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Blog / 16 Oct 2025

IUCN रेड लिस्ट 2025: आर्कटिक सील और पक्षियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ा | Dhyeya IAS

संदर्भ:

हाल ही में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने नई रेड लिस्ट जारी की है, जिसमें आर्कटिक सील्स और दुनिया भर की पक्षी प्रजातियों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। यह अपडेट 10 अक्तूबर 2025 को अबू धाबी में आयोजित आईयूसीएन वर्ल्ड कंजरवेशन कांग्रेस में प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों का नुकसान और मानवीय हस्तक्षेप कई प्रजातियों को तेजी से विलुप्ति की स्थिति पर पहुँचा रहे हैं।

मुख्य निष्कर्ष:

1. संकटग्रस्त प्रजातियों का पैमाना:

    •  रेड लिस्ट में अब कुल 1,72,620 प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें से 48,646 प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में मानी गई हैं।
    • पक्षियों में, दुनिया भर की कुल प्रजातियों में से 61% की आबादी लगातार घट रही है, जबकि 2016 में यह आंकड़ा करीब 44% था। यह बताता है कि स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हो चुकी है।

2. सील प्रजातियाँ की कम होती संख्या:

आर्कटिक क्षेत्र की तीन सील प्रजातियों की संरक्षण स्थिति पहले से अधिक खराब हो गई है:

·        हुडेड सील (सिस्टोफोरा क्रिस्टाटा): संवेदनशील से लुप्तप्राय श्रेणी में स्थानांतरित किया गया।

·        बीयर्डेड सील (एरिग्नाथस बार्बेटस): कम चिंताजनक से निकट संकटग्रस्त में स्थानांतरित किया गया।

·        हार्प सील (पैगोफिलस ग्रोएनलैंडिकस): इसे भी कम चिंताजनक से निकट संकटग्रस्त में स्थानांतरित कर दिया गया।

मुख्य खतरा:

    • ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री बर्फ का कम होना है। समुद्री बर्फ प्रजनन, विश्राम, निर्मोचन (खाल बदलने), भोजन की तलाश और शावक पालन के लिए आवश्यक होती है। जैसे-जैसे बर्फ पतली होती जा रही है और उसका मौसमी दायरा घट रहा है, इन सीलों के आवास सिकुड़ रहे हैं, भोजन तक पहुंच कम हो रही है और मानवीय व्यवधान बढ़ रहे हैं।
    • सील प्रजातियाँ के लिए अन्य खतरे: समुद्री यातायात में वृद्धि, तेल और खनिज निष्कर्षण, औद्योगिक मछली पकड़ने में उप-पकड़ (bycatch), ध्वनि प्रदूषण और शिकार।

 

3. पक्षियों की संख्या में अधिक गिरावट

    • मूल्यांकन की गई 11,185 पक्षी प्रजातियों में से 1,256 (लगभग 11.5%) को अब वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त (Threatened) श्रेणी में रखा गया है।
    • पक्षियों की आबादी में गिरावट तेजी से और व्यापक पैमाने पर दर्ज की गई है, खासतौर पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसका सबसे अधिक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
    • मेडागास्कर, पश्चिम अफ्रीका और मध्य अमेरिका जैसे क्षेत्रों में, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय वनों में, पेड़ों की कटाई, कृषि विस्तार और भूमि उपयोग में बदलाव के कारण प्राकृतिक आवास बुरी तरह नष्ट हो रहे हैं।
    • कई पक्षी प्रजातियों को अब 'निकट संकटग्रस्त' (Near Threatened) और 'असुरक्षित' (Vulnerable) जैसी श्रेणियों में भी रखा गया है, जो उनके संरक्षण दर्जे के लगातार बिगड़ने का संकेत है।

निष्कर्ष:

आईयूसीएन की नवीनतम रेड लिस्ट साफ संकेत देती है कि जैव विविधता का संकट लगातार गहराता जा रहा है। आर्कटिक सील्स के सामने खड़ा खतरा सीधे जलवायु परिवर्तन और समुद्री बर्फ के तेजी से घटते क्षेत्र से जुड़ा है। दूसरी ओर, पक्षियों की लगातार घटती आबादी का मुख्य कारण वनों का विनाश, भूमि उपयोग में बदलाव और बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप है। हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर ठोस और समय पर कदम उठाए जाएँ, तो संरक्षण के सफल उदाहरण बन सकते हैं।

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