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Blog / 01 Jul 2025

“मीडिएशन फॉर नेशन” अभियान

सन्दर्भ:

भारत की न्यायपालिका पर लगातार बढ़ते मामलों का दबाव न केवल संस्थागत दक्षता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच को भी चुनौतीपूर्ण बना रहा है। ऐसे में, 1 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा मीडिएशन फॉर नेशनअभियान एक सराहनीय पहल है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से शीघ्र और सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना है। यह अभियान 30 सितंबर 2025 तक चलेगा और इसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) तथा मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (MCPC) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाएगा।

अभियान के उद्देश्य

इस अभियान का मूल उद्देश्य न्यायालयों में उपयुक्त लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता के माध्यम से समाधान की दिशा में अग्रसर करना है। यह पहल देश की निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तक लागू की जाएगी। अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि आम जनता में यह विश्वास पैदा करना कि मध्यस्थता (मेडिएशन) एक प्रभावी, तेज, कम खर्चीली और भरोसेमंद विधिक उपाय है।

किन मामलों पर होगा ज़ोर?

अभियान के तहत मध्यस्थता योग्य मामलों की श्रेणियों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा एवं उपभोक्ता मामले, साथ ही ऋण वसूली, संपत्ति संबंधी विवाद, बेदखली और भूमि अधिग्रहण जैसे कई सिविल मामले शामिल हैं।

अभियान का महत्व

1.        गवर्नेंस और न्यायिक सुधार: यह अभियान वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र (ADR) के ज़रिए न्यायिक पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देगा। इससे न्याय प्रणाली का बोझ भी कम होगा।

2.      सामाजिक लाभ: आम नागरिकों को त्वरित, सम्मानजनक और आर्थिक रूप से किफायती समाधान मिल सकेगा, विशेषकर ग्रामीण और कमजोर वर्गों को।

3.      नीतिगत प्रासंगिकता: यह पहल नीति-निर्माताओं को यह संदेश देती है कि अदालतों के साथ-साथ मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक साधनों का सशक्तिकरण आवश्यक है।

इस अभियान की आवश्यकता क्यों?

भारत में न्यायिक प्रक्रिया अक्सर धीमी, तकनीकी और महंगी होती है। इससे आम जनता को न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश की निचली अदालतों में 3 करोड़, उच्च न्यायालयों में 60 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 70,000 से अधिक मामले लंबित हैं।

इसके अतिरिक्त, छोटे-छोटे पारिवारिक या व्यावसायिक विवादों का समाधान पाने में आम व्यक्ति को भारी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक तनाव झेलना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मध्यस्थता एक कम खर्चीला, तनावमुक्त और संवाद-आधारित समाधान प्रदान करती है।

संविधानिक प्रासंगिकता

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A न्याय तक समान और सुलभ पहुंच की बात करता है। यह अभियान विशेषकर ग्रामीण, वंचित और कमजोर वर्गों के लिए एक प्रभावी औजार बन सकता है, जिससे वे बिना अधिक खर्च किए न्याय पा सकें।

निष्कर्ष

मीडिएशन फॉर नेशनएक व्यवहारिक, मानवीय और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण है, जो भारत की न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह पहल न केवल अदालतों के बोझ को कम करेगी, बल्कि नागरिकों को समयबद्ध, सम्मानजनक और सहभागितापूर्ण न्याय प्रदान करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

 

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