संदर्भ:
हाल ही में, 21 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र के दौरान मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इसका उद्देश्य राज्य में एक समान नागरिक कानून व्यवस्था लागू करना है, जबकि अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes - STs) को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
यह विधेयक व्यक्तिगत (पर्सनल) कानूनों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तुत करता है-
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- बहुविवाह (Polygamy) तथा निकाह हलाला को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।
- लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
- विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति का उत्तराधिकार (Succession), दत्तक ग्रहण (Adoption) तथा भरण-पोषण (Maintenance) से संबंधित मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान किया गया है।
- अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को उनकी पारंपरिक कानून व्यवस्था एवं सांस्कृतिक प्रथाओं की रक्षा हेतु इस विधेयक से छूट दी गई है।
- इस विधेयक का मसौदा सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किया गया था।
- बहुविवाह (Polygamy) तथा निकाह हलाला को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।
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समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) क्या है?
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- समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ ऐसे समान एवं धर्मनिरपेक्ष नागरिक कानूनों से है, जो विवाह, तलाक, भरण-पोषण, दत्तक ग्रहण, अभिभावकत्व तथा उत्तराधिकार जैसे विषयों पर सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हों, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। इसका उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।
- यूसीसी का संवैधानिक आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित है, जो राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy - DPSPs) का हिस्सा है। अनुच्छेद 44 राज्य को भारत के समस्त क्षेत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
- समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ ऐसे समान एवं धर्मनिरपेक्ष नागरिक कानूनों से है, जो विवाह, तलाक, भरण-पोषण, दत्तक ग्रहण, अभिभावकत्व तथा उत्तराधिकार जैसे विषयों पर सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हों, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। इसका उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।
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भारत में यूसीसी की वर्तमान स्थिति:
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- उत्तराखंड स्वतंत्रता के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। यह अधिनियम 2024 में पारित हुआ तथा जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ।
- गोवा आज भी 1867 की पुर्तगाली सिविल संहिता (Portuguese Civil Code, 1867) का पालन करता है, जिससे वह लंबे समय से समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का एकमात्र राज्य बना हुआ है।
- मध्य प्रदेश ने अब यूसीसी विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जो अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होगा।
- असम और गुजरात ने भी वर्ष 2026 में अपनी-अपनी विधानसभाओं में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किए हैं, जो राज्यों के स्तर पर नागरिक कानून सुधारों की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
- उत्तराखंड स्वतंत्रता के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। यह अधिनियम 2024 में पारित हुआ तथा जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ।
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महत्त्व:
मध्य प्रदेश का यूसीसी विधेयक, 2026 समान नागरिक संहिता पर चल रही राष्ट्रीय बहस में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके समर्थकों का मानना है कि यह लैंगिक समानता (Gender Equality), कानूनी एकरूपता (Legal Uniformity) तथा संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता (Constitutional Secularism) को बढ़ावा देगा। वहीं, आलोचकों का तर्क है कि इन उद्देश्यों के साथ धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक विविधता तथा संघीय व्यवस्था (Federal Principles) के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। यह विधेयक भारत में अनुच्छेद 44 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी भावी कानूनी एवं संवैधानिक चर्चाओं को महत्वपूर्ण दिशा प्रदान कर सकता है।
