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Blog / 22 Aug 2026

मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) 2026

संदर्भ:

हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme—MPMS) को ₹62,500 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ अधिसूचित किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू होगी। इसका उद्देश्य भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, घरेलू मूल्य संवर्धन को गहरा करना और मोबाइल फोन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

पृष्ठभूमि:

      • MPMS, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI-LSEM) योजना का स्थान लेगी, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। जहाँ पिछली PLI व्यवस्था का मुख्य जोर उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने पर था, वहीं MPMS में भारतीय स्वामित्व वाले ब्रांड, स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP), उत्पाद डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा घरेलू सोर्सिंग पर अधिक जोर दिया गया है।
      • वर्तमान में भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। भारत में उपयोग किए जाने वाले लगभग 99.2% मोबाइल फोन देश में ही निर्मित होते हैं। वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात उत्पाद श्रेणी के रूप में भी उभरे।

प्रमुख उद्देश्य:

इस योजना का उद्देश्य है:

      • बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन विनिर्माण का विस्तार करना।
      • घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ाना।
      • घरेलू घटकों और सब-असेंबली की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
      • भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल फोन ब्रांडों को बढ़ावा देना।
      • स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP), उत्पाद डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करना।
      • भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में और अधिक एकीकृत करना।
      • रोजगार सृजन करना और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करना।

दो लक्षित क्षेत्र:

MPMS के अंतर्गत दो लक्षित क्षेत्र हैं।

      • लक्षित क्षेत्र 1 (TS1): यह मोबाइल फोन विनिर्माण पर केंद्रित है और पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक अलग-अलग प्रोत्साहन प्रदान करता है। इन प्रोत्साहनों को पाँच वर्षों की अवधि में धीरे-धीरे कम होने के तरीके से संरचित किया गया है, अर्थात् पूरे पाँच वर्षों में प्रोत्साहन की दर समान नहीं रहेगी।
      • लक्षित क्षेत्र 2 (TS2): यह विशेष रूप से भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन प्रदान करता है। पात्र भारतीय ब्रांडों को 5% प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि घरेलू डिजाइन और R&D के लिए अतिरिक्त 3% प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अलावा, गैर-वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।

भारतीय ब्रांड और स्वदेशी बौद्धिक संपदा:

      • MPMS की एक प्रमुख विशेषता इसका वास्तविक भारतीय स्वामित्व पर जोर देना है। TS2 के अंतर्गत पात्र होने के लिए किसी कंपनी का भारत में पंजीकृत या निगमित होना आवश्यक है। साथ ही, उसके पास भारत में बौद्धिक संपदा और ट्रेडमार्क का स्वामित्व, भारतीय नागरिकों के नियंत्रण में प्रबंधन तथा 51% से अधिक हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों के पास होनी चाहिए।
      • कंपनी के पास भारत में इन-हाउस R&D और डिजाइन क्षमताएँ भी होनी चाहिए।
      • यह केवल भारत में मोबाइल फोन के विनिर्माण से आगे बढ़कर भारतीय तकनीक, ब्रांड और बौद्धिक संपदा के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

घरेलू सोर्सिंग के लिए प्रोत्साहन:

      • योजना के तहत प्रमुख घटकों और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग के लिए 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
      • इस प्रोत्साहन के लिए संबंधित घटकों को किसी वित्तीय वर्ष में आवेदक द्वारा निर्मित कुल मोबाइल फोन इकाइयों के कम-से-कम 25% के लिए स्थानीयकृत किया जाना आवश्यक होगा।
      • स्थानीयकरण के दायरे में डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, एनक्लोजर तथा यूएसबी केबल जैसे घटक शामिल हो सकते हैं।
      • इसका उद्देश्य केवल अंतिम असेंबली तक भारत की भूमिका सीमित रखने के बजाय गहरी बैकवर्ड इंटीग्रेशन और घरेलू घटक विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

पात्रता:

      • TS1 के अंतर्गत: भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माता, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रदाता भी शामिल हैं, के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम ₹10,000 करोड़ का कारोबार होना आवश्यक है।
      • TS2 के अंतर्गत: आवेदक का वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम ₹1,000 करोड़ का कारोबार होना चाहिए और उसे भारतीय ब्रांड होने से संबंधित निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा।

महत्त्व:

      • MPMS भारत को असेंबली आधारित विनिर्माण से आगे बढ़कर अधिक घरेलू मूल्य संवर्धन वाले विनिर्माण की दिशा में ले जाने में मदद कर सकती है। स्थानीयकरण के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन से घरेलू घटक विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है, जबकि भारतीय ब्रांडों के लिए समर्पित लक्षित क्षेत्र घरेलू स्तर पर प्रौद्योगिकी, डिजाइन और बौद्धिक संपदा के स्वामित्व को बढ़ावा दे सकता है।
      • यह योजना रोजगार को मजबूत करने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े भारतीय निर्माताओं और MSMEs के लिए नए अवसरों का विस्तार करने में भी सहायक हो सकती है।

 

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