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Blog / 05 Oct 2026

नेक्स्ट-जेन GST और भारत के विकास का अगला चरण

संदर्भ:

हाल ही में, 22 सितंबर 2025 को लागू किए गए नेक्स्ट-जेन GST सुधारों को एक वर्ष पूरा हो गया है। इन सुधारों के बाद कर योग्य आपूर्ति (Taxable Supplies) में 25.8% की वृद्धि हुई, जबकि H1 FY27 में सकल GST संग्रह ₹12.46 लाख करोड़ रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 11.6% की वृद्धि है। 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली GST परिषद की बैठक में ई-इनवॉइसिंग, ITC, पंजीकरण, रिफंड और अनुपालन से जुड़े आगे के सुधारों पर विचार किए जाने की उम्मीद है।

नेक्स्ट-जेन GST दर युक्तिकरण क्या है?

नेक्स्ट-जेन GST का उद्देश्य बहु-स्लैब GST संरचना को सरल बनाना, दरों में असमानता को कम करना, उपभोक्ताओं की लागत घटाना, इनवर्टेड ड्यूटी संरचना को ठीक करना और अनुपालन को आसान बनाना है। इसकी मुख्य संरचना मुख्य रूप से 5% और 18% स्लैब पर आधारित है, जबकि कुछ निर्दिष्ट विलासिता और हानिकारक वस्तुओं (Sin Goods) के लिए 40% डीमेरिट दर रखी गई है।

प्रमुख उपायों में शामिल हैं:

      • आवश्यक वस्तुओं, दवाओं और चयनित कृषि एवं नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर GST में कमी।
      • निर्दिष्ट ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और सीमेंट पर GST को 28% से घटाकर 18% करना।
      • व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को GST से छूट।
      • संचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को कम करने के लिए इनवर्टेड ड्यूटी संरचना में सुधार।

आर्थिक प्रभाव:

      • इस सुधार के साथ आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण विस्तार भी देखने को मिला है:
        • कर योग्य आपूर्ति: इसमें 25.8% की वृद्धि हुई।
        • सकल GST संग्रह: H1 FY27 में ₹12.46 लाख करोड़, जो वर्ष-दर-वर्ष 11.6% की वृद्धि है।
        • B2C बिक्री: इसमें 26.7% की वृद्धि हुई, जो उपभोक्ता मांग में मजबूती को दर्शाती है।
        • GST पंजीकरण: अगस्त 2026 तक बढ़कर लगभग 1.71 करोड़ हो गया।
        • राज्य GST राजस्व: लगभग 16% की वृद्धि हुई।
        • GST रिफंड: ₹1.80 लाख करोड़, जिससे व्यवसायों की तरलता में सुधार हुआ।
      • ये रुझान दर्शाते हैं कि जब कर दरों को कम और सरल बनाने के साथ औपचारिकीकरण (Formalisation) तथा बेहतर अनुपालन को बढ़ावा दिया जाए, तो कम कर दरों के बावजूद राजस्व में मजबूती बनी रह सकती है।

GST सुधार का अगला एजेंडा:

प्रस्तावित सुधार एजेंडे में जोखिम-आधारित डिजिटल पंजीकरण, स्वचालित रिटर्न फाइलिंग, तेज रिफंड, फेसलेस अपील और निर्बाध ITC प्रवाह शामिल हैं। कर संबंधी मुकदमों को कम करने और कर व्याख्या में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

प्रगति के बावजूद महत्वपूर्ण चुनौतियाँ बनी हुई हैं। पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस, ATF और रियल एस्टेट अभी भी बड़े पैमाने पर GST के दायरे से बाहर हैं, जिससे करों के बार-बार लगने की समस्या उत्पन्न होती है। MSMEs को अभी भी कार्यशील पूंजी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि कर भुगतान वास्तविक भुगतान प्राप्त होने के बजाय इनवॉइस जारी करने से जुड़ा हुआ है। वर्गीकरण संबंधी विवाद, अलग-अलग अग्रिम निर्णय और फर्जी इनवॉइस भी अनुपालन से जुड़ी चुनौतियाँ पैदा करते हैं।

आगे की राह:

GST परिषद को प्राकृतिक गैस और ATF को धीरे-धीरे GST के दायरे में शामिल करने, छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाने, देशभर में GSTAT की पीठों को कार्यशील बनाने और पात्र सूक्ष्म उद्यमों के लिए नकद-आधारित GST भुगतान विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

निष्कर्ष:

नेक्स्ट-जेन GST यह दर्शाता है कि कर युक्तिकरण, औपचारिकीकरण और प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन राजस्व में मजबूती बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन दे सकते हैं। अगले चरण में अनुपालन लागत को कम करने, GST के आधार का विस्तार करने, विवादों का समाधान करने तथा ITC और रिफंड तंत्र में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। एक सरल और अधिक पूर्वानुमान योग्य GST व्यवस्था निवेश, उपभोग, MSME प्रतिस्पर्धात्मकता और विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य को मजबूत कर सकती है।

 

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