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Blog / 01 Apr 2026

भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति में नया विस्तार: ASW SWC ‘मालवन’

संदर्भ:

हाल ही में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) श्रृंखला के दूसरे पोत ‘मालवन’ को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। यह स्वदेशी रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

पृष्ठभूमि:

      • इस श्रेणी का पहला पोत ‘माहे’ (Mahe) अक्टूबर 2025 में नौसेना को सौंपा गया था। ये जहाज पुराने हो रहे ‘अभय’ (Abhay) श्रेणी के कार्वेट्स का स्थान लेंगे।
      • ‘मालवन’ का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है, जो मराठा नौसेना और छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत का प्रतीक है। यह इस नाम का दूसरा पोत है; इससे पहले ‘आईएनएस मालवन’ एक माइन्सवीपर के रूप में वर्ष 2003 तक नौसेना में सेवा दे चुका है।

Malvan’ of the eight Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW SWC)

तकनीकी विशिष्टताएँ:

      • निर्माण: इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा किया गया है।
      • स्वदेशी सामग्री: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत इसमें 80% से अधिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है।
      • आकार और विस्थापन: इसकी लंबाई लगभग 80 मीटर है तथा इसका विस्थापन लगभग 1,100 टन है।
      • प्रणोदन (Propulsion): यह जहाज अत्यधिक फुर्तीले वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है, जो इसे उथले तटीय जल (Shallow Waters) में तेज गति और बेहतर गतिशीलता प्रदान करता है।

उद्देश्य:

‘मालवन’ को विशेष रूप से निम्नलिखित कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है:

      • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW): तटीय जल में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना।
      • निगरानी: समुद्र के भीतर (Subsurface) निरंतर निगरानी रखना।
      • एलआईएमओ (LIMO): कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन (Low Intensity Maritime Operations) को अंजाम देना।
      • माइन वारफेयर: समुद्री सुरंगों (Mines) को बिछाने और नष्ट करने की क्षमता।
      • हथियार प्रणाली: यह हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट तथा उन्नत सेंसर से सुसज्जित है।

सामरिक महत्व:

भारत की लंबी तटरेखा और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के संदर्भ में ASW SWC जहाजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है:

      • तटीय सुरक्षा: भारत के पास 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा है। ‘मालवन’ जैसे जहाज उथले जल क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करते हैं, जहाँ बड़ी पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है।
      • हिंद महासागर में संतुलन: हिंद महासागर में विदेशी पनडुब्बियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए, ये ‘साइलेंट हंटर्स’ भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करते हैं।
      • आत्मनिर्भरता: रक्षा निर्माण में विदेशी निर्भरता को कम करना भारत की सामरिक स्वायत्तता के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष:

‘मालवन’ की डिलीवरी भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन की सफलता को दर्शाती है। यह न केवल भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि भविष्य के समुद्री युद्ध के लिए भारत की तैयारियों को भी सशक्त बनाता है।

 

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