सन्दर्भ:
हाल ही में भारत और दक्षिण कोरिया ने मई 2026 में भारत–कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (IK CEPA) के उन्नयन हेतु 12वें दौर की वार्ताएँ संपन्न कीं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य बढ़ते व्यापार असंतुलन को संबोधित करना तथा समझौते को वर्तमान वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक बनाना था।
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता क्या है?
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का एक उन्नत रूप है, जो केवल शुल्क (टैरिफ) में कमी तक सीमित नहीं होता। इसमें शामिल हैं:
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- वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार
- निवेश सुविधा
- बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)
- सरकारी खरीद
- डिजिटल व्यापार
- नियामक सहयोग
- वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार
इस प्रकार, CEPA भागीदार देशों के बीच गहन आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है।
भारत–दक्षिण कोरिया CEPA के बारे में:
यह CEPA वर्ष 2010 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को बढ़ावा देना था। हालांकि, समय के साथ व्यापार असंतुलन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई:
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- 2010: लगभग 5.1 अरब डॉलर का घाटा
- 2025-26: लगभग 15.6 अरब डॉलर का घाटा
- 2010: लगभग 5.1 अरब डॉलर का घाटा
इसी कारण भारत ने अधिक संतुलित ढाँचे के लिए इस समझौते के उन्नयन की मांग की।
वार्ता के 12वें दौर के प्रमुख परिणाम:
व्यापार असंतुलन की स्वीकृति
दक्षिण कोरिया ने बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं को स्वीकार किया और CEPA ढाँचे के भीतर इसे संबोधित करने पर सहमति जताई। यह निष्पक्ष और समान व्यापार व्यवस्था के लिए भारत के प्रयासों को दर्शाता है।
वार्ता के क्षेत्रों का विस्तार
चर्चाओं में निम्नलिखित विषय शामिल रहे:
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- वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार
- निवेश नियम
- उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin – RoO)
- SPS मानक (स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता मानक)
- वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार
निम्न क्षेत्रों में नए उप-समूह प्रस्तावित किए गए:
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- डिजिटल व्यापार
- आपूर्ति श्रृंखला सहयोग
- रणनीतिक औद्योगिक सहयोग
- डिजिटल व्यापार
आधुनिक व्यापार संरचना पर ध्यान
उन्नत CEPA का उद्देश्य निम्नलिखित विकसित करना है:
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- एक आधुनिकीकृत व्यापार ढाँचा
- प्रौद्योगिकी-आधारित साझेदारी
- सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला गलियारे
- एक आधुनिकीकृत व्यापार ढाँचा
यह भारत की इंडो-पैसिफिक आर्थिक रणनीति के अनुरूप है।
भारत के लिए व्यापार घाटा चिंता का विषय क्यों है?
घरेलू विनिर्माण पर दबाव
इलेक्ट्रॉनिक्स, इस्पात, मशीनरी और रसायन जैसे क्षेत्रों में सस्ते आयात भारतीय उद्योगों और MSMEs को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
CEPA से असमान लाभ
भारत के निर्यात में अनुपातिक वृद्धि नहीं हो सकी, जिसके प्रमुख कारण हैं:
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- गैर-शुल्कीय बाधाएँ
- कठोर गुणवत्ता मानक
- सीमित प्रतिस्पर्धात्मकता
- गैर-शुल्कीय बाधाएँ
रणनीतिक आर्थिक निर्भरता
लगातार बढ़ते व्यापार घाटे से:
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- आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है
- घरेलू औद्योगिक विकास धीमा हो सकता है
- आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को नुकसान पहुँच सकता है
- आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है
भारत–कोरिया आर्थिक सहयोग का व्यापक महत्व:
इंडो-पैसिफिक रणनीति
मजबूत संबंध निम्नलिखित में सहायता करते हैं:
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- चीन पर निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना
- पूर्वी एशियाई साझेदारियों को मजबूत करना
- सुदृढ़ विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना
- चीन पर निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना
प्रौद्योगिकी और निवेश
दक्षिण कोरिया निम्न क्षेत्रों में प्रमुख निवेशक है:
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- इलेक्ट्रॉनिक्स
- सेमीकंडक्टर
- ऑटोमोबाइल
- ईवी बैटरियाँ
- इलेक्ट्रॉनिक्स
उन्नत CEPA प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और संयुक्त औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा दे सकता है।
आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता
कोविड-19 के बाद उत्पन्न व्यवधानों ने सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को उजागर किया। सहयोग मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों पर केंद्रित है:
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- महत्वपूर्ण खनिज
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
- हरित प्रौद्योगिकियाँ
- सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र
- महत्वपूर्ण खनिज
भारत की FTA/CEPA रणनीति में प्रमुख चुनौतियाँ:
उत्पत्ति के नियम (RoO) का दुरुपयोग
तीसरे देशों के उत्पाद न्यूनतम मूल्य संवर्धन के साथ साझेदार देशों के माध्यम से प्रवेश कर सकते हैं।
निर्यातकों द्वारा कम उपयोग
MSMEs को निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
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- जटिल प्रक्रियाएँ
- जागरूकता की कमी
- प्रमाणन संबंधी कठिनाइयाँ
- जटिल प्रक्रियाएँ
गैर-शुल्कीय बाधाएँ
निर्यात को कठोर मानकों, SPS उपायों और तकनीकी नियमों का सामना करना पड़ता है।
उल्टा शुल्क ढाँचा (Inverted Duty Structure)
कच्चे माल पर तैयार वस्तुओं की तुलना में अधिक शुल्क घरेलू विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर करता है।
आगे की राह:
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- CEPA में संतुलित व्यापार तंत्र सुनिश्चित करना
- उत्पत्ति के नियमों के प्रवर्तन को मजबूत करना
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और लॉजिस्टिक्स में सुधार करना
- MSMEs को FTA लाभों के उपयोग में सहायता देना
- प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना
- CEPA में संतुलित व्यापार तंत्र सुनिश्चित करना
निष्कर्ष:
भारत-दक्षिण कोरिया CEPA का उन्नयन भारत की विकसित होती व्यापार रणनीति को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य आर्थिक सुरक्षा के साथ खुलेपन में संतुलन स्थापित करना है। यद्यपि यह वैश्विक एकीकरण और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करता है, फिर भी इसे निष्पक्ष व्यापार परिणाम सुनिश्चित करने और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। एक आधुनिकीकृत CEPA भविष्य में भारत-नेतृत्व वाले व्यापार समझौतों के लिए समानता, प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर आधारित आदर्श मॉडल बन सकता है।

