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Blog / 19 May 2026

भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी 2026: मुख्य बातें और महत्व

भारत–स्वीडन रणनीतिक साझेदारी 2026

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की 18 मई 2026 की स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया। यह कदम दोनों देशों के बीच नवाचार, सतत विकास, रक्षा, व्यापार और उभरती प्रौद्योगिकियों में बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

यात्रा की प्रमुख विशेषताएँ:

      • प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन द्वारा “रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार एंड कमांडर ग्रैंड क्रॉस” से सम्मानित किया गया, जो किसी विदेशी शासनाध्यक्ष को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह प्रधानमंत्री मोदी का 31वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान था।
      • भारत और स्वीडन ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार, सतत विकास तथा अनुसंधान सहयोग के आधार पर अपने संबंधों को संस्थागत रूप देने हेतु रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। यह साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी:
        • स्थिरता और सुरक्षा हेतु रणनीतिक संवाद
        • नई पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी
        • उभरती प्रौद्योगिकियाँ एवं विश्वसनीय कनेक्टिविटी
        • “शेपिंग टुमॉरो टुगेदर” – लोग, पृथ्वी, स्वास्थ्य और लचीलापन
      • उन्नत साझेदारी को क्रियान्वित करने के लिए दोनों देशों ने “भारत–स्वीडन संयुक्त कार्ययोजना 2026–2030” को अपनाया, जो राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा, जलवायु तथा जन-से-जन संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग हेतु एक रोडमैप प्रदान करती है।
      • दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल अवसंरचना तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गति देने के लिए “भारत–स्वीडन प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता कॉरिडोर (SITAC)” के विकास का भी समर्थन किया। साथ ही नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए “भारत–स्वीडन एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप प्लेटफॉर्म” की स्थापना भी की जाएगी।

PM Modi Calls Sweden Visit a Major Milestone in India-Sweden Strategic  Partnership

भारत–स्वीडन संबंधों के बारे में:

      • कूटनीतिक संबंध: भारत और स्वीडन ने वर्ष 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। स्वीडन ने वर्ष 2018 में पहले भारत–नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिससे नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत की सहभागिता को मजबूती मिली। समय के साथ द्विपक्षीय संबंध व्यापार, नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्रों में लगातार विस्तारित हुए हैं।
      • आर्थिक संबंध: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2025 में लगभग 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत में स्वीडन का संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगभग 2.59 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
        • भारत में लगभग 280 स्वीडिश कंपनियाँ निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्यरत हैं:
          • दूरसंचार
        • ऑटोमोबाइल
        • इंजीनियरिंग
        • स्वच्छ ऊर्जा
      • वहीं लगभग 75 भारतीय कंपनियाँ भी स्वीडन में व्यावसायिक उपस्थिति बनाए हुए हैं।
      • सतत विकास सहयोग: भारत और स्वीडन ने वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन के दौरान “लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT)” की संयुक्त रूप से शुरुआत की थी। यह पहल निम्न-कार्बन औद्योगिक परिवर्तन तथा सतत विनिर्माण प्रथाओं को प्रोत्साहित करती है।

भारत के लिए महत्व:

      • यह साझेदारी उत्तरी यूरोप और यूरोपीय संघ के साथ भारत की रणनीतिक सहभागिता को मजबूत करती है। स्वीडन एक नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था है तथा निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है:
        • हरित औद्योगिकीकरण
        • उन्नत विनिर्माण
        • डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार
        • सतत शहरी गतिशीलता
      • यह साझेदारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने में भी सहायक होगी। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधारों पर भी बल दिया, ताकि उन्हें अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाया जा सके।

आगे की राह:

भारत–स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और सतत विकास पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। जैसे-जैसे दोनों देश उभरती प्रौद्योगिकियों, जलवायु परिवर्तन, व्यापार, रक्षा तथा बहुपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों में अपने संबंधों को और गहरा करेंगे, यह साझेदारी नॉर्डिक क्षेत्र और यूरोप के साथ भारत की सहभागिता का एक प्रमुख स्तंभ बन सकती है।

 

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