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Blog / 07 Oct 2026

सरकार ने एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण की स्थापना को मंजूरी दी

संदर्भ:

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अक्टूबर 2026 को परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में अनुसंधान, योजना, परियोजना मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मजबूत करने के लिए एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (Integrated Transport & Logistics Authority-ITLA) की स्थापना को मंजूरी दी है। इसे एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle-SPV) के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न परिवहन मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच मौजूद खंडित योजना व्यवस्था को दूर करना तथा बहु-माध्यमीय परिवहन एकीकरण (Multimodal Integration) को बढ़ावा देना है।

एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण क्या है?

      • एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण-ITLA एक राष्ट्रीय शीर्ष संस्था के रूप में कार्य करेगा, जो एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स योजना, अनुसंधान, परियोजना मूल्यांकन, निगरानी, नीतिगत सहयोग और डेटा विश्लेषण का कार्य करेगी।
      • इसके दायरे में सड़क, रेलवे, बंदरगाह एवं नौवहन, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय नौवहन, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स शामिल होंगे।

प्रमुख कार्य:

      • राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान: ITLA कम से कम 10 वर्ष या उससे अधिक की योजना अवधि को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा। इसके साथ ही, यह परिवहन मंत्रालयों की पाँच वर्षीय क्षेत्रीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं का मूल्यांकन करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिवहन योजना के अनुरूप हैं।
      • परियोजना मूल्यांकन और निगरानी: ITLA ₹500 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली केंद्र सरकार की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से ही जारी रहेगा। ITLA ₹500 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निगरानी भी करेगा और परियोजना पूरी होने के बाद उनके प्रभाव का आकलन करेगा।
      • राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार: ITLA एक राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार (National Transport Data Repository-NTDR) विकसित करेगा। इसके लिए GSTN ई-वे बिल, FASTag, VAHAN, GPS आधारित प्रणालियों और शहरी यातायात प्रबंधन प्रणालियों जैसे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा को एकीकृत किया जाएगा। यह व्यवस्था माल ढुलाई के प्रवाह (Freight Flow) तथा मूल-गंतव्य विश्लेषण (Origin-Destination Analysis) में सहायता करेगी और साक्ष्य-आधारित परिवहन योजना को बढ़ावा देगी।
      • लॉजिस्टिक्स नीति और क्षमता निर्माण: ITLA राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 की समीक्षा और समय-समय पर उसके अद्यतन में सहायता करेगा। इसके साथ ही, यह लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास को बढ़ावा देगा।

ITLA और PM गति शक्ति:

      • ITLA, PM गति शक्ति का पूरक होगा। जहाँ PM गति शक्ति बुनियादी ढाँचे की योजना और बहु-माध्यमीय संपर्क के लिए एक एकीकृत, GIS-आधारित ढाँचा उपलब्ध कराता है, वहीं ITLA दीर्घकालिक परिवहन योजना, तकनीकी परियोजना मूल्यांकन, निगरानी, डेटा विश्लेषण और प्रभाव आकलन के लिए संस्थागत सहयोग प्रदान करेगा।
      • इस प्रकार, PM गति शक्ति मुख्य रूप से बुनियादी ढाँचे की योजना में समन्वय पर केंद्रित है, जबकि ITLA परिवहन क्षेत्र की योजना और मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत करेगा।

महत्त्व:

ITLA अलग-अलग क्षेत्रों और संस्थाओं में बँटी हुई योजना व्यवस्था (Silo-based Planning) की समस्या को दूर करने, विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और बहु-माध्यमीय परिवहन संपर्क को मजबूत करने में सहायता कर सकता है।

      • सड़क, रेलवे, जलमार्ग, बंदरगाह और विमानन के बीच बेहतर एकीकरण से:
      • बुनियादी ढाँचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
      • लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में सहायता मिलेगी।
      • भारत की विनिर्माण क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया जा सकेगा।
      • परिवहन क्षेत्र में संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
      • विकसित भारत @2047 के व्यापक लक्ष्य को समर्थन मिलेगा।

चुनौतियाँ:

      • ITLA के सामने कई चुनौतियाँ भी हो सकती हैं, जिनमें मौजूदा संस्थानों के साथ कार्यक्षेत्र का संभावित दोहराव, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय, डेटा की परस्पर उपयोगिता (Data Interoperability), डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ तथा एकीकृत योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना प्रमुख हैं।
      • इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन और परिणाम-आधारित निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से स्थापित की जाती है।

निष्कर्ष:

ITLA की स्थापना खंडित और परिवहन के अलग-अलग माध्यमों पर आधारित योजना व्यवस्था से एकीकृत, बहु-माध्यमीय और डेटा-आधारित शासन व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। दीर्घकालिक परिवहन योजना को परियोजना मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन के साथ जोड़कर ITLA भारत के लॉजिस्टिक्स तंत्र को मजबूत, बुनियादी ढाँचे की दक्षता में सुधार और परिवहन लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस प्रकार, ITLA भारत की लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम साबित हो सकता है।

 

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