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Blog / 08 Jan 2026

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़ा

संदर्भ:

हाल ही में  नीति आयोग द्वारा जारी की 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' (Q1 FY26) रिपोर्ट ने मुक्त व्यापार समझौता भागीदारों के साथ भारत के व्यापार संतुलन में चिंताजनक रुझान दिखाए हैं। मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) के माध्यम से भारत का आर्थिक जुड़ाव निर्यात बढ़ाने, बाजारों में विविधता लाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है।

मुख्य निष्कर्ष:

      • FTA भागीदारों के साथ बढ़ता व्यापार घाटा
        • अप्रैल से जून 2025 के बीच, FTA देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 59.2% बढ़ गया है।इस दौरान आयात 10% बढ़कर 65.3 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 9% गिरकर 38.7 बिलियन डॉलर रह गया।
        • घाटे में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण आसियान (ASEAN) क्षेत्र को होने वाले निर्यात में कमी है, जो भारत का सबसे बड़ा FTA निर्यात गंतव्य है।
      • प्रमुख FTA देशों को निर्यात में गिरावट
        • आसियान (ASEAN): निर्यात में 16.9% की कमी आई। विशेष रूप से मलेशिया (-39.7%), सिंगापुर (-13.2%) और ऑस्ट्रेलिया (-10.9%) में भारी गिरावट दर्ज की गई।
        • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): भारत के दूसरे सबसे बड़े FTA भागीदार को निर्यात में 2.1% की मामूली गिरावट आई।
        • सकारात्मक रुझान: इसके विपरीत दक्षिण कोरिया (+15.6%), जापान (+2.8%), थाईलैंड (+2.9%) और भूटान (+10.2%) को होने वाले निर्यात में सुधार देखा गया।
      • निर्यात प्रदर्शन में संरचनात्मक बदलाव
        • पेट्रोलियम: वैश्विक कीमतों और मांग के रुझान के कारण पेट्रोलियम निर्यात में भारी गिरावट आई।
        • इलेक्ट्रॉनिक्स: इस क्षेत्र में 47% की जबरदस्त वृद्धि हुई, जो कुल निर्यात का 11% से अधिक है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की मजबूत होती पकड़ को दर्शाता है।

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भारत की व्यापार रणनीति के लिए निहितार्थ:

      • प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की आवश्यकता: रिपोर्ट मौजूदा FTAs के भीतर प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देती है।
      • मूल्य श्रृंखला एकीकरण (Value Chain Integration): इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा अन्य उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ गहरा जुड़ाव आवश्यक है।

आगे की राह:

      • व्यापार नीति में सुधार: 'रूल्स ऑफ ओरिजिन'  पर अधिक जोर देना और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बाजार तक पहुंच को आसान बनाना।
      • निर्यात आधार का विविधीकरण: इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी हार्डवेयर, इंजीनियरिंग सामान और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे उभरते हुए उद्योगों को बढ़ावा देना।
      • घरेलू विनिर्माण: आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना।

निष्कर्ष:

हालांकि FTA भागीदारों के साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में मजबूत वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। वर्तमान व्यापार असंतुलन को एक अवसर में बदलने के लिए रणनीतिक व्यापार वार्ता और लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप महत्वपूर्ण होंगे।