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Blog / 27 Jun 2025

भारत-वियतनाम की 13वीं राजनीतिक परामर्श बैठक

संदर्भ:

भारत और वियतनाम के बीच नई दिल्ली में 13वीं राजनीतिक परामर्श बैठक और 10वां रणनीतिक संवाद आयोजित हुआ। इन बैठकों की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी. कुमरन और वियतनाम के उप विदेश मंत्री गुयेन मन्ह कूओंग ने की। ऐसे नियमित संवाद दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

बैठक की प्रमुख बातें:

1. व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा

·         दोनों पक्षों ने दिसंबर 2020 में अपनाए गए शांति, समृद्धि और जनता के लिए संयुक्त दृष्टिकोण के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की।

·         अगस्त 2024 में वियतनामी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित 2024–2028 कार्य योजना के कार्यान्वयन पर भी चर्चा की गई।

2. रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

·         भारत और वियतनाम ने विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

·         संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, सूचनाओं के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण जैसे पहलुओं पर चर्चा हुई।

·         दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को अत्यंत आवश्यक बताया।

3. आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग

·         व्यापार और निवेश संबंधों को सुदृढ़ बनाना बैठक का प्रमुख विषय रहा।

·         कृषि, दवा उद्योग, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल भुगतान और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई गई।

·         दोनों देशों ने संपर्क (connectivity) को बढ़ाने और विज्ञान, प्रौद्योगिकी व अंतरिक्ष क्षेत्र में नए सहयोग के अवसर तलाशने पर सहमति व्यक्त की।

4. सांस्कृतिक एवं विकासात्मक सहयोग

·         दोनों पक्षों ने विरासत संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़ी विकास परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष जताया।

·         त्वरित प्रभाव परियोजनाएं (QIPs), भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC), ई-ITEC प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्तियां वियतनाम की विकास आवश्यकताओं में सहायक साबित हो रही हैं।

5. आतंकवाद विरोधी सहयोग

·         भारत और वियतनाम ने सीमापार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कठोर निंदा की।

·         भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में वियतनाम द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की सराहना की।

6. क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर संवाद

·         दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

·         वियतनाम की भूमिका को भारत की एक्ट ईस्ट नीति, महासागर दृष्टिकोण (MAHASAGAR Vision) और हिंद-प्रशांत रणनीति में एक प्रमुख भागीदार के रूप में पुनः पुष्टि की गई।

India-Vietnam Relations

भारत-वियतनाम संबंध:

·         अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 के बीच वियतनाम द्वारा भारत में कुल 12.69 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया गया है, जिससे वह एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 84वें स्थान पर है। वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति में एक प्रमुख और रणनीतिक भागीदार की भूमिका निभाता है।

·         वर्ष 2023–24 में भारत-वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा 14.81 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत से वियतनाम को निर्यात 5.47 बिलियन डॉलर और वियतनाम से भारत को आयात 9.34 बिलियन डॉलर रहा। वियतनाम अपने व्यापारिक आधार को विविध बनाते हुए भारत के तेजी से बढ़ते बाजार का लाभ उठा रहा है।

·         वियतनाम से भारत को होने वाले प्रमुख निर्यातों में मोबाइल फोन और उनके घटक, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रसायन, प्लास्टिक, रबर, कॉफी, काली मिर्च और काजू प्रमुख हैं।

·         भारत से वियतनाम को किए जाने वाले मुख्य निर्यातों में लोहा और इस्पात उत्पाद, वस्त्र, मत्स्य उत्पाद, मक्का, दवाइयाँ (फार्मास्यूटिकल्स) और ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं।

·         भारत, वियतनाम का 8वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि वियतनाम भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में चौथा सबसे बड़ा साझेदार है।

·         मेकांग-गंगा सहयोग (MGC) के तहत भारत प्रत्येक 50,000 अमेरिकी डॉलर मूल्य की त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (QIPs) को वित्तपोषित करता है। वर्तमान में भारत की 317 वैध परियोजनाएं, जिनका कुल मूल्य 1 बिलियन डॉलर से अधिक है, वियतनाम में सक्रिय हैं, जिससे भारत 129 निवेशक देशों में 23वें स्थान पर आता है।

निष्कर्ष:

नई दिल्ली में आयोजित 13वें राजनीतिक परामर्श और 10वें रणनीतिक संवाद ने भारत-वियतनाम की समग्र रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की है। दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं तय की हैं। यह संवाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि की दिशा में दोनों देशों की मजबूत और प्रतिबद्ध सोच को उजागर करता है।

 

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