संदर्भ:
28 दिसंबर 2025 से ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। ये प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों में फैले हुए हैं और लगभग 180 शहरों के 512 से अधिक स्थानों पर हुए हैं, जिनमें तेहरान, मशहद, इस्फ़हान, शीराज़ और क़ुम जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। जनवरी 2026 तक जारी ये आंदोलन हाल के वर्षों में ईरान के सबसे बड़े जन-विद्रोह में से एक माने जा रहे हैं, जिनमें आर्थिक असंतोष, राजनीतिक विरोध और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का सम्मिलित रूप दिखाई देता है।
विरोध प्रदर्शनों के कारण:
इन प्रदर्शनों की जड़ें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और वैचारिक कारकों के जटिल अंतर्संबंध में निहित हैं:
-
-
- राजनीतिक और शासन से जुड़े मुद्दे:
- सत्तावाद और मानवाधिकार उल्लंघन: नागरिक राजनीतिक दमन और संस्थागत भ्रष्टाचार के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
- अनिवार्य हिजाब और धार्मिक प्रतिबंध: विशेषकर युवा वर्ग ने कठोर धार्मिक नियमों और लैंगिक प्रतिबंधों के विरुद्ध असहमति व्यक्त की है।
- इंटरनेट सेंसरशिप और ब्लैकआउट: सूचना के प्रवाह को नियंत्रित करने के सरकारी प्रयासों ने जनता के अविश्वास को बढ़ाया और ऑनलाइन सक्रियता को प्रोत्साहित किया।
- जातीय और वैचारिक तनाव: हाशिये पर मौजूद जातीय और धार्मिक समूहों ने व्यापक सुधार की मांगों के साथ अपने मुद्दों को और मुखर किया है।
- सत्तावाद और मानवाधिकार उल्लंघन: नागरिक राजनीतिक दमन और संस्थागत भ्रष्टाचार के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
- आर्थिक शिकायतें:
- मुद्रा संकट: ईरानी रियाल के तीव्र अवमूल्यन से महंगाई बढ़ी है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
- आर्थिक कुप्रबंधन: दशकों से चले आ रहे वित्तीय कुप्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने खाद्य, ऊर्जा और जल की कमी को और गंभीर बना दिया है।
- आम नागरिकों और व्यापारियों पर प्रभाव: बाज़ार के व्यापारियों ने हड़तालें और दुकानों को बंद कर विरोध जताया है, जो मौजूदा आर्थिक नीतियों के प्रति व्यापक असंतोष को दर्शाता है।
- मुद्रा संकट: ईरानी रियाल के तीव्र अवमूल्यन से महंगाई बढ़ी है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
- पीढ़ीगत और सामाजिक कारक:
- जेन-ज़ी (Gen Z) की सक्रियता: वैश्विक सामाजिक आंदोलनों से प्रेरित युवा ईरानी सांस्कृतिक मानदंडों और राजनीतिक सत्ता, दोनों को चुनौती दे रहे हैं।
- शहरी और छात्र आंदोलन: तेहरान जैसे शहरों में छात्रों और शहरी युवाओं के नेतृत्व में छतों से नारे, मार्च और डिजिटल अभियानों का आयोजन हुआ है।
- जेन-ज़ी (Gen Z) की सक्रियता: वैश्विक सामाजिक आंदोलनों से प्रेरित युवा ईरानी सांस्कृतिक मानदंडों और राजनीतिक सत्ता, दोनों को चुनौती दे रहे हैं।
- राजनीतिक और शासन से जुड़े मुद्दे:
-
प्रभाव:
-
-
-
घरेलू प्रभाव:
- निरंतर अशांति राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है और धार्मिक-शासन व्यवस्था की टिकाऊपन को चुनौती दे सकती है।
- हड़तालों, व्यापार बाधाओं और आर्थिक अवरोधों से घरेलू कठिनाइयाँ और बढ़ी हैं।
- पीढ़ी-प्रेरित विरोध सामाजिक उदारीकरण और राजनीतिक सुधार की बढ़ती मांगों को रेखांकित करते हैं।
- निरंतर अशांति राजनीतिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है और धार्मिक-शासन व्यवस्था की टिकाऊपन को चुनौती दे सकती है।
-
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव:
- ये विरोध पश्चिम एशिया में ईरान की विदेश नीति, विशेषकर सीरिया, इराक और यमन में उसके प्रॉक्सी जुड़ाव, को प्रभावित कर सकते हैं।
- आंतरिक अस्थिरता वैश्विक तेल बाज़ारों पर असर डाल सकती है, क्योंकि ऊर्जा निर्यात में ईरान की रणनीतिक भूमिका है।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानवाधिकार चिंताओं और भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी सहभागिता रणनीतियों की पुनर्समीक्षा कर सकता है।
- ये विरोध पश्चिम एशिया में ईरान की विदेश नीति, विशेषकर सीरिया, इराक और यमन में उसके प्रॉक्सी जुड़ाव, को प्रभावित कर सकते हैं।
-
-
भारत के लिए निहितार्थ:
-
-
- भारत के ईरान के साथ रणनीतिक हित जुड़े हैं, विशेषकर चाबहार बंदरगाह, जो अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक जारी अशांति से बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ और व्यापारिक लॉजिस्टिक्स प्रभावित हो सकते हैं।
- कूटनीतिक स्तर पर भारत को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। ईरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी साधे रखना होगा।
-
वैश्विक प्रभाव:
-
-
- क्षेत्रीय सुरक्षा: बढ़ते तनाव से मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलने का डर है, विशेषकर अमेरिकी और इज़राइली संलिप्तता की पृष्ठभूमि में।
- ऊर्जा बाज़ार: तेल निर्यात में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका अस्थिरता के दौर में वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
- मानवाधिकार: राज्य की कठोर कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को जन्म दिया है, जिससे जनआंदोलनों पर सत्तावादी प्रतिक्रियाओं को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: बढ़ते तनाव से मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलने का डर है, विशेषकर अमेरिकी और इज़राइली संलिप्तता की पृष्ठभूमि में।
-
निष्कर्ष:
2025–26 के ईरानी विरोध प्रदर्शन, 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़े आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और पीढ़ीगत असंतुलन के संगम का प्रतीक हैं। यद्यपि इनकी उत्पत्ति आतंरिक है, लेकिन इनके क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव व्यापक हैं, जो राज्य संप्रभुता, मानवाधिकार और भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन को चुनौती देते हैं। भारत के लिए, विवेकपूर्ण कूटनीति तथा ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सतत निगरानी अत्यंत आवश्यक बनी रहेगी।
