संदर्भ:
28 जनवरी 2026 को कर्नाटक के मंत्री शिवराज तंगड़ागी ने राज्य विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य सरकार तुलु भाषा को कर्नाटक की दूसरी अतिरिक्त राजभाषा घोषित करने के प्रस्ताव के पक्ष में है। यह वक्तव्य प्रश्नकाल के दौरान पुत्तूर से कांग्रेस विधायक अशोक कुमार राय द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में दिया गया।
पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय मांग:
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- तुलु भाषा मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय जिलों “उडुपी और दक्षिण कन्नड़” में बोली जाती है। विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के अनेक विधायक लंबे समय से तुलु को आधिकारिक मान्यता दिए जाने की मांग करते रहे हैं।
- तुलु भाषा का लगभग 3,000 वर्ष पुराना समृद्ध इतिहास है। इसकी अपनी लिपि है, यह गूगल ट्रांसलेट में शामिल है और जर्मनी व फ्रांस जैसे देशों में भी इसका अकादमिक अध्ययन किया जाता है। तुलु-भाषी क्षेत्रों से आने वाले 13 विधायकों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और उनका मत है कि इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
- तुलु भाषा मुख्य रूप से कर्नाटक के तटीय जिलों “उडुपी और दक्षिण कन्नड़” में बोली जाती है। विधानसभा अध्यक्ष यू. टी. खादर सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के अनेक विधायक लंबे समय से तुलु को आधिकारिक मान्यता दिए जाने की मांग करते रहे हैं।
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किसी राज्य में अतिरिक्त राजभाषा घोषित करने की प्रक्रिया:
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- भारत में किसी राज्य द्वारा अतिरिक्त राजभाषा घोषित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 345 के अंतर्गत राज्य विधानमंडल द्वारा एक स्पष्ट कानून पारित किया जाता है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- विधायी अधिकार: राज्य विधानमंडल को सरकारी कार्यों के लिए एक या अधिक भाषाओं को अपनाने का अधिकार प्राप्त है।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 345 राज्य को अपनी मुख्य राजभाषा के साथ किसी अन्य भाषा को जोड़ने की अनुमति देता है; वहीं अनुच्छेद 347 के अंतर्गत, यदि राज्य की पर्याप्त जनसंख्या किसी भाषा की मान्यता की मांग करती है, तो राष्ट्रपति इस संबंध में निर्देश दे सकते हैं।
- उच्च न्यायालय में उपयोग: राष्ट्रपति की स्वीकृति से राज्यपाल उस भाषा को उच्च न्यायालय के निर्णयों, आदेशों अथवा डिक्री में प्रयोग की अनुमति दे सकते हैं।
- दायरा: किसी भाषा का संविधान की आठवीं अनुसूची में होना अनिवार्य नहीं है, परंतु उसका राज्य में प्रचलन होना आवश्यक है। उदाहरण: इसी संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश में उर्दू को दूसरी राजभाषा घोषित किया गया था।
- विधायी अधिकार: राज्य विधानमंडल को सरकारी कार्यों के लिए एक या अधिक भाषाओं को अपनाने का अधिकार प्राप्त है।
- भारत में किसी राज्य द्वारा अतिरिक्त राजभाषा घोषित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 345 के अंतर्गत राज्य विधानमंडल द्वारा एक स्पष्ट कानून पारित किया जाता है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
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भारत में राजभाषा की व्यवस्था:
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- संवैधानिक आधार: संविधान के भाग 17 (अनुच्छेद 343 से 351) में राजभाषा से संबंधित प्रावधान निहित हैं। अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा है, जबकि अनुच्छेद 351 हिंदी के प्रसार और विकास को प्रोत्साहित करता है।
- कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं: भारत की कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है; यहाँ केवल संघ और राज्यों के लिए राजभाषाओं का प्रावधान किया गया है।
- आठवीं अनुसूची: इसमें 22 क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिनमें कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम प्रमुख हैं।
- राजभाषा अधिनियम, 1963: यह अधिनियम संघ के सरकारी कार्यों में हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी के निरंतर उपयोग की अनुमति प्रदान करता है।
- संवैधानिक आधार: संविधान के भाग 17 (अनुच्छेद 343 से 351) में राजभाषा से संबंधित प्रावधान निहित हैं। अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा है, जबकि अनुच्छेद 351 हिंदी के प्रसार और विकास को प्रोत्साहित करता है।
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तुलु को मान्यता देने का महत्व:
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- तुलु को अतिरिक्त राजभाषा घोषित किए जाने से:
- 3,000 वर्ष पुरानी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन होगा।
- तुलु-भाषी क्षेत्रों के नागरिकों को प्रशासनिक कार्यों में अधिक सुविधा और बेहतर सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।
- कर्नाटक आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जो राज्य के प्रमुख भाषा के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को भी आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।
- 3,000 वर्ष पुरानी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन होगा।
- तुलु को अतिरिक्त राजभाषा घोषित किए जाने से:
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निष्कर्ष:
कर्नाटक की यह पहल संविधान के प्रावधानों के अनुरूप भारत की भाषाई विविधता को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तुलु भाषा को मान्यता देने की प्रक्रिया सांस्कृतिक संरक्षण, प्रशासनिक व्यवहार्यता और विधायी संतुलन को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है।
