संदर्भ:
हाल ही में, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज (MASLD) भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रहा है।
MASLD के विषय में:
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- मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज (MASLD), जिसे पूर्व में 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज' (NAFLD) कहा जाता था, एक अत्यंत सामान्य किंतु लक्षणरहित स्थिति है। इसकी मुख्य विशेषता लिवर में अतिरिक्त वसा का जमा होना है, जो सीधे तौर पर मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे मेटाबॉलिक कारकों से जुड़ी होती है।
- वैश्विक स्तर पर लगभग 30% वयस्क इससे प्रभावित हैं। शुरुआती चरणों में वजन घटाने, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, अन्यथा यह गंभीर होकर सिरोसिस, लिवर फेलियर या कैंसर का कारण बन सकता है।
- मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज (MASLD), जिसे पूर्व में 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज' (NAFLD) कहा जाता था, एक अत्यंत सामान्य किंतु लक्षणरहित स्थिति है। इसकी मुख्य विशेषता लिवर में अतिरिक्त वसा का जमा होना है, जो सीधे तौर पर मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे मेटाबॉलिक कारकों से जुड़ी होती है।
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जोखिम कारक:
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- भारत की एक बड़ी आबादी MASLD से प्रभावित है। भारतीय अध्ययनों के अनुसार, लगभग एक-तिहाई वयस्क इससे पीड़ित हो सकते हैं, विशेषकर वे लोग जिन्हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम है।
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मुख्य जोखिम कारक:
- अधिक वजन या मोटापा
- टाइप 2 डायबिटीज
- उच्च रक्तचाप
- कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का बढ़ा हुआ स्तर
- गतिहीन जीवनशैली (Sedentary lifestyle)
- अधिक वजन या मोटापा
- यह बीमारी इंसुलिन रेजिस्टेंस से मजबूती से जुड़ी हुई है, इसलिए इसके बढ़ने से रोकने के लिए शुरुआती पहचान बहुत महत्वपूर्ण है।
- भारत की एक बड़ी आबादी MASLD से प्रभावित है। भारतीय अध्ययनों के अनुसार, लगभग एक-तिहाई वयस्क इससे पीड़ित हो सकते हैं, विशेषकर वे लोग जिन्हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम है।
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पैथोफिज़ियोलॉजी और बीमारी का बढ़ना:
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- MASLD में लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा हो जाती है, जो इलाज न होने पर सूजन और घाव पैदा कर सकती है। यह इन चरणों में आगे बढ़ती है:
- स्टीयोटोसिस (Steatosis): बिना सूजन के वसा का जमा होना।
- स्टीटोहेपेटाइटिस (Steatohepatitis): लिवर की कोशिकाओं में सूजन।
- फाइब्रोसिस (Fibrosis): लिवर में निशान या स्कार टिश्यू का बनना।
- सिरोसिस (Cirrhosis): लिवर का गंभीर रूप से डैमेज होना, जिससे लिवर फेलियर और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
- स्टीयोटोसिस (Steatosis): बिना सूजन के वसा का जमा होना।
- शुरुआती MASLD के अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) भी सामान्य आ सकते हैं, जिससे निदान मुश्किल हो जाता है।
- MASLD में लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा हो जाती है, जो इलाज न होने पर सूजन और घाव पैदा कर सकती है। यह इन चरणों में आगे बढ़ती है:
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प्रबंधन और उपचार:
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- MASLD को जीवनशैली में बदलाव के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है:
- आहार: साबुत अनाज, फल, सब्जियां और लीन प्रोटीन पर जोर दें; रिफाइंड कार्ब्स, मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड कम करें; मल्टीग्रेन अनाज को प्राथमिकता दें।
- वजन प्रबंधन: शरीर के वजन में 7-10% की कमी लिवर की चर्बी और कार्यक्षमता में सुधार करती है।
- शारीरिक गतिविधि: एरोबिक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों को शामिल करें, बैठने का समय कम करें और बीच-बीच में छोटे एक्टिव ब्रेक लें।
- नींद और उपवास: 7-8 घंटे की नींद ले,विशेषज्ञ की देखरेख में इंटरमिटेंट फास्टिंग (16:8 या 14:10) अपनाएं।
- आहार: साबुत अनाज, फल, सब्जियां और लीन प्रोटीन पर जोर दें; रिफाइंड कार्ब्स, मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड कम करें; मल्टीग्रेन अनाज को प्राथमिकता दें।
- गंभीर मामलों में मेडिकल मैनेजमेंट (डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल के लिए) और बैरिएट्रिक सर्जरी का उपयोग किया जा सकता है।
- MASLD को जीवनशैली में बदलाव के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है:
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सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थ:
मोटापे, गतिहीन जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण भारत में MASLD एक बढ़ती चुनौती है। जागरूकता, स्क्रीनिंग, कार्यस्थल कल्याण कार्यक्रम और शुरुआती हस्तक्षेप से सिरोसिस, लिवर कैंसर और हृदय संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
MASLD एक ऐसी बीमारी है जिससे बचाव और प्रबंधन संभव है। NAFLD से इसका नया नामकरण (MASLD) मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और लिवर के कार्य के बीच के संबंध को दर्शाता है। इस 'साइलेंट महामारी' को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती जांच और जीवनशैली में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण हैं।

