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Blog / 18 Jun 2026

भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA)

संदर्भ:

भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के मध्य व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement– CETA) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। इसके कार्यान्वयन में देरी ब्रिटेन द्वारा लागू किए गए नए इस्पात आयात प्रतिबंधों के कारण हुई थी, किंतु अब दोनों देशों ने द्विपक्षीय इस्पात व्यापार की सुरक्षा हेतु सहमति प्राप्त कर ली है।

समझौते के कार्यान्वयन में देरी क्यों हुई?

यद्यपि CETA पर जुलाई 2025 में हस्ताक्षर हो गए थे और इसे अप्रैल–मई 2026 तक लागू किया जाना था, किंतु मई 2026 में ब्रिटेन ने इस्पात आयात से संबंधित नए सुरक्षा उपाय लागू कर दिए।

ब्रिटेन के नए इस्पात उपाय:

      • शुल्क-मुक्त इस्पात आयात कोटा में 60 प्रतिशत की कमी।
      • निर्धारित कोटा से अधिक आयात पर शुल्क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया।
      • ये नए नियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुए।

इस्पात विवाद का समाधान:

वार्ताओं के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय इस्पात व्यापार की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक सहमति बनी।

भारतीय इस्पात निर्यात के लिए सुरक्षा उपाय

भारतीय इस्पात निर्यात को निम्न माध्यमों से संरक्षण दिया जाएगा—

      • देश-विशिष्ट कोटा (Country-Specific Quota - CSQ)
        • भारत के लिए अलग से निर्धारित कोटा।
      • . अवशिष्ट कोटा (Residual Quota)
        • शेष उपलब्ध कोटा तक पहुँच की सुविधा।
      • अधिकृत उपयोग योजना (Authorised Use Scheme - AUS)
        • ब्रिटेन में आवश्यक विशेष प्रकार के इस्पात उत्पादों के लिए सरल बाजार पहुँच।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार भारत के लगभग 85 प्रतिशत इस्पात निर्यात ब्रिटेन के नए प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहेंगे।

Press Note Details: Press Information Bureau

भारत–ब्रिटेन CETA के बारे में:

व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक है, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, सेवाओं, प्रौद्योगिकी सहयोग और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • वस्तुओं के व्यापार से संबंधित 99 प्रतिशत से अधिक शुल्क श्रेणियों को शामिल करता है।
      • ब्रिटेन लगभग सभी भारतीय निर्यातों पर शुल्क समाप्त करेगा।
      • निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को प्रोत्साहन देगा।
      • इसके साथ द्वैध अंशदान अभिसमय (Double Contribution Convention - DCC) अथवा सामाजिक सुरक्षा समझौता भी लागू होगा।

व्यापार लक्ष्य:

यह समझौता वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 56 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है।

भारत–ब्रिटेन व्यापारिक संबंध:

      • द्विपक्षीय व्यापार : 56 अरब अमेरिकी डॉलर
      • भारत का वस्तु निर्यात : 12.9 अरब अमेरिकी डॉलर
      • भारत का सेवा निर्यात : 19.8 अरब अमेरिकी डॉलर
      • ब्रिटेन का भारत को वस्तु निर्यात : 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर
      • ब्रिटेन का भारत को सेवा निर्यात : 13 अरब अमेरिकी डॉलर
      • वर्तमान में भारत का ब्रिटेन के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) है।

भारत के लिए CETA का महत्व:

      • निर्यात संबंधी लाभ:
        • ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुँच।
        • भारत के निर्यात और व्यापार में वृद्धि।
      • लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र:
      • वस्त्र एवं परिधान उद्योग: 9–12 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त होने से लाभ।
      • रत्न एवं आभूषण उद्योग: ब्रिटेन के बाजार में अधिक अवसर।
      • चमड़ा एवं जूता उद्योग: प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि।
      • औषधि एवं अभियांत्रिकी उत्पाद: नए निर्यात अवसर उपलब्ध होंगे।
      • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs)
        • निर्यात के अधिक अवसर।
        • वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में बेहतर एकीकरण।

ब्रिटेन को होने वाले लाभ:

      • भारत के बाजार में मशीनरी, रक्षा उपकरण, चिकित्सा उपकरण, स्वच्छ ऊर्जा और शिक्षा क्षेत्रों में अधिक पहुँच।
      • स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाला शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा, जिसे बाद में 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।

भारत के लिए व्यापक महत्व:

      • आर्थिक महत्व: निर्यात, निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
      • रणनीतिक महत्व: भारत–ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।
      • रोजगार सृजन: श्रम-प्रधान क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे।
      • व्यापार विविधीकरण
        • यूरोप में भारत की आर्थिक उपस्थिति का विस्तार होगा।
        • पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम होगी।

निष्कर्ष:

भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बाजार पहुँच में सुधार, व्यापार वृद्धि, निवेश प्रोत्साहन तथा प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

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