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Blog / 06 Jun 2026

तमिलनाडु में नीलगिरि तहर की जनसंख्या में वृद्धि

संदर्भ:

प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर के अंतर्गत तमिलनाडु की संरक्षण पहलों से संकटग्रस्त नीलगिरि तहर के संरक्षण में उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। अप्रैल 2026 में आयोजित तीसरे समकालिक (Synchronised) नीलगिरि तहर सर्वेक्षण के अनुसार इसकी जनसंख्या 1,364 आंकी गई, जो 2025 की 1,303 की संख्या की तुलना में 4.68% अधिक है तथा 2024 की तुलना में कुल मिलाकर 32% से अधिक वृद्धि दर्शाती है।

नीलगिरि तहर के बारे में:

नीलगिरि तहर (Nilgiritragus hylocrius) एक संकटग्रस्त पर्वतीय खुरदार स्तनपायी (Mountain Ungulate) है, जो भारत के दक्षिणी पश्चिमी घाट क्षेत्र, विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु, में पाया जाता है। यह तमिलनाडु का राजकीय पशु है और स्थानीय रूप सेवरयाडु (Varayaadu)” के नाम से जाना जाता है।

Great news for Environmentist : Nilgiri Tahr Population Rises by 4.68%;  Reaches 1,364 in Tamil Nadu According to the third synchronized Nilgiri Tahr  survey report released by the Tamil Nadu Forest Department

प्रमुख विशेषताएँ:

      • दक्षिण भारत में पाई जाने वाली एकमात्र पर्वतीय खुरदार प्रजाति।
      • उष्णकटिबंधीय पर्वतीय घासभूमियों (Montane Grasslands) और शोला वनों के अनुकूल।
      • दिवाचर (Diurnal) प्रकृति का, अर्थात दिन के समय सक्रिय रहता है।
      • इसमें स्पष्ट लैंगिक द्विरूपता (Sexual Dimorphism) पाई जाती है, जहाँ नर आकार में बड़े और रंग में अधिक गहरे होते हैं।
      • नर और मादा दोनों में मुड़े हुए सींग पाए जाते हैं।
      • उच्च ऊँचाई वाले घासभूमि पारितंत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक संकेतक (Indicator Species) के रूप में कार्य करता है।

आवास और वितरण:

नीलगिरि तहर पश्चिमी घाट के लगभग 400 किलोमीटर लंबे संकरे क्षेत्र तक सीमित (Endemic) है, जो उत्तर में नीलगिरि पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में असंबु पहाड़ियों तक फैला हुआ है।

प्रमुख आवास

      • एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (केरल)
      • मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान (तमिलनाडु)
      • ग्रास हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (तमिलनाडु)
      • अगस्थ्यमलाई परिदृश्य (Agasthyamalai Landscape)

यह प्रजाति सामान्यतः समुद्र तल से 1,200 से 2,600 मीटर की ऊँचाई पर पाई जाती है तथा खड़ी चट्टानों, घासभूमियों और शोला वन पारितंत्रों में निवास करती है।

नीलगिरि तहर को पर्वतीय घासभूमि और शोला पारितंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक (Indicator Species) माना जाता है। इन आवासों का संरक्षण न केवल इस प्रजाति की रक्षा करता है, बल्कि जैव विविधता, जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को भी सुरक्षित रखता है, विशेषकर पश्चिमी घाट क्षेत्र में।

संरक्षण स्थिति:

अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संरक्षण

    • IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I

यह प्रजाति आवास खंडन (Habitat Fragmentation), आक्रामक प्रजातियों, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और वनाग्नि जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर के बारे में:

तमिलनाडु ने प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर की शुरुआत एक समर्पित संरक्षण कार्यक्रम के रूप में की है, जिसका उद्देश्य इस प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करना है।

प्रमुख घटक:

    • वैज्ञानिक जनसंख्या निगरानी
    • रेडियो-टेलीमेट्री ट्रैकिंग
    • आवास पुनर्स्थापन (Habitat Restoration)
    • घासभूमि पारितंत्र का संरक्षण
    • आग की रोकथाम और प्रबंधन
    • समुदाय की भागीदारी और जागरूकता

निष्कर्ष:

नीलगिरि तहर की जनसंख्या में वृद्धि तमिलनाडु और केरल द्वारा किए गए समन्वित संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर के अंतर्गत निरंतर आवास संरक्षण, घासभूमि पुनर्स्थापन, अग्नि प्रबंधन और तकनीकी निगरानी इस अद्वितीय एवं संकटग्रस्त प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

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