संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड ने अपनी पहली आधिकारिक बैठक का आयोजन किया। यह बैठक भारत के मखाना (फॉक्स नट) क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत पहल के रूप में देखी जा रही है। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा ₹476 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र योजना प्रारंभ की गई है, जिसका उद्देश्य मखाना की खेती, प्रसंस्करण, विपणन तथा निर्यात तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का समग्र और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।
मखाना विकास योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
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- उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि:
- उन्नत किस्मों के बीज तथा गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सहायता।
- कटाई और प्रसंस्करण कार्यों में यंत्रीकरण को प्रोत्साहन।
- वैज्ञानिक और आधुनिक खेती पद्धतियों का व्यापक प्रचार-प्रसार।
- श्रम-प्रधान, जोखिमपूर्ण और परंपरागत तरीकों पर निर्भरता को कम करना।
- उन्नत किस्मों के बीज तथा गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सहायता।
- कटाई के बाद प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन
- मखाना प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा।
- भंडारण, ग्रेडिंग और प्राथमिक प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास।
- भुना हुआ मखाना, मखाना आटा, स्नैक्स तथा पोषण आधारित उत्पादों जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों को प्रोत्साहन।
- मखाना प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा।
- अनुसंधान एवं विकास:
- फसल सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और रोग-प्रतिरोधी किस्मों के विकास के लिए सहायता।
- जलवायु परिवर्तन के अनुकूल मखाना किस्मों का विकास।
- कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक संगठनों के साथ सहयोग।
- फसल सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और रोग-प्रतिरोधी किस्मों के विकास के लिए सहायता।
- विपणन, ब्रांडिंग एवं निर्यात:
- गुणवत्ता मानकों, परीक्षण व्यवस्था और प्रमाणन तंत्र का विकास।
- मखाना उत्पादों की ब्रांडिंग तथा भौगोलिक संकेतक आधारित प्रचार।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए सहयोग।
- गुणवत्ता मानकों, परीक्षण व्यवस्था और प्रमाणन तंत्र का विकास।
- क्षमता निर्माण एवं किसान सहायता
- किसानों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन तकनीकों में कौशल विकास।
- ऋण, बीमा और विभिन्न सरकारी योजनाओं तक किसानों की बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना।
- किसानों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि:
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मखाना के बारे में:
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- पौधे का नाम: यूरीएल फेरोक्स
- यह एक जलीय फसल है, जो मुख्य रूप से तालाबों, आर्द्रभूमि और निचले जल-भराव वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है।
- भारत विश्व का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है।
- मखाना उत्पादन में बिहार अग्रणी राज्य है, विशेषकर मिथिला और सीमांचल क्षेत्रों में।
- पौधे का नाम: यूरीएल फेरोक्स
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पोषण संबंधी विशेषताएँ:
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- प्रोटीन और आहार रेशा (फाइबर) की मात्रा अधिक।
- वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम।
- एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक विटामिन एवं खनिजों से भरपूर।
- प्रोटीन और आहार रेशा (फाइबर) की मात्रा अधिक।
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राष्ट्रीय मखाना बोर्ड:
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड एक सरकारी निकाय है, जिसे सितंबर 2025 में भारत के मखाना क्षेत्र के विकास और संवर्धन के लिए स्थापित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मखाना क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, आधुनिक तकनीकों को अपनाना, किसानों को सहायता प्रदान करना, मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग को बढ़ावा देना तथा निर्यात को सशक्त बनाना है।
उद्देश्य:
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- मखाना किसानों और प्रसंस्करण से जुड़े सभी हितधारकों को संस्थागत सहयोग प्रदान करना।
- अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार और यंत्रीकरण को प्रोत्साहन देना।
- मखाना उत्पादों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात को मजबूत बनाना।
- किसानों की आय बढ़ाना और उनकी आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- मखाना किसानों और प्रसंस्करण से जुड़े सभी हितधारकों को संस्थागत सहयोग प्रदान करना।
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आर्थिक एवं सामाजिक महत्व:
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- विशेष रूप से पूर्वी भारत में किसानों की आय बढ़ाने में सहायक।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना, विशेषकर महिलाओं और सीमांत किसानों के लिए।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के विकास में योगदान।
- राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करना, जैसे:
- किसानों की आय दोगुनी करना
- आत्मनिर्भर भारत को सशक्त बनाना
- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और निर्यात को प्रोत्साहित करना
- किसानों की आय दोगुनी करना
- विशेष रूप से पूर्वी भारत में किसानों की आय बढ़ाने में सहायक।
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निष्कर्ष:
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की पहली बैठक और ₹476 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र योजना की शुरुआत भारत के मखाना क्षेत्र में छिपी हुई संभावनाओं को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और केंद्रित नीतिगत पहल है। यह पहल खेती से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाकर मखाना को एक उच्च मूल्य वाली कृषि उपज बनाने में सक्षम है जो ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर सकती है और वैश्विक स्वास्थ्य खाद्य बाजार में भारत की उपस्थिति को और बढ़ा सकती है।
