संदर्भ:
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और स्वतंत्र वन्यजीव शोधकर्ताओं ने हाल ही में राजस्थान के बीकानेर जिले (गजनेर) में 'मेसालिना बिश्नोई' (Mesalina bishnoi) नामक छिपकली की एक बिल्कुल नई प्रजाति की खोज की है। यह खोज मरुस्थलीय जैव विविधता के अनदेखे पहलुओं को भी सामने लाती है।
पृष्ठभूमि और वर्तमान खोज:
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- वर्ष 1935 में ब्रिटिश प्राणी विज्ञानी मैल्कम ए. स्मिथ ने जैसलमेर क्षेत्र में मेसालिना (Mesalina) वंश (Genus) की उपस्थिति का उल्लेख किया था। हालांकि, वैज्ञानिक पुष्टता के लिए आवश्यक वास्तविक 'भौतिक नमूना' (Specimen Evidence) उपलब्ध नहीं होने के कारण यह रिकॉर्ड केवल कागजों तक सीमित था।
- हाल ही में बीकानेर के एक पथरीले मरुस्थलीय परिदृश्य में वैज्ञानिकों द्वारा एकत्र किए गए नमूनों और आनुवंशिक विश्लेषण (Genetic Analysis) के बाद, भारत में मेसालिना (Mesalina) वंश की उपस्थिति का यह पहला आधिकारिक और पुष्ट वैज्ञानिक प्रमाण बन गया है।
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मेसालिना बिश्नोई के बारे में:
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- खोज और स्थान: मेसालिना बिश्नोई की खोज भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले में गजनेर के पास, थार मरुस्थल क्षेत्र में की गई।
- आवास प्रकार: यह प्रजाति कठोर मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाई जाती है, जहाँ कठोर व पथरीली मिट्टी, बहुत कम वनस्पति और अत्यधिक शुष्क जलवायु होती है।
- वर्गीकरणीय पहचान (Taxonomic Identity): यह छिपकली की एक नई पहचानी गई प्रजाति है, जो मेसालिना (Mesalina) वंश से संबंधित है। इस वंश की छिपकलियाँ छोटी, तेज़ गति से चलने वाली और दिन में सक्रिय (diurnal) होती हैं।
- भारत में पहला रिकॉर्ड: यह खोज भारत में मेसालिना (Mesalina) वंश की पहली पुष्ट उपस्थिति है, जो प्रमाणित नमूना-आधारित साक्ष्य पर आधारित है।
- नामकरण का महत्व: इस प्रजाति का नाम “बिश्नोई” रखा गया है, जो राजस्थान के बिश्नोई समुदाय के सम्मान में है, जो वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की मजबूत परंपरा के लिए जाना जाता है।
- शारीरिक आकार: यह एक छोटे शरीर वाली छिपकली है, जिसकी थूथन से मलद्वार तक लंबाई लगभग 39.2 मिमी है।
- रंग और पैटर्न: इसका शरीर धूसर से जैतूनी-भूरा होता है, जिसमें पार्श्वीय धारियाँ, आँखों के पीछे काले निशान और गहरे धब्बों व सफेद बिंदुओं का मिश्रित पैटर्न होता है।
- खोज और स्थान: मेसालिना बिश्नोई की खोज भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले में गजनेर के पास, थार मरुस्थल क्षेत्र में की गई।
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भारत में प्रमुख मॉनिटर छिपकली प्रजातियाँ:
मॉनिटर छिपकलियाँ वरैनिडी कुल से संबंधित अत्यंत बुद्धिमान सरीसृप हैं। भारत में ये वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित हैं, अतः इनका शिकार या व्यापार गंभीर अपराध है।
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- बंगाल मॉनिटर (वरैनस बेंगालेंसिस)
वनों, कृषि भूमि तथा शहरी सीमांत क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाया जाता है। - एशियाई जल मॉनिटर (वरैनस साल्वेटर)
विश्व की दूसरी सबसे बड़ी छिपकली; सुंदरबन जैसे मैंग्रोव तथा आर्द्रभूमियों में पाया जाता है। - पीला मॉनिटर (वरैनस फ्लेवेसेंस)
उत्तरी एवं पूर्वी भारत के बाढ़-मैदानों तथा आर्द्र घासभूमियों में निवास करता है। - मरुस्थलीय मॉनिटर (वरैनस ग्रिसियस)
शुष्क क्षेत्रों के अनुकूल; विशेष रूप से थार मरुस्थल तथा गुजरात के कुछ भागों में पाया जाता है।
- बंगाल मॉनिटर (वरैनस बेंगालेंसिस)
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निष्कर्ष:
मेसालिना बिश्नोई की खोज भारत की सरीसृप जैव विविधता में एक महत्वपूर्ण योगदान है। यह न केवल मरुस्थलीय प्रजातियों की वैज्ञानिक समझ को बढ़ाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि थार मरुस्थल अभी भी कई नई जैविक खोजों को समेटे हुए एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र है।
