संदर्भ:
हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से उत्पन्न जन-स्वास्थ्य संकट के बाद, मध्य प्रदेश शासन ने राज्यव्यापी 'स्वच्छ जल अभियान' शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 10 जनवरी 2026 को शुरू किया गया यह अभियान, प्रदेश की जल-आपूर्ति अवसंरचना (Infrastructure) को सुदृढ़ करने और नागरिकों को 'सुरक्षित पेयजल का अधिकार' सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पृष्ठभूमि:
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- भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में लंबे समय से शामिल इंदौर को हाल ही में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2025 के अंत में भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण डायरिया (दस्त) का प्रकोप फैला और कई लोगों की मौत हो गई।
- जांच में सामने आया कि पाइपलाइन में रिसाव और पेयजल लाइनों के साथ सीवरेज के मिलने के कारण नगर निगम की जलापूर्ति दूषित हो गई थी। स्थानीय निवासियों ने कथित तौर पर कई महीनों से दुर्गंधयुक्त पानी की शिकायत की थी, लेकिन इन चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया गया।
- विशेषज्ञों, ऑडिट रिपोर्टों और नागरिक समाज संगठनों ने जल बुनियादी ढांचे में प्रणालीगत कमजोरियों को उजागर किया, जिनमें नेटवर्क में रिसाव, वास्तविक समय (real-time) जल गुणवत्ता निगरानी की कमी और कमजोर शिकायत निवारण तंत्र शामिल थे।
- इन ढांचागत कमियों को पहले भी स्वतंत्र ऑडिट द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसमें भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट भी शामिल है, जिसने पिछले वर्षों में व्यापक संदूषण और पाइपलाइन मरम्मत में देरी के मामलों का दस्तावेजीकरण किया था।
- भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में लंबे समय से शामिल इंदौर को हाल ही में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2025 के अंत में भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण डायरिया (दस्त) का प्रकोप फैला और कई लोगों की मौत हो गई।
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स्वच्छ जल अभियान के उद्देश्य और विशेषताएं:
जल सुरक्षा और आपूर्ति को व्यवस्थित रूप से संबोधित करने के लिए इस अभियान को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। यह अभियान दो चरणों में (जनवरी से मार्च 2026 तक) संचालित किया जा रहा है, जिसकी कार्ययोजना निम्नलिखित है:
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- GIS मैपिंग और पाइपलाइन निदान: पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की व्यापक GIS मैपिंग की जा रही है ताकि क्रॉस-कनेक्शन, रिसाव और उच्च जोखिम वाले संदूषण क्षेत्रों की पहचान की जा सके। भूमिगत पाइपलाइनों में छिपे हुए दोषों और ढांचागत कमजोरियों का पता लगाने के लिए रोबोट-आधारित लीकेज डिटेक्शन तकनीक तैनात की जाएगी।
- जल सुनवाई: नागरिकों की भागीदारी को संस्थागत बनाने, स्थानीय शिकायतों को हल करने और सुरक्षित पेयजल के अधिकार को बनाए रखने के लिए हर मंगलवार को एक समर्पित 'जल सुनवाई' निर्धारित की गई है। व्यापक पहुंच और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सीएम हेल्पलाइन (181) के माध्यम से जल संबंधी शिकायतों को दर्ज करने की व्यवस्था को एकीकृत किया गया है।
- शिकायत निवारण और जवाबदेही: अभियान के तहत पेयजल की गुणवत्ता और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के समयबद्ध निपटान को अनिवार्य बनाया गया है। आवेदकों को नियमित स्टेटस अपडेट दिए जाएंगे, और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए आधिकारिक लापरवाही के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' के दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
- जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी: यह पहल जन जागरूकता अभियानों, सामुदायिक स्तर पर निगरानी और नगर निगमों, जिला प्रशासन एवं पंचायत निकायों के बीच समन्वय पर जोर देती है ताकि त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई और निवारक निगरानी संभव हो सके।
- GIS मैपिंग और पाइपलाइन निदान: पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की व्यापक GIS मैपिंग की जा रही है ताकि क्रॉस-कनेक्शन, रिसाव और उच्च जोखिम वाले संदूषण क्षेत्रों की पहचान की जा सके। भूमिगत पाइपलाइनों में छिपे हुए दोषों और ढांचागत कमजोरियों का पता लगाने के लिए रोबोट-आधारित लीकेज डिटेक्शन तकनीक तैनात की जाएगी।
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निष्कर्ष:
स्वच्छ जल अभियान, जल प्रदूषण के एक गंभीर संकट के प्रति राज्य स्तरीय समग्र प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है। यह अभियान तकनीकी निदान, संस्थागत जवाबदेही और नागरिक भागीदारी को जोड़कर, भविष्य की त्रासदियों को रोकने के साथ-साथ जल सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास करता है।
