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Blog / 05 Sep 2026

इसरो ने EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 प्रक्षेपण यान द्वारा उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।

मिशन के बारे में:

      • EOS-05 (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-05) इसरो द्वारा विकसित एक उन्नत चित्रांकन उपग्रह है। इसे पृथ्वी के बड़े क्षेत्रों का बार-बार और व्यापक अवलोकन करने के लिए विकसित किया गया है। EOS-05 भारत का पहला चित्रांकन उपग्रह है, जिसे भू-समकालिक कक्षा से संचालित करने के लिए बनाया गया है।
      • भू-समकालिक क्षेत्र से इसका संचालन किसी बड़े भौगोलिक क्षेत्र का बार-बार अवलोकन करने में सहायता करेगा।
      • यह मिशन भारत की दूरसंवेदी, उपग्रह चित्रांकन तथा अंतरिक्ष-आधारित पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को मजबूत करता है। साथ ही, यह विकास, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

ISRO successfully launches Earth observation satellite EOS-05 - The Hindu

मिशन के उपयोग:

EOS-05 के अनेक महत्वपूर्ण उपयोग हैं:

      • आपदा प्रबंधन: बाढ़, चक्रवात, वनाग्नि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी करना।
      • कृषि: फसलों, वनस्पतियों तथा कृषि संबंधी परिस्थितियों की निगरानी करना।
      • पर्यावरण निगरानी: वनों, भूमि तथा प्राकृतिक संसाधनों में होने वाले परिवर्तनों पर नज़र रखना।
      • बुनियादी ढाँचा: नगर नियोजन तथा बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की निगरानी में सहायता करना।
      • रणनीतिक उपयोग: निगरानी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के लिए बार-बार पृथ्वी के चित्र उपलब्ध कराना।

इस प्रकार, EOS-05 बड़े क्षेत्रों की पृथ्वी की बार-बार तस्वीरें उपलब्ध करा सकता है और भारत के वर्तमान पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह तंत्र की क्षमताओं को और बढ़ा सकता है।

GSLV के बारे में:

      • GSLV (भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान) इसरो द्वारा विकसित तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है। इसका उपयोग भारी उपग्रहों को भू-स्थिर अंतरण कक्षा (GTO) में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
      • इसकी प्रमुख विशेषता क्रायोजेनिक प्रणोदन का उपयोग है। यह अधिक दक्षता प्रदान करता है और भारी संचार, मौसम विज्ञान तथा नौवहन उपग्रहों के प्रक्षेपण को संभव बनाता है।
      • GSLV का विकास एमके-I और एमके-II संस्करणों में हुआ है। इनमें एमके-II इसका वर्तमान परिचालन संस्करण है, जिसमें भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजेनिक चरण का उपयोग किया जाता है।

GSLV की प्रक्षेपण क्षमता लगभग:

      • भू-स्थिर अंतरण कक्षा में 2,250 किलोग्राम
      • निम्न पृथ्वी कक्षा में 6,000 किलोग्राम

है।

इससे अधिक शक्तिशाली LVM3 (जिसे पहले GSLV एमके-III कहा जाता था) लगभग:

      • भू-स्थिर अंतरण कक्षा में 4,000 किलोग्राम
      • निम्न पृथ्वी कक्षा में 8,000 किलोग्राम

तक का भार ले जा सकता है।

LVM3 का उपयोग चंद्रयान-3 जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में किया गया है और इसे गगनयान अभियान के लिए भी निर्धारित प्रक्षेपण यान बनाया गया है।

GSLV और LVM3 में अंतर:

विशेषता

GSLV एमके-II

LVM3

भूमिका

मध्यम-भारी भार वहन करने वाला प्रक्षेपण यान

भारी भार वहन करने वाला प्रक्षेपण यान

ऊपरी चरण

CE-7.5 क्रायोजेनिक चरण

C25 क्रायोजेनिक चरण

मुख्य चरण

द्रव विकस-आधारित चरण

L110 द्रव मुख्य चरण

भू-स्थिर अंतरण कक्षा में क्षमता

लगभग 2.25 टन

लगभग 4 टन

प्रमुख उपयोग

संचार, मौसम विज्ञान एवं नौवहन उपग्रह

भारी उपग्रह एवं मानव अंतरिक्ष उड़ान अभियान

गगनयान

प्राथमिक प्रक्षेपण यान नहीं

प्राथमिक प्रक्षेपण यान

GSLV और PSLV में अंतर:

विशेषता

PSLV

GSLV

चरणों की संख्या

4

3

प्रणोदन

बारी-बारी से ठोस एवं द्रव चरण

ठोस + द्रव + क्रायोजेनिक

मुख्य भूमिका

ध्रुवीय तथा सूर्य-समकालिक कक्षाओं एवं पृथ्वी-अवलोकन अभियानों के लिए

भू-समकालिक अभियानों के लिए

प्रमुख विशेषता

बहुमुखी क्षमता एवं विश्वसनीयता

उच्च कक्षाओं में अधिक भार पहुँचाने की क्षमता

सामान्य उपयोग

दूरसंवेदी उपग्रह

संचार एवं मौसम विज्ञान उपग्रह

निष्कर्ष:

EOS-05 का सफल प्रक्षेपण कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत की क्षमताओं को मजबूत करता है। वहीं, GSLV-F17 स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी और उन्नत प्रक्षेपण प्रणालियों में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।

 

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