सन्दर्भ:
भारत आगामी विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) में चीन-समर्थित 'विकास के लिए निवेश सुविधा' (Investment Facilitation for Development - IFD) समझौते का विरोध करेगा। लगभग 166 में से 128 WTO सदस्य इस समझौते के पक्ष में हैं। भारत, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर, राजनीतिक अलगाव के जोखिम का सामना कर सकता है। यह मुद्दा 26–29 मार्च 2026 को कैमरून में होने वाली MC14 बैठक में उठेगा, जो वैश्विक व्यापार शासन में गहरे विभाजन को दर्शाता है।
IFD समझौते के बारे में:
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- 'विकास के लिए निवेश सुविधा' (IFD) समझौता 123 WTO सदस्य देशों द्वारा अंतिम रूप दिया गया एक प्लुरिलैटरल (बहुपक्षीय-सीमित) समझौता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश वातावरण को बेहतर बनाना है। इसका मुख्य लक्ष्य विदेशी निवेशकों के लिए विकासशील एवं अल्पविकसित देशों (LDCs) में व्यवसाय स्थापित करना, संचालन करना तथा विस्तार करना आसान बनाना है।
- इसके पश्चात 126 सह-प्रायोजक देशों ने इसे डब्लूटीओ के ढांचे में Annex 4 के अंतर्गत एक बहुपक्षीय समझौते के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा, जो सभी WTO सदस्यों के लिए खुला होगा।
- 'विकास के लिए निवेश सुविधा' (IFD) समझौता 123 WTO सदस्य देशों द्वारा अंतिम रूप दिया गया एक प्लुरिलैटरल (बहुपक्षीय-सीमित) समझौता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश वातावरण को बेहतर बनाना है। इसका मुख्य लक्ष्य विदेशी निवेशकों के लिए विकासशील एवं अल्पविकसित देशों (LDCs) में व्यवसाय स्थापित करना, संचालन करना तथा विस्तार करना आसान बनाना है।
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मुख्य विशेषताएँ:
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- प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं त्वरित स्वीकृति
- सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय
- विकासशील देशों के लिए विशेष एवं भिन्न व्यवहार (SDT)
- प्रकृति: बहुपक्षीय समझौता- केवल भाग लेने वाले देशों पर बाध्यकारी
- प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं त्वरित स्वीकृति
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भारत के विरोध के कारण:
1. बहुपक्षवाद पर खतरा:
· WTO सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रणाली पर आधारित है
· भारत का तर्क है कि प्लुरिलैटरल समझौते समावेशिता को कमजोर करते हैं
· वैश्विक व्यापार नियमों के विखंडन का खतरा
2. द्विस्तरीय WTO प्रणाली का भय:
· एक सीमित ‘एलीट’ समूह द्वारा नियम निर्माण की आशंका
· विकासशील देशों के हाशिये पर जाने का खतरा
3. वार्ता में असंतुलन:
· प्रमुख लंबित मुद्दों से ध्यान भटकना, जैसे—
o कृषि सब्सिडी
o खाद्य सुरक्षा हेतु सार्वजनिक भंडारण
4. नीति-क्षेत्र पर प्रभाव:
· घरेलू नियामक स्वतंत्रता पर संभावित प्रतिबंध
· निवेश जांच (screening) तंत्र को प्रभावित करने की आशंका
5. चीन कारक :
· लगभग 128 में से 98 IFD सदस्य बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़े हैं
· मानकीकृत नियम:
o चीन के भू-आर्थिक प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं
o भारत के पड़ोसी क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बारे में:
विश्व व्यापार संगठन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना 1995 में मैराकेश समझौते के अंतर्गत हुई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में स्थित है। इसके 166 सदस्य देश विश्व व्यापार के लगभग 98% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
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- मुक्त एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना
- व्यापार अवरोधों एवं भेदभाव को कम करना
- विकासशील देशों के विकास का समर्थन करना
- मुक्त एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना
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WTO के कार्यों में व्यापार वार्ता के लिए मंच प्रदान करना, विवाद निपटान तंत्र उपलब्ध कराना, सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा करना तथा वैश्विक व्यापार नियमों का ढांचा तैयार करना शामिल है।
निष्कर्ष:
IFD समझौता वैश्विक व्यापार शासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। भारत का विरोध निवेश के विरुद्ध नहीं, बल्कि समानता, संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़ी चिंताओं पर आधारित है। आगे बढ़ते हुए, भारत को एक संतुलित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिससे वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अपनी प्रभावशीलता बनाए रख सके और संभावित अलगाव से बच सके।
