संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग ने पहली बार निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index - IFI) 2026 जारी किया है। यह सूचकांक भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की निवेश आकर्षित करने और उसे बनाए रखने की क्षमता का मूल्यांकन करता है। बड़े राज्यों में गुजरात सबसे अधिक निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में उभरा है, जिसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान है।
सूचकांक के प्रमुख निष्कर्ष:
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- निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात ने 100 में से 56.6 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र 53.7 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि तमिलनाडु 53.3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
- पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसके बाद असम और हिमाचल प्रदेश रहे। केंद्र शासित प्रदेशों और शहर राज्यों की श्रेणी में गोवा पहले स्थान पर रहा, जबकि दिल्ली और चंडीगढ़ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
- इस सूचकांक में सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की उनकी क्षमता को मापा गया है।
- निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात ने 100 में से 56.6 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र 53.7 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि तमिलनाडु 53.3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
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निवेश अनुकूलता सूचकांक के बारे में:
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- निवेश अनुकूलता सूचकांक केवल एक रैंकिंग प्रणाली नहीं है। नीति आयोग ने इसे एक रणनीतिक सुधार उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया है, जो राज्यों को नीतिगत कमियों की पहचान करने, शासन व्यवस्था में सुधार करने और अपने निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायता करता है।
- इस सूचकांक के उद्देश्य हैं:
- राज्यों को निजी निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा हेतु प्रोत्साहित करना।
- राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार करना।
- साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णय लेने में सहायता करना।
- राज्यों को निजी निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा हेतु प्रोत्साहित करना।
- इस सूचकांक को तैयार करने के लिए 1,850 से अधिक निवेशकों का सर्वेक्षण किया गया और 165 हितधारकों से प्राप्त सुझावों को शामिल किया गया।
- निवेश अनुकूलता सूचकांक केवल एक रैंकिंग प्रणाली नहीं है। नीति आयोग ने इसे एक रणनीतिक सुधार उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया है, जो राज्यों को नीतिगत कमियों की पहचान करने, शासन व्यवस्था में सुधार करने और अपने निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायता करता है।
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मूल्यांकन के प्रमुख मानदंड:
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- निवेश की तैयारी को निर्धारित करने वाले आठ प्रमुख स्तंभों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया गया:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – 25%
- व्यापारिक वातावरण (Business Climate) – 20%
- संसाधन (Resources) – 15%
- नियामकीय सुगमता (Regulatory Ease) – 12%
- सरकारी नीतियां (Government Policy) – 10%
- वित्तीय स्थिति (Financial Health) – 7%
- संस्थागत वातावरण (Institutional Environment) – 6%
- पर्यावरणीय लचीलापन (Environmental Resilience) – 5%
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – 25%
- मूल्यांकन में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ निवेशकों की धारणा से संबंधित सर्वेक्षणों को भी शामिल किया गया, जिससे प्रत्येक राज्य के निवेश वातावरण की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की जा सके।
- निवेश की तैयारी को निर्धारित करने वाले आठ प्रमुख स्तंभों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया गया:
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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सूचकांक का महत्व:
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- यह सूचकांक प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) की अवधारणा को मजबूत करता है, जिसमें राज्य बेहतर शासन और नीतियों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने का प्रयास करते हैं।
- अधिक निवेश आने से:
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है।
- विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है।
- नवाचार को प्रोत्साहन मिल सकता है।
- आर्थिक विकास की गति तेज हो सकती है।
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सकती है।
- इसके अलावा, यह सूचकांक राज्यों को अपनी कमजोरियों की पहचान करने और सुधार लागू करने में सहायता करके क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी योगदान दे सकता है।
- यह सूचकांक प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) की अवधारणा को मजबूत करता है, जिसमें राज्य बेहतर शासन और नीतियों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने का प्रयास करते हैं।
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निष्कर्ष:
निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 राज्यों को अपनी निवेश क्षमता बढ़ाने के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। गुजरात की उपलब्धि यह दर्शाती है कि मजबूत बुनियादी ढांचा, स्थिर नीतियां और निवेशकों का विश्वास निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इस सूचकांक का व्यापक उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ाना नहीं, बल्कि राज्यों के बीच सहयोग को भी प्रोत्साहित करना है, ताकि वे एक-दूसरे से सीख सकें और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान दे सकें।

