चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री 27–29 जून 2026 के दौरान सेशेल्स की राजकीय यात्रा (State Visit) प रहे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष, कृषि तथा विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर करते हुए अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक रही तथा इसने हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) के लिए भारत की महासागर (MAHASAGAR - Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) दृष्टि को और अधिक सुदृढ़ किया।
यात्रा के प्रमुख परिणाम:
भारत और सेशेल्स ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, रक्षा तथा सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान यूपीआई (UPI) के कार्यान्वयन, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, एक्सिम बैंक (EXIM Bank) सहयोग, नौवहन, अंतरिक्ष अन्वेषण, प्रत्यर्पण (Extradition), क्षमता निर्माण तथा लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit - LoC) से संबंधित अनेक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। भारत ने अवसंरचना, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की, जिसमें 125 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट तथा 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता (Grant Assistance) शामिल है।

महासागर (MAHASAGAR) दृष्टि के बारे में:
इस यात्रा में भारत की महासागर (MAHASAGAR) दृष्टि को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर को "अवसरों के महासागर (Ocean of Opportunity)" में परिवर्तित करना है। यह दृष्टि समुद्री सुरक्षा, सतत आर्थिक समृद्धि, पारस्परिक सम्मान तथा क्षेत्रीय शांति एवं विकास के लिए साझा उत्तरदायित्व पर आधारित है। पूर्व की सागर (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) नीति का विस्तार करते हुए, महासागर दृष्टि ब्लू इकोनॉमी, आपदा सहनशीलता, क्षेत्रीय संपर्क तथा सहयोगात्मक साझेदारी के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
समुद्री सुरक्षा सहयोग:
समुद्री सुरक्षा भारत–सेशेल्स संबंधों का प्रमुख आधार बनी हुई है। दोनों देशों के बीच सहयोग का मुख्य फोकस समुद्री डकैती (Piracy), अवैध, अपंजीकृत एवं अनियमित (Illegal, Unreported and Unregulated - IUU) मत्स्यन, मादक पदार्थों की तस्करी, समुद्री अपराध, हाइड्रोग्राफी (Hydrography), समुद्री निगरानी तथा रक्षा क्षमता निर्माण पर है। भारत ने पीएस ज़ोरोस्टर (PS Zoroaster) का पुनरुद्धार (Refitting) किया तथा फास्ट अटैक वेसल (Fast Attack Vessel) पीएस लेस्पवार (PS Lespwar) को सेशेल्स तटरक्षक बल (Seychelles Coast Guard) को उपहारस्वरूप प्रदान किया, जिससे पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और अधिक सुदृढ़ हुई।
भारत के लिए सेशेल्स का महत्व:
सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में महत्वपूर्ण समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication - SLOCs) के निकट एक अत्यंत रणनीतिक स्थान पर स्थित है। यह भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना, हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) रणनीति तथा ब्लू इकोनॉमी पहलों का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। सेशेल्स के साथ सहयोग समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद तथा अवैध मत्स्यन जैसी चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को संतुलित करने में भी सहायक है। एक लघु द्वीपीय विकासशील राष्ट्र (Small Island Developing State - SIDS) होने के कारण सेशेल्स भारत की विकास कूटनीति का भी एक प्रमुख भागीदार है।
भारत–सेशेल्स संबंधों के बारे में:
भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा रणनीतिक आधारों पर विकसित हुए एक दीर्घकालिक साझेदारी का उदाहरण हैं। भारतीय समुदाय का सेशेल्स में आगमन अठारहवीं शताब्दी में हुआ था और आज भी भारतीय मूल के लोग वहाँ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। दोनों देश वर्ष 2001 से द्विवार्षिक अभ्यास लैमितिये (Exercise LAMITYE) का आयोजन करते आ रहे हैं। वर्ष 1986 में तख्तापलट (Coup) के प्रयास के दौरान भारत ने ऑपरेशन फ्लावर्स आर ब्लूमिंग (Operation Flowers are Blooming) के माध्यम से अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया था। इस यात्रा के दौरान सेशेल्स ने आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI) में शामिल होने की भी घोषणा की, जिससे जलवायु सहनशीलता के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
निष्कर्ष:
वर्ष 2026 की यह राजकीय यात्रा सुरक्षित, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है। महासागर (MAHASAGAR) दृष्टि के अंतर्गत रक्षा, विकास एवं समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ बनाते हुए भारत ने सेशेल्स तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अन्य द्वीपीय देशों के लिए एक विश्वसनीय सुरक्षा एवं विकास साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत किया है।
