सन्दर्भ:
29 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना ने आईएनएस मछलीपट्टनम (बीवाई-529) का जलावतरण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि में किया। यह माहे श्रेणी के पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोतों (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) की आठ प्रस्तावित नौकाओं में से सातवीं है।
पृष्ठभूमि:
रक्षा मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2019 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के साथ माहे श्रेणी के आठ पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोतों के निर्माण हेतु अनुबंध किया था। इनका वितरण अगस्त 2025 से जून 2028 के मध्य निर्धारित है। इन युद्धपोतों का निर्माण पुरानी अभय श्रेणी की पनडुब्बी-रोधी कार्वेट नौकाओं के स्थान पर किया जा रहा है, जिससे उथले एवं तटीय जल क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी।
आईएनएस मछलीपट्टनम की प्रमुख विशेषताएँ:
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- भूमिका: पनडुब्बी-रोधी युद्ध, जलमग्न निगरानी, सुरंग (माइन) युद्ध, निम्न तीव्रता समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव अभियानों के लिए विशेष रूप से निर्मित।
- आकार: लगभग 78 मीटर लंबाई तथा 900–1100 टन विस्थापन क्षमता।
- गति एवं प्रणोदन: डीज़ल इंजनों तथा जल-प्रवाह प्रणोदन (वाटर-जेट) प्रणाली से संचालित, जो लगभग 25 नॉट की गति तथा उथले तटीय जल में उत्कृष्ट संचालन क्षमता प्रदान करती है।
- उन्नत संवेदक: पोत-स्थापित सोनार तथा निम्न-आवृत्ति परिवर्ती-गहराई सोनार से सुसज्जित, जो जलमग्न खोज एवं निगरानी में सक्षम हैं।
- शस्त्रास्त्र: हल्के टॉरपीडो, पनडुब्बी-रोधी रॉकेट, 30 मि.मी. नौसैनिक तोप तथा समुद्री सुरंग बिछाने की क्षमता।
- स्वदेशी भागीदारी: 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग, जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) तथा भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का प्रमुख योगदान है।
- भूमिका: पनडुब्बी-रोधी युद्ध, जलमग्न निगरानी, सुरंग (माइन) युद्ध, निम्न तीव्रता समुद्री अभियान तथा खोज एवं बचाव अभियानों के लिए विशेष रूप से निर्मित।
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पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कार्यक्रम के बारे में:
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- यह भारतीय नौसेना के लिए विकसित स्वदेशी उथले जल युद्धपोतों की नई श्रेणी है, जिसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) तथा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा किया जा रहा है।
- कुल 16 युद्धपोतों के निर्माण की योजना है।
- इनमें 8 माहे श्रेणी के युद्धपोत सीएसएल तथा 8 अर्नाला श्रेणी के युद्धपोत जीआरएसई द्वारा निर्मित किए जाएंगे।
- इनका निर्माण विशेष रूप से तटीय (निकटवर्ती समुद्री) क्षेत्रों में संचालन के लिए किया गया है, जहाँ बड़े युद्धपोतों की गतिशीलता सीमित रहती है।
- यह भारतीय नौसेना के लिए विकसित स्वदेशी उथले जल युद्धपोतों की नई श्रेणी है, जिसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) तथा गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा किया जा रहा है।
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सामरिक महत्त्व:
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- यह श्रेणी भारत की तटीय सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगी।
- हिन्द महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी एवं उनसे प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता मिलेगी।
- बंदरगाहों, समुद्री व्यापार मार्गों तथा अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।
- पुराने युद्धपोतों के स्थान पर आधुनिक, तीव्रगामी एवं अत्याधुनिक तकनीक से युक्त युद्धपोतों की तैनाती सुनिश्चित होगी।
- यह परियोजना भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया अभियान के उद्देश्यों को भी गति प्रदान करती है।
- यह श्रेणी भारत की तटीय सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगी।
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आगे की राह:
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- सभी 16 पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोतों को निर्धारित समय के भीतर नौसेना में सम्मिलित करना।
- स्वदेशी विकसित उन्नत सोनार, शस्त्र प्रणालियों तथा अन्य आधुनिक उपकरणों का समेकन।
- तटीय निगरानी तंत्र का निरंतर आधुनिकीकरण।
- स्वदेशी नौसैनिक पोत निर्माण क्षमता का विस्तार कर भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना।
- हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अग्रणी समुद्री शक्ति बनने की भारत की दीर्घकालिक परिकल्पना को साकार करना।
- सभी 16 पनडुब्बी-रोधी उथले जल युद्धपोतों को निर्धारित समय के भीतर नौसेना में सम्मिलित करना।
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