाजारों से जुड़ाव

वर्तमान परिदृश्य:

      • कुल पंजीकृत एमएसएमई: लगभग 6.82 करोड़
      • सूक्ष्म उद्यम: 99% से अधिक (लगभग 6.3 करोड़ इकाइयां)
      • लघु उद्यम: लगभग 0.52% (लगभग 3.3 लाख इकाइयां)
      • मध्यम उद्यम: लगभग 0.01% (लगभग 0.05 लाख इकाइयां)
      • डिजिटल अपनाने की स्थिति: लगभग 72% लेन-देन डिजिटल माध्यम से

निष्कर्ष:

एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित योजनाओं का रणनीतिक अभिसरण, बेहतर समन्वय तथा व्यापक डिजिटल एकीकरण न केवल इस क्षेत्र की कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सशक्त करेगा, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास में इसके योगदान को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। इन सिफारिशों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन एमएसएमई को घरेलू स्तर पर रोजगार सृजन और नवाचार को बनाए रखने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ और विस्तारित करने में सक्षम बनाएगा।