होम > Blog

Blog / 02 Mar 2026

आईएनएस अंजदीप

संदर्भ:

आईएनएस अंजदीप, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित एक आधुनिक युद्धपोत है। इसे 27 फरवरी 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया।

आईएनएस अंजदीप और इसकी क्षमताएँ:

      • वर्ग एवं भूमिका: आईएनएस अंजदीप एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी श्रृंखला का चौथा पोत है। इसे विशेष रूप से उथले समुद्री (तटीय) क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वर्तमान समय में तटीय क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
      • डिजाइन और स्वदेशी भागीदारी: इस युद्धपोत का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा लार्सन एंड टुब्रो शिपबिल्डिंग, कट्टुपल्ली का सहयोग रहा। यह परियोजना भारत की रक्षा निर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।
      • तकनीकी विशेषताएँ: लगभग 77 मीटर लंबा और करीब 1,400 टन वज़न वाला यह पोत आधुनिक पनडुब्बी रोधी प्रणाली से सुसज्जित है। इसमें अभयनामक हुल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट तथा उन्नत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। इसकी उच्च गति वाली जल-प्रणोदन (वॉटर-जेट प्रोपल्शन) प्रणाली उथले जल में तेज़ संचालन और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है।
      • संचालनात्मक भूमिकाएँ: पनडुब्बी रोधी अभियानों के अतिरिक्त, आईएनएस अंजदीप तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) कार्यों में भी सक्षम है। इससे भारतीय नौसेना की संचालन क्षमता और रणनीतिक लचीलापन बढ़ता है।

Indian Navy Commissions INS Anjadip in Chennai – Major Boost to Coastal  Defence and UPSC Preparation

रणनीतिक महत्व:

      • समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना: इस पोत के शामिल होने से भारत की पूर्वी तटरेखा पर पनडुब्बी रोधी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उथले तटीय क्षेत्र समुद्र के भीतर से आने वाले संभावित खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
      • तटीय रक्षा को मजबूत बनाना: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पनडुब्बियों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और अधिक जटिल होती जा रही हैं। ऐसे में आईएनएस अंजदीप जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म भारत की बहु-स्तरीय समुद्री रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं तथा प्रभावी निगरानी और प्रतिरोध क्षमता प्रदान करते हैं।
      • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: इस पोत में उच्च स्तर की स्वदेशी भागीदारी आत्मनिर्भर भारतकी नीति के अनुरूप है। यह विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने और देश की स्वदेशी नौसैनिक निर्माण क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
      • नौसैनिक बेड़े का विस्तार: आईएनएस अंजदीप का शामिल होना ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय नौसेना वर्ष 2035 तक 200 से अधिक जहाजों का बेड़ा विकसित करने का लक्ष्य रखती है। वर्ष 2026 में कई अन्य पोतों को शामिल करने की योजना इस दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाती है।

निष्कर्ष:

चेन्नई बंदरगाह पर आईएनएस अंजदीप का नौसेना में शामिल होना भारत की पनडुब्बी रोधी क्षमता, तटीय सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह स्वदेशी डॉल्फिन हंटरभारत की आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण नीति और सुदृढ़ समुद्री सुरक्षा संरचना को और सशक्त करता है तथा भारतीय नौसेना को समुद्र के भीतर और तटीय क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करता है।