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Blog / 27 Aug 2026

लद्दाख ने 23 विरासत स्थलों को संरक्षित स्मारक घोषित किया

संदर्भ:

हाल ही में लद्दाख प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के 23 विरासत स्थलों को जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक घोषित किया। इनमें शैलचित्र, चट्टानों पर उत्कीर्ण चित्र, प्राचीन गुफाएँ, मठ, किले, महल और अभिलेख शामिल हैं।

संरक्षित स्मारक क्या हैं?

संरक्षित स्मारक ऐसे स्थल, संरचना या पुरातात्त्विक अवशेष होते हैं जिन्हें उनके ऐतिहासिक, पुरातात्त्विक या कलात्मक महत्व के कारण कानूनी संरक्षण दिया जाता है। इससे अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण और बदलाव को रोकने तथा वैज्ञानिक संरक्षण एवं पुनर्स्थापन में सहायता मिलती है।

लद्दाख के विरासत स्थलों के बारे में:

      • अधिसूचित स्थल लद्दाख के सांस्कृतिक इतिहास के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं। प्रमुख उदाहरण हैं:
        • शार्नोस का शैलचित्र स्थल
        • मैत्रेय बुद्ध की शैल-प्रतिमा
        • तिंगमोसगांग किला
        • सासपोल की प्राचीन गुफाएँ
        • स्तोंगडे गोंपा
        • सुमूर किला
        • कारगिल के योरबाल्टक में शैल-अभिलेख
      • शैलचित्र प्रागैतिहासिक या प्रारंभिक ऐतिहासिक समुदायों द्वारा चट्टानों पर बनाए गए उत्कीर्ण चित्र होते हैं, जबकि गोंपा हिमालयी और पार-हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले बौद्ध मठ हैं।

जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के बारे में:

      • जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1920 ई. जम्मू-कश्मीर में प्राचीन स्मारकों, पुरातात्त्विक अवशेषों और पुरावशेषों के संरक्षण के लिए बनाया गया क्षेत्रीय कानून है। इसकी शुरुआत संवत 1977 के अधिनियम संख्या V के रूप में हुई, जो 1920 ई. के अनुरूप है, और यह 4 अगस्त 1925 को लागू हुआ।
      • प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 का ढाँचा प्रारंभ में जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था। बाद में जम्मू-कश्मीर प्राचीन स्मारक संरक्षण नियम, 2012 के माध्यम से विस्तृत कार्यान्वयन संबंधी प्रावधान किए गए।
      • यह अधिनियम सामान्यतः 100 वर्ष या उससे अधिक पुराने स्मारकों पर लागू होता है। इसके तहत सरकार स्मारकों को संरक्षित घोषित कर सकती है, उनका संरक्षण अपने अधीन ले सकती है तथा निजी स्वामियों के साथ संरक्षण संबंधी समझौते कर सकती है।
      • यह पुरातात्त्विक उत्खनन, पुरावशेषों के आवागमन और व्यापार को नियंत्रित करता है तथा पवित्र स्थलों को दुरुपयोग और अपवित्रीकरण से बचाता है। इसके कार्यान्वयन से जम्मू-कश्मीर अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय जुड़ा है, जबकि कुछ स्मारक केंद्र सरकार के कानूनों के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा अलग से संरक्षित हैं।

संवैधानिक प्रावधान:

      • अनुच्छेद 49: संविधान का अनुच्छेद 49 राज्य को राष्ट्रीय महत्व के घोषित स्मारकों, स्थानों और कलात्मक या ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं के संरक्षण का निर्देश देता है।
      • अनुच्छेद 51A(च): यह नागरिकों का मौलिक कर्तव्य है कि वे भारत की समृद्ध मिश्रित सांस्कृतिक विरासत का सम्मान और संरक्षण करें।
      • सातवीं अनुसूची:
        • संघ सूची, प्रविष्टि 67: राष्ट्रीय स्मारक और पुरातात्त्विक स्थल।
        • राज्य सूची, प्रविष्टि 12: राज्य द्वारा नियंत्रित स्मारक।
        • समवर्ती सूची, प्रविष्टि 40: राष्ट्रीय महत्व के घोषित स्थलों को छोड़कर अन्य पुरातात्त्विक स्थल और अवशेष।

महत्व:

      • यह अधिसूचना लद्दाख की पुरातात्त्विक विरासत को अतिक्रमण, उपेक्षा और प्राकृतिक क्षरण से बचाने में मदद करेगी। ये स्थल प्राचीन व्यापार मार्गों, धार्मिक परंपराओं, बस्तियों तथा हिमालय और मध्य एशिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रमाण प्रदान करते हैं।
      • यह सतत विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने और लद्दाख की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होगा।

निष्कर्ष:

23 विरासत स्थलों को संरक्षण प्रदान करने से लद्दाख की पुरातात्त्विक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत सुरक्षा मिलेगी। यह भारत की विविध सभ्यतागत विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखते हुए विकास, विरासत संरक्षण और सतत पर्यटन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

 

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