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Blog / 27 Apr 2026

तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने के लिए पाँच वर्षीय परियोजना

प्रसंग:
हाल ही में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के सहयोग से जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करनानामक पाँच वर्षीय परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय विकास योजना में संरक्षण को एकीकृत करके और समुदाय-आधारित संस्थानों को सशक्त बनाकर जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करना है।

पृष्ठभूमि:
इस परियोजना को वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) का समर्थन प्राप्त है। इसके तहत 2025 से 2030 तक के लिए 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैव विविधता संरक्षण के वैश्विक महत्व और समावेशी तथा समुदाय-आधारित पर्यावरणीय शासन को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका को दर्शाता है।

परियोजना के उद्देश्य:

जैव विविधता का स्थानीय शासन में मुख्यधारा में समावेशन :

  • ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में जैव विविधता से जुड़े मुद्दों का एकीकरण।
  • पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) को सशक्त बनाना।
  • सरकार के विभागों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक समाज को शामिल करते हुए बहु-हितधारक मंचों का विकास।

संरक्षण के लिए नवाचारपूर्ण वित्तीय व्यवस्था :

·         एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) ढांचे का क्रियान्वयन।

  • कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग का उपयोग।
  • संरक्षण से जुड़े सतत आजीविका के लिए हरित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा।

ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण:

  • सर्वोत्तम प्रथाओं (best practices) का दस्तावेजीकरण और विस्तार।
  • NBA और MoEFCC की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना।
  • महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की जैव विविधता शासन में भागीदारी बढ़ाना।

केंद्रित क्षेत्र :

तमिलनाडु सथ्यमंगलम परिदृश्य :

  • पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट के संगम पर स्थित।
  • इसमें मुदुमलाई टाइगर रिजर्व और सथ्यमंगलम टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
  • वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदाय संरक्षण के लिए पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान का योगदान देते हैं।

मेघालय गारो हिल्स परिदृश्य:

  • नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व, बलपाक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य शामिल।
  • ग्राम रोजगार परिषद (VECs) जैसी सामुदायिक संस्थाएँ सहभागी संरक्षण योजना का समर्थन करती हैं।

शासन ढांचा:

  • पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के नेतृत्व में नीचे से ऊपर (Bottom-up) शासन प्रणाली।
  • स्थानीय योजनाओं में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) का एकीकरण।
  • समावेशी कार्यान्वयन के लिए संपूर्ण सरकार” (Whole-of-Government) और संपूर्ण समाज” (Whole-of-Society) दृष्टिकोण को अपनाना।

नीतिगत ढाँचों के साथ समन्वय :

यह परियोजना निम्नलिखित ढाँचों के साथ समन्वित है:

राष्ट्रीय ढाँचे

  • राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना (NBSAP 2024–2030)
  • तमिलनाडु विज़न 2030 और मेघालय विज़न 2030
  • विकेन्द्रित ग्रामीण शासन (Decentralised rural governance) से जुड़ी पहलें

 

वैश्विक ढाँचे

  • कुनमिंगमॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (30x30 लक्ष्य)
  • पेरिस समझौता राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)

महत्व :

  • विकेन्द्रित पर्यावरणीय शासन को सुदृढ़ करता है।
  • समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल को बढ़ावा देता है।
  • जैव विविधता को आजीविका सृजन और ग्रामीण विकास के साथ एकीकृत करता है।
  • स्थिरता के लिए नवाचारपूर्ण वित्तीय तंत्रों को प्रोत्साहित करता है।
  • वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों में भारत के योगदान को बढ़ाता है।

निष्कर्ष :

MoEFCC–NBA की यह पहल जैव विविधता शासन का एक दूरदर्शी मॉडल प्रस्तुत करती है, जो वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को स्थानीय कार्रवाई से जोड़ती है। जमीनी स्तर की संस्थाओं और समुदायों को सशक्त बनाकर यह परियोजना सुनिश्चित करना चाहती है कि संरक्षण सतत और समावेशी विकास का अभिन्न हिस्सा बने।