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Blog / 11 Feb 2026

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025

संदर्भ:

हाल ही में भारत ने नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 127 अर्थव्यवस्थाओं में 45वाँ स्थान प्राप्त किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में चार स्थान की वृद्धि है। यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डी.सी. स्थित स्वतंत्र शोध संस्था पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है।

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स के बारे में:

      • नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स यह आकलन करता है कि विभिन्न देश सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए नेटवर्क प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए कितने तैयार हैं। यह सूचकांक चार प्रमुख स्तंभों- प्रौद्योगिकी,जनसंसाधन,शासन, प्रभाव पर आधारित है।
      • इन चारों स्तंभों के अंतर्गत 53 संकेतकों के माध्यम से डिजिटल अवसंरचना, तकनीकी अपनाने, कौशल, नीतिगत वातावरण और परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है।

NRI 2025 में भारत का प्रदर्शन:

      • भारत का स्कोर 2024 में 53.63 से बढ़कर 2025 में 54.43 हो गया है, जो डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की तैयारियों में प्रगति को दर्शाता है।
      • यह रैंकिंग में सुधार डिजिटल अवसंरचना के विस्तार, नीतिगत सुधारों और नवाचार पहलों में निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
      • रिपोर्ट के अनुसार भारत ने निम्न संकेतकों में वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:
        • प्रथम स्थान:
          • दूरसंचार सेवाओं में वार्षिक निवेश
          • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित वैज्ञानिक प्रकाशन
          • सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सेवाओं का निर्यात
          • -वाणिज्य संबंधी कानून
        • द्वितीय स्थान:
          • फाइबर-टू--होम तथा भवन आधारित इंटरनेट सदस्यता
          • मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोग
          • अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ
        • तृतीय स्थान:
          • घरेलू बाजार का आकार
          • आय असमानता
      • ये उपलब्धियाँ भारत की विस्तारित डिजिटल अर्थव्यवस्था, बढ़ते शोध उत्पादन तथा सुदृढ़ कनेक्टिविटी अवसंरचना को दर्शाती हैं।
      • रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी आय के स्तर की तुलना में अधिक नेटवर्क तैयारियों का प्रदर्शन करता है तथा निम्न-मध्यम आय वाले देशों में दूसरा स्थान रखता है।

महत्व:

      • यह रैंकिंग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डिजिटल तैयारी का बहुआयामी आकलन प्रस्तुत करती है, जिसमें केवल अवसंरचना ही नहीं बल्कि मानव संसाधन, शासन की गुणवत्ता तथा सामाजिक प्रभाव भी शामिल हैं।
      • दूरसंचार निवेश और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी निर्यात में उच्च स्थान यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक डिजिटल सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है, विशेषकर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के क्षेत्र में। यह सुधार निम्न राष्ट्रीय पहलों “5जी सेवाओं का व्यापक विस्तार, राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन के अंतर्गत नेटवर्क विस्तार, डिजिटल शिक्षा एवं कौशल विकास पर बढ़ता जोरके अनुरूप है।

चुनौतियाँ:

उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारत अब भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं से नीचे स्थान पर है, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल साक्षरता, शासन ढाँचे और डिजिटल सेवाओं तक समान पहुँच जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। भारत की नेटवर्क तत्परता को और सुदृढ़ करने के लिए साइबर सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करना, डेटा शासन व्यवस्था में सुधार करना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े मानव संसाधन विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक होगा।

निष्कर्ष:

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में 45वें स्थान पर पहुँचना और प्रमुख डिजिटल संकेतकों में सुधार यह दर्शाता है कि भारत एक सुदृढ़ एवं लचीले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। लक्षित अवसंरचना विस्तार, सहायक नीतियाँ तथा शोध एवं नवाचार पर विशेष ध्यान के माध्यम से भारत नेटवर्क प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन को आगे बढ़ा रहा है, जो उसके व्यापक विकास पथ का एक महत्वपूर्ण अंग है।