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Blog / 23 Feb 2026

स्वदेशी टीडी (टेटनस–डिफ्थीरिया) वैक्सीन का शुभारंभ

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने टेटनस और वयस्क डिफ्थीरिया (Td) के लिए देश में विकसित स्वदेशी वैक्सीन का शुभारंभ किया। यह वैक्सीन केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI) द्वारा निर्मित की गई है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की एक ऐतिहासिक वैक्सीन निर्माण संस्था है। यह पहल टीकाकरण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है तथा यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के अंतर्गत लागत में उल्लेखनीय कमी लाने में सहायक होगी।

टेटनस और डिफ्थीरिया के बारे में:

टेटनस और डिफ्थीरिया दोनों गंभीर एवं संभावित रूप से घातक बैक्टीरिया जनित रोग हैं, जिनसे टीकाकरण (DTaP/Tdap/Td) के माध्यम से रोका जा सकता है। 

India Launches Indigenous Td Vaccine, Hits 99% Immunisation Milestone -  Veloxx media

टेटनस (लॉकजॉ):

      • कारण: क्लोस्ट्रिडियम टेटानी नामक जीवाणु, जो मिट्टी, धूल और पशुओं के मल में पाया जाता है।
      • संक्रमण: यह जीवाणु कटने, जलने या गहरे घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। यह व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता।
      • लक्षण: जबड़े से शुरू होने वाली मांसपेशियों की दर्दनाक जकड़न, जो धीरे-धीरे पेट और हाथ-पैरों तक फैल सकती है।
      • जटिलताएँ: श्वसन में कठिनाई, हड्डियों में फ्रैक्चर तथा लगभग 10% मामलों में मृत्यु।

डिफ्थीरिया:

      • कारण: कोरीनेबैक्टीरियम डिफ्थीरिया जीवाणु।
      • संक्रमण: यह अत्यंत संक्रामक रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से फैलता है।
      • लक्षण: गले में मोटी धूसर परत (छद्म झिल्ली), बुखार तथा गर्दन की सूजी हुई ग्रंथियां।
      • जटिलताएँ: श्वसन अवरोध, हृदय की क्षति, लकवा तथा मृत्यु।
      • टीकाकरण के व्यापक प्रसार के कारण विश्व स्तर पर डिफ्थीरिया के मामलों में लगभग 99% तक कमी दर्ज की गई है।

स्वदेशी वैक्सीन विकास के लाभ:

      • सार्वजनिक क्षेत्र में उत्पादन: पूर्व में टीडी/टीटी वैक्सीन मुख्यतः निजी कंपनियों से खरीदी जाती थीं। सीआरआई में उत्पादन से लागत में कमी आएगी तथा निजी क्षेत्र पर निर्भरता घटेगी।
      • बड़े पैमाने पर निर्माण: सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम हेतु बड़े स्तर पर उत्पादन से प्रति खुराक लागत कम होगी।
      • आयात में कमी: स्वदेशी उत्पादन से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
      • वैक्सीन सुरक्षा में मजबूती: गर्भवती महिलाओं और किशोरों के लिए निरंतर एवं सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

टीडी वैक्सीन ने पुराने टेटनस टॉक्सॉइड (टीटी) टीके का स्थान ले लिया है। यह टेटनस (क्लोस्ट्रिडियम टेटानी) और डिफ्थीरिया (कोरीनेबैक्टीरियम डिफ्थीरिया) दोनों के विरुद्ध दोहरी सुरक्षा प्रदान करती है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुरूप है।

वैक्सीन की कार्यप्रणाली:

      • वैक्सीन बिना रोग उत्पन्न किए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है।
        • एंटीजन का प्रवेश: रोगाणु का एक सुरक्षित एवं निष्क्रिय भाग (एंटीजन) शरीर में डाला जाता है।
        • प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया: शरीर उस एंटीजन के विरुद्ध एंटीबॉडी का निर्माण करता है।
        • स्मृति निर्माण: बी एवं टी लसीका कोशिकाएं स्मृति कोशिकाओं के रूप में विकसित हो जाती हैं।
        • भविष्य में सुरक्षा: वास्तविक संक्रमण होने पर शरीर तीव्र प्रतिक्रिया देकर गंभीर रोग से रक्षा करता है।

टीकों का वर्गीकरण:

प्रकार

तंत्र

उदाहरण

लाइव एटेन्यूएटेड

कमजोर रोगाणु

बीसीजी, ओपीवी, एमएमआर

निष्क्रिय

मारे गए रोगज़नक़

कोवैक्सिन , आईपीवी, रेबीज

एमआरएनए

प्रोटीन के लिए आनुवंशिक निर्देश

फाइजर- बायोएनटेक , मॉडर्ना

वायरल वेक्टर

हानिरहित वायरस जेनेटिक कोड पहुंचाता है

कोविशील्ड , स्पुतनिक वी

सबयूनिट/संयुग्म

विशिष्ट रोगज़नक़ भागों

हेपेटाइटिस बी, एचपीवी, पीसीवी

टॉक्सॉइड

निष्क्रिय जीवाणु विष

टेटनस, डिप्थीरिया

भारत की प्रमुख टीकाकरण पहलें:

      • यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (1985): यह पहल विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है , जो 12 बीमारियों “डिफ्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, पोलियो, खसरा, रूबेला, क्षय रोग, हेपेटाइटिस बी और हिब आदि” के विरुद्ध निःशुल्क टीके उपलब्ध कराता है।
      • मिशन इंद्रधनुष: यह 90% पूर्ण टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आरंभ किया गया अभियान है, जो बिना टीकाकरण वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देता है।
      • यू-विन पोर्टल: यह गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण की संपूर्ण डिजिटल निगरानी हेतु विकसित मंच है।

प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य:

      • सामूहिक प्रतिरक्षा: जब जनसंख्या का बड़ा भाग प्रतिरक्षित हो जाता है, जिससे रोग का प्रसार स्वतः कम हो जाता है।
      • कोविशील्ड एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, जबकि कोवैक्सिन एक निष्क्रिय वैक्सीन है।

निष्कर्ष:

स्वदेशी टीडी वैक्सीन का शुभारंभ भारत की टीकाकरण प्रणाली को अधिक सुदृढ़, किफायती और आत्मनिर्भर बनाता है। यह पहल न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।