संदर्भ:
हाल ही में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा 55 जिलों में जोश (JOSH- Joint Squad for Health) अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य युवाओं के नेटवर्क, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेटों और जमीनी स्तर के समुदायों को तपेदिक (TB) उन्मूलन की दिशा में संगठित करना है।
JOSH पहल के बारे में:
-
-
- उद्देश्य: टीबी की रोकथाम, पहचान और उपचार में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना।
- संरचना: प्रत्येक JOSH टीम में MY भारत के पाँच स्वयंसेवक और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के पाँच कैडेट शामिल होते हैं। इनका नेतृत्व ब्लॉक या वार्ड स्तर पर एक नामित प्रथम श्रेणी का अधिकारी करता है।
- कार्यान्वयन: यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल है।
- दृष्टिकोण: घर-घर पहुँच, जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जन भागीदारी को बढ़ावा देना।
- डिजिटल सहायता: यह पहल जनसंपर्क और रिपोर्टिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए समर्पित डिजिटल सुविधाओं तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री का उपयोग करती है।
- उद्देश्य: टीबी की रोकथाम, पहचान और उपचार में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना।
-
पहल का महत्त्व:
-
-
- युवा सशक्तीकरण: युवाओं की ऊर्जा को सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगाना।
- अंतिम छोर तक पहुँच: दूरदराज और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित समुदायों तक टीबी संबंधी जागरूकता पहुँचाना।
- व्यवहार में बदलाव: लक्षणों की पहचान, शीघ्र जाँच और निर्धारित उपचार पूरा करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना।
- सामाजिक कलंक में कमी: टीबी रोगियों के प्रति गलत धारणाओं और भेदभाव को दूर करना।
- अंतर-क्षेत्रीय समन्वय: सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करना।
- युवा सशक्तीकरण: युवाओं की ऊर्जा को सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगाना।
-
तपेदिक (TB) क्या है?
टीबी एक वायुजनित संक्रामक रोग है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक जीवाणु के कारण होता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन अन्य अंगों को भी नुकसान पहुँचा सकता है। यह गुप्त या सक्रिय, फुफ्फुसीय या फुफ्फुसीयेतर तथा दवा-संवेदनशील या दवा-प्रतिरोधी हो सकता है। इसमें बहुऔषधि प्रतिरोधी टीबी (MDR-TB) भी शामिल है।
टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत की प्रगति:
प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, भारत में वर्ष 2015 से 2024 के बीच टीबी की घटनाओं में 21% की कमी और टीबी से संबंधित मौतों में 28% की गिरावट दर्ज की गई। उपचार कवरेज बढ़कर 92% हो गया, जबकि वैश्विक औसत 78% है। ये सुधार विस्तारित स्क्रीनिंग, बेहतर निदान, उपचार तक पहुँच और सामुदायिक भागीदारी को दर्शाते हैं।
चुनौतियाँ:
-
-
- लगातार कुपोषण और गरीबी टीबी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाते हैं।
- सामाजिक कलंक के कारण निदान और उपचार प्राप्त करने में देरी होती है।
- निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा अपर्याप्त अधिसूचना से रोग निगरानी में कमियाँ उत्पन्न होती हैं।
- दवा-प्रतिरोधी टीबी के लिए विशेष उपचार और उपचार का लगातार पालन आवश्यक है।
- भौगोलिक बाधाएँ दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को सीमित करती हैं।
- लगातार कुपोषण और गरीबी टीबी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाते हैं।
-
आगे की राह:
-
-
- JOSH टीमों, आशा कार्यकर्ताओं, स्थानीय सरकारों और स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- पात्र व्यक्तियों के लिए समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग और निवारक उपचार का विस्तार करना।
- प्रभावित परिवारों के लिए पोषण सहायता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- निजी क्षेत्र द्वारा रोग अधिसूचना और डिजिटल रोगी निगरानी में सुधार करना।
- जिला स्तर पर मापनीय लक्ष्य निर्धारित करना और परिणामों की निगरानी करना।
- सम्मानजनक, भेदभाव-मुक्त संवाद और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना।
- JOSH टीमों, आशा कार्यकर्ताओं, स्थानीय सरकारों और स्वास्थ्य केंद्रों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
-
निष्कर्ष:
JOSH पहल मुख्य रूप से स्वास्थ्य प्रणाली पर आधारित प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर युवा-नेतृत्व वाले और समुदाय-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों की दिशा में बदलाव को दर्शाती है। जागरूकता, शीघ्र निदान, उपचार का पालन और सामाजिक सहायता को एक साथ जोड़कर यह भारत के टीबी उन्मूलन प्रयासों को मजबूत कर सकती है। इसकी सफलता निरंतर सामुदायिक भागीदारी, प्रभावी अंतर-मंत्रालयी समन्वय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच पर निर्भर करेगी।

