भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा साझेदारी 2026
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सियोल (दक्षिण कोरिया) की यात्रा पर रहे जहाँ भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में गहन सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
उच्च स्तरीय रक्षा वार्ताएँ:
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- इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (DAPA) के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने अपनी रक्षा उद्योगों की पूरक क्षमताओं का उपयोग करते हुए संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने पर सहमति जताई।
- वार्ताओं में लॉजिस्टिक सहयोग को मजबूत करने, सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
- इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (DAPA) के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने अपनी रक्षा उद्योगों की पूरक क्षमताओं का उपयोग करते हुए संयुक्त विकास, सह-उत्पादन और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने पर सहमति जताई।
यात्रा के प्रमुख परिणाम:
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- संस्थागत ढाँचा और समझौते: दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सहयोग को विस्तार देने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया, जिनमें शामिल हैं:
- रक्षा साइबर सुरक्षा
- भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज और कोरिया नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के बीच प्रशिक्षण सहयोग
- संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में सहयोग
- इन समझौतों का उद्देश्य साझेदारी को अधिक संस्थागत, संगठित और बहुआयामी बनाना है।
- रक्षा साइबर सुरक्षा
- रक्षा उद्योग सहयोग और नवाचार: यात्रा का एक प्रमुख केंद्र रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना था। दोनों पक्षों ने “इंडिया-कोरिया डिफेंस इनोवेशन एक्सेलेरेटर इकोसिस्टम (KIND-X)” पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्र को जोड़ना है। इसके माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेंसर, सेमीकंडक्टर, स्वायत्त प्रणालियाँ और साइबर क्षमताओं जैसी उन्नत तकनीकों में संयुक्त विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
- प्रमुख रक्षा विनिर्माण पहल: रक्षा उत्पादन सहयोग को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनसे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और निर्यात-उन्मुख उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह पहल “मेक इन इंडिया” ढाँचे के तहत भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को और सशक्त बनाएगी।
- समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण: दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में अपने साझा हितों को दोहराया। सहयोग का मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक क्षमताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने पर रहेगा। यह बदलती भू-राजनीतिक चुनौतियों के प्रति दोनों देशों की साझा रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
- पूर्व सैनिक सहयोग और ऐतिहासिक संबंध: भारत और दक्षिण कोरिया ने पूर्व सैनिक मामलों में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की। “अंतरराष्ट्रीय पूर्व सैनिक सहयोग” पर समझौता ज्ञापन के तहत कोरियाई युद्ध के सैनिकों को सम्मानित करने, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने तथा साझा ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। कोरियाई युद्ध के दौरान भारत के योगदान, विशेष रूप से 60वीं पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस की तैनाती, को विशेष रूप से सराहा गया। इससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मानवीय संबंधों को भी रेखांकित किया गया।
- संस्थागत ढाँचा और समझौते: दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सहयोग को विस्तार देने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया, जिनमें शामिल हैं:
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भारत–दक्षिण कोरिया रक्षा साझेदारी के बारे में:
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- भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध वर्ष 2015 में “विशेष रणनीतिक साझेदारी” तक विकसित हुए। यह साझेदारी रक्षा औद्योगिक सहयोग में निरंतर वृद्धि से समर्थित है, जिसमें K9 वज्र-टी आर्टिलरी कार्यक्रम जैसी प्रमुख परियोजनाएँ शामिल हैं।
- दोनों देशों के संबंध भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और दक्षिण कोरिया की क्षेत्रीय रणनीतियों के बीच बढ़ते सामंजस्य पर आधारित हैं। साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध वर्ष 2015 में “विशेष रणनीतिक साझेदारी” तक विकसित हुए। यह साझेदारी रक्षा औद्योगिक सहयोग में निरंतर वृद्धि से समर्थित है, जिसमें K9 वज्र-टी आर्टिलरी कार्यक्रम जैसी प्रमुख परियोजनाएँ शामिल हैं।
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निष्कर्ष:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यात्रा भारत–दक्षिण कोरिया रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा, नवाचार तंत्र और हिंद-प्रशांत रणनीति में बढ़ते सहयोग के साथ दोनों देश अधिक एकीकृत और भविष्य उन्मुख रणनीतिक साझेदारी की ओर अग्रसर हैं।
