संदर्भ:
दो सप्ताह तक चलने वाला काशी तमिल संगमम 4.0 (KTS 4.0) का समापन 15 दिसंबर 2025 को हो गया। यह 2 से 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया गया। इस संस्करण की थीम “लेट्स लर्न तमिल – तमिल करकलम (तमिल करपोम)” थी। इसका प्रमुख उद्देश्य तमिलनाडु और काशी (वाराणसी) के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना है। यह पहल भारत सरकार की एक भारत–श्रेष्ठ भारत योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी समझ, सांस्कृतिक संवाद और सभ्यतागत एकता को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि:
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- शुरुआत: काशी तमिल संगमम की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई। यह पहल काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के उत्सव के रूप में विकसित हुई है।
- आयोजक: इसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है, जिसमें IIT मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ज्ञान भागीदार के रूप में सहयोग करते हैं।
- पिछले संस्करण: इसके पूर्व संस्करण वर्ष 2022, 2023 तथा 2025 की शुरुआत में आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं ज्ञान आधारित गतिविधियाँ प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
- शुरुआत: काशी तमिल संगमम की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई। यह पहल काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के उत्सव के रूप में विकसित हुई है।
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थीम:
“लेट्स लर्न तमिल – तमिल करकलम” (तमिल करपोम)”
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- वाराणसी के स्कूलों में तमिल भाषा सीखने को बढ़ावा देता है।
- छात्रों और शिक्षकों को तमिल साहित्य, कला और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ता है।
- वाराणसी के स्कूलों में तमिल भाषा सीखने को बढ़ावा देता है।
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उद्देश्य:
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- तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक एवं भाषाई संबंधों को और अधिक मजबूत करना।
- शिक्षा, कला तथा विरासत-आधारित गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच आपसी संपर्क एवं संवाद को प्रोत्साहित करना।
- पूरे भारत में तमिल भाषा के अध्ययन, प्रसार और उसके प्रति सम्मान को बढ़ावा देना।
- तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक एवं भाषाई संबंधों को और अधिक मजबूत करना।
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प्रतिभागी:
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- तमिलनाडु से आए 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया, जिनमें छात्र, शिक्षक, कलाकार, लेखक, किसान तथा आध्यात्मिक विद्वान सम्मिलित थे।
- वाराणसी एवं आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ सक्रिय सहभागिता एवं पारस्परिक संवाद स्थापित किया गया।
- तमिलनाडु से आए 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया, जिनमें छात्र, शिक्षक, कलाकार, लेखक, किसान तथा आध्यात्मिक विद्वान सम्मिलित थे।
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मुख्य कार्यक्रम:
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कार्यक्रम |
विवरण |
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तमिल करकलाम |
बहुभाषिकता को प्रोत्साहित करने हेतु वाराणसी के विद्यालयों में तमिल भाषा का शिक्षण। |
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तमिल करपोम |
काशी के विद्यार्थियों के लिए तमिलनाडु की शैक्षणिक अध्ययन यात्राएँ, जिससे वे तमिल संस्कृति और परंपराओं से परिचित हो सकें। |
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ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान |
तेनकासी (तमिलनाडु) से काशी तक प्राचीन मार्ग पर आधारित सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत यात्रा, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है। |
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सांस्कृतिक संध्याएँ |
नमो घाट एवं अन्य स्थलों पर उत्तर–दक्षिण भारत की कला, संगीत और नृत्य परंपराओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ। |
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समापन समारोह |
रामेश्वरम में आयोजित भव्य समापन कार्यक्रम, जिसमें सांस्कृतिक समन्वय और सभ्यतागत एकता का उत्सव मनाया गया। |
महत्त्व:
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- सांस्कृतिक एकीकरण: भारत की सतत और समृद्ध सभ्यतागत परंपरा को प्रदर्शित करता है तथा विविधता में एकता के मूल सिद्धांत को और अधिक सुदृढ़ करता है।
- भाषाई प्रोत्साहन: तमिल और हिंदी भाषी क्षेत्रों के बीच पारस्परिक भाषा-अध्ययन एवं भाषाई सम्मान को बढ़ावा देता है।
- शैक्षणिक एवं सामाजिक प्रभाव: युवाओं में शैक्षणिक आदान–प्रदान, सांस्कृतिक विरासत की समझ और सभ्यतागत चेतना को सुदृढ़ करता है।
- राष्ट्रीय एकता: उत्तर और दक्षिण भारत के बीच स्थायी एवं सार्थक संबंध स्थापित कर एक भारत–श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूती प्रदान करता है।
- सांस्कृतिक एकीकरण: भारत की सतत और समृद्ध सभ्यतागत परंपरा को प्रदर्शित करता है तथा विविधता में एकता के मूल सिद्धांत को और अधिक सुदृढ़ करता है।
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निष्कर्ष:
काशी तमिल संगमम 4.0 शिक्षा, कला और साझा सभ्यतागत स्मृतियों के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ते हुए भारत की समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को सशक्त रूप में प्रस्तुत करता है। काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और तमिलनाडु की समृद्ध साहित्यिक व सांस्कृतिक विरासत के समन्वय से यह संगम राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक संवाद और भाषाई विविधता को बढ़ावा देता है। साथ ही, यह पहल आने वाली पीढ़ियों में भारत की बहुलतावादी और समावेशी सभ्यतागत चेतना के प्रति गहरी समझ और सम्मान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

