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Blog / 18 Feb 2026

दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के लिए जीन एडिटिंग की नई तकनीक

संदर्भ:

हाल ही में 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में ब्रॉड इंस्टीट्यूट, हार्वर्ड और मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई जीनोम-एडिटिंग रणनीति का प्रदर्शन किया है। PERT (प्राइम-एडिटिंग-मीडिएटेड रीडथ्रू ऑफ प्रीमैच्योर टर्मिनेशन कोडन) नामक यह तकनीक एक ही दृष्टिकोण से कई आनुवंशिक बीमारियों का इलाज करने में सक्षम है। यह उन बीमारियों के लिए एक 'जीन-एग्नोस्टिक'  समाधान प्रदान करती है, जिनके लिए पहले हर म्यूटेशन के लिए अलग उपचार की आवश्यकता होती थी। 

नॉनसेंस म्यूटेशन के बारे में:

लगभग 25% ज्ञात रोग पैदा करने वाले आनुवंशिक परिवर्तन इसी म्यूटेशन के कारण होते हैं।

    • प्रभाव: ये म्यूटेशन डीएनए में एक समय-पूर्व "स्टॉप कोडन" उत्पन्न कर देते हैं, जिससे शरीर में प्रोटीन का उत्पादन बीच में ही रुक जाता है।
    • संबंधित बीमारियां: सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis), बैटन रोग, टे-सैक्स रोग और नीमन-पिक रोग टाइप-C इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
    • वर्तमान चुनौती: अभी तक प्रत्येक म्यूटेशन के लिए अलग थेरेपी की आवश्यकता होती है, जिससे इलाज बहुत महंगा और समय लेने वाला हो जाता है।

PERT रणनीति क्या है?

प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया में डीएनए के निर्देशों को mRNA में कॉपी किया जाता है, जिसे 'कोडन' (तीन अक्षरों के समूह) के रूप में पढ़ा जाता है। इस प्रक्रिया में tRNA (ट्रांसफर आरएनए) अनुवादक के रूप में कार्य करते हैं और सही अमीनो एसिड को राइबोसोम तक पहुँचाते हैं। 

तकनीक की कार्यप्रणाली:

    • मानव कोशिकाओं में लगभग 418 tRNA जीन होते हैं, जिनमें से कई गैर-जरूरी  होते हैं।
    • वैज्ञानिकों ने इन गैर-जरूरी tRNA को 'सप्रेसर tRNA' (Suppressor tRNA) में बदल दिया।
    • यह विशेष tRNA दोषपूर्ण 'स्टॉप सिग्नल' को अनदेखा कर देता है और प्रोटीन के निर्माण को रुकने नहीं देता।
    • शोधकर्ताओं ने प्राइम एडिटिंग का उपयोग करके एक सामान्य tRNA जीन को स्थायी रूप से 'सप्रेसर tRNA' में बदल दिया, जिससे सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों बनी रहती है।

जीन एडिटिंग के प्रमुख उपकरण:

    • जीन एडिटिंग का अर्थ है जीवित कोशिकाओं के डीएनए में सटीक बदलाव करना। इसके मुख्य उपकरण हैं:
      • ​CRISPR-Cas9: शुरुआती और लोकप्रिय तकनीक।
      • बेस एडिटिंग : व्यक्तिगत डीएनए अक्षरों को बदलना।
      • प्राइम एडिटिंग : यह एक उन्नत जीनोम-एडिटिंग तकनीक है जिसे 'सर्च-एंड-रिप्लेस' टूल कहा जाता है। यह डीएनए की दोनों लड़ियों को पूरी तरह काटे बिना केवल एक लड़ी में लक्षित सुधार करती है। इससे 'ऑफ-टारगेट इफेक्ट्स' (अनचाहे आनुवंशिक बदलाव) का जोखिम न्यूनतम हो जाता है और जीनोमिक सटीकता बनी रहती है।

शोध के महत्वपूर्ण निहितार्थ :

    • सार्वभौमिक उपचार : एक ही रणनीति से कई अलग-अलग आनुवंशिक विकारों का इलाज संभव। 
    • लागत और समय में कमी: हर बीमारी के लिए अलग दवा बनाने की जरूरत नहीं होगी।
    • प्रिसिजन मेडिसिन: यह विशिष्ट जीन के बजाय 'प्लेटफॉर्म-आधारित' उपचारों की ओर एक बड़ा कदम है।

चुनौतियाँ:

    • शरीर के विभिन्न अंगों तक इसकी प्रभावी पहुंच ।
    • दीर्घकालिक सुरक्षा का परीक्षण।
    • नैतिक और नियामक चुनौतियाँ।

निष्कर्ष:

PERT रणनीति जेनेटिक मेडिसिन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि इसके क्लीनिकल ट्रायल और सुरक्षा मानकों पर अभी और काम होना बाकी है, लेकिन यह तकनीक दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे लाखों लोगों के जीवन को बदलने की क्षमता रखती है।