संदर्भ:
हाल ही में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के सहयोग से गंगा बेसिन के प्रमुख नदी-खंडों में संकटग्रस्त इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) तथा अन्य नदीय पक्षी प्रजातियों के संरक्षण हेतु एक प्रमुख परियोजना प्रारंभ की है।
पृष्ठभूमि:
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- इंडियन स्किमर एक विशिष्ट नदीय पक्षी है, जिसकी चोंच जल की सतह को छूते हुए मछलियाँ पकड़ने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती है।
- इस प्रजाति की वैश्विक आबादी का लगभग 90% भारत में पाया जाता है, जिससे इसके दीर्घकालिक संरक्षण में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
- आवास हानि, रेत खनन, बांधों के कारण नदी प्रवाह में परिवर्तन, शिकार, तथा मानव एवं पशुधन गतिविधियों से उत्पन्न व्यवधान के कारण इसकी संख्या में तीव्र गिरावट आई है।
- इंडियन स्किमर एक विशिष्ट नदीय पक्षी है, जिसकी चोंच जल की सतह को छूते हुए मछलियाँ पकड़ने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होती है।
परियोजना के उद्देश्य:
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- इंडियन स्किमर एवं अन्य नदीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण बालू-टापू (सैंडबार) प्रजनन स्थलों की रक्षा करना।
- नदीय पक्षी आबादी की व्यवस्थित निगरानी करना।
- आवास संरक्षण और वैज्ञानिक आंकड़ा संग्रह के लिए सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करना।
- इंडियन स्किमर एवं अन्य नदीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण बालू-टापू (सैंडबार) प्रजनन स्थलों की रक्षा करना।
रणनीतिक दृष्टिकोण:
1. सामुदायिक सहभागिता
यह परियोजना राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के सफल संरक्षण मॉडल पर आधारित है, जहाँ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से नदीय पक्षियों के घोंसला-निर्माण की सफलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
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- स्थानीय निवासियों को निम्न रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा:
- नेस्ट गार्जियन (Nest Guardians)- घोंसलों की सुरक्षा और खतरों को न्यूनतम करने हेतु।
- रिवर गार्जियन (River Guardians)- पक्षी आबादी की निगरानी और आंकड़ा संग्रह में सहायता हेतु।
- नेस्ट गार्जियन (Nest Guardians)- घोंसलों की सुरक्षा और खतरों को न्यूनतम करने हेतु।
- इन भूमिकाओं से नदी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति स्थानीय संरक्षण भावना को बल मिलेगा तथा सहायक आजीविका के अवसर भी सृजित होंगे।
- स्थानीय निवासियों को निम्न रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा:
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2. आवास फोकस क्षेत्र
यह पहल पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नदी-खंडों में लागू की जाएगी, जिनमें शामिल हैं:
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- चंबल नदी
- बिजनौर और नरौरा के निकट ऊपरी गंगा
- प्रयागराज में गंगा–यमुना संगम
- बिहार में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य के निकट निचली गंगा
- चंबल नदी
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लाभान्वित प्रजातियाँ:
इंडियन स्किमर के अतिरिक्त, यह परियोजना अन्य घटती हुई नदीय पक्षी प्रजातियों को भी लक्षित करती है, जो नदी स्वास्थ्य के संकेतक हैं, जैसे:
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- ब्लैक-बेलीड टर्न
- रिवर टर्न
- रिवर लैपविंग
- ग्रेट थिक-नी
- लिटिल टर्न
- लिटिल प्रैटिनकोल
- ब्लैक-बेलीड टर्न
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राष्ट्रीय नीतियों के साथ सामंजस्य:
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- यह परियोजना नमामि गंगे कार्यक्रम के अनुरूप है, जो गंगा के पुनर्जीवन और नदी जैवविविधता संरक्षण हेतु भारत की प्रमुख पहल है।
- यह कार्यक्रम प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक प्रवाह बनाए रखने, जैवविविधता संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को NMCG ढांचे के अंतर्गत एकीकृत करता है।
NMCG ने गंगा के किनारे आर्द्रभूमि संरक्षण, जलीय जैवविविधता निगरानी केंद्रों की स्थापना तथा गंगा डॉल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु भी महत्वपूर्ण पहलें की हैं।
- यह परियोजना नमामि गंगे कार्यक्रम के अनुरूप है, जो गंगा के पुनर्जीवन और नदी जैवविविधता संरक्षण हेतु भारत की प्रमुख पहल है।
महत्व:
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- इको-हाइड्रोलॉजिकल महत्व: इंडियन स्किमर जैसे नदीय पक्षी बालू-टापू आवासों और गतिशील नदी प्रवाह पर निर्भर होते हैं, जिससे उनका संरक्षण सीधे तौर पर सतत नदी प्रबंधन से जुड़ा है।
- समुदाय-नेतृत्वित संरक्षण: स्थानीय हितधारकों को सशक्त बनाकर यह पहल जमीनी स्तर पर स्वामित्व और दीर्घकालिक जैवविविधता संरक्षण को बढ़ावा देती है।
- इको-हाइड्रोलॉजिकल महत्व: इंडियन स्किमर जैसे नदीय पक्षी बालू-टापू आवासों और गतिशील नदी प्रवाह पर निर्भर होते हैं, जिससे उनका संरक्षण सीधे तौर पर सतत नदी प्रबंधन से जुड़ा है।
निष्कर्ष:
BNHS–NMCG परियोजना गंगा बेसिन में उच्च-प्राथमिकता वाली नदीय प्रजातियों के लिए विज्ञान-आधारित, समुदाय-केंद्रित संरक्षण मॉडल प्रस्तुत करती है। महत्वपूर्ण आवासों की सुरक्षा और स्थानीय सहभागिता को सुदृढ़ कर यह पहल भारत के व्यापक नदी पुनर्जीवन एजेंडे के अंतर्गत एकीकृत जैवविविधता संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

