संदर्भ:
हाल ही में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का समुद्री खाद्य निर्यात वित्त वर्ष 2025–26 में अब तक के सर्वाधिक स्तर पर पहुँच गया। कुल निर्यात 19,72,018 मीट्रिक टन रहा। मूल्य के संदर्भ में यह $8.46 बिलियन (लगभग ₹73,890 करोड़) रहा।
मुख्य बिंदु:
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- भारत के समुद्री उत्पादों (सीफूड) के निर्यात ने 19,72,018 मीट्रिक टन और $8.46 बिलियन (₹73,890 करोड़) का स्तर हासिल किया है। यह अब तक का सबसे अधिक निर्यात है, जो मात्रा और मूल्य दोनों के मामले में रिकॉर्ड है।
- उत्पाद संरचना के अनुसार, फ्रोजन श्रिम्प सबसे प्रमुख निर्यात वस्तु रही, जिसने $5.62 बिलियन (कुल आय का 66.52%) योगदान दिया और इसकी मात्रा 7,92,647 मीट्रिक टन रही, जिसमें मुख्यतः व्हाइट-लेग श्रिम्प (Whiteleg shrimp) और ब्लैक टाइगर श्रिम्प शामिल हैं। अन्य प्रमुख उत्पादों में फ्रोजन फिश ($643.7 मिलियन), ड्राइड सीफूड ($577.44 मिलियन, रुपये में 78% की वृद्धि), फ्रोजन स्क्विड ($513.84 मिलियन), तथा कटलबोन (कटलफिश) का स्थिर विकास शामिल है, साथ ही चिल्ड और लाइव उत्पाद उभरते हुए क्षेत्र हैं।
- प्रमुख बाजारों में संयुक्त राज्य अमेरिका $2.33 बिलियन के साथ सबसे बड़ा मूल्य आयातक रहा, जबकि चीन 4.9 लाख मीट्रिक टन के साथ सबसे बड़ा मात्रा आयातक रहा। इसके अलावा यूरोपीय संघ ($1.59 बिलियन), दक्षिण-पूर्व एशिया ($1.35 बिलियन), जापान और मध्य पूर्व भी महत्वपूर्ण बाजार रहे। भारत के प्रमुख निर्यात बंदरगाहों में विशाखापट्टनम (विजाग), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) और कोचीन पोर्ट शामिल हैं, जो देश के समुद्री निर्यात ढांचे की रीढ़ हैं।
- भारत के समुद्री उत्पादों (सीफूड) के निर्यात ने 19,72,018 मीट्रिक टन और $8.46 बिलियन (₹73,890 करोड़) का स्तर हासिल किया है। यह अब तक का सबसे अधिक निर्यात है, जो मात्रा और मूल्य दोनों के मामले में रिकॉर्ड है।
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भारत के लिए इसका महत्व:
ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा
• भारत के ब्लू इकॉनमी ढांचे को मजबूत करता है
• तटीय समुदायों (Coastal Communities) की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाता है
• मत्स्य पालन आधारित ग्रामीण रोजगार को समर्थन देता है
विदेशी मुद्रा अर्जन
• समुद्री खाद्य (Seafood) भारत के प्रमुख कृषि निर्यात आय स्रोतों में से एक है
• व्यापार संतुलन (Trade Balance) और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में महत्वपूर्ण योगदान देता है
कृषि विविधीकरण
• कृषि और वस्त्र क्षेत्र से आगे गैर-पारंपरिक निर्यातों को बढ़ावा देता है
• जलीय कृषि (Aquaculture) के विस्तार और तटीय औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करता है
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण
• भारत वैश्विक स्तर पर झींगा और समुद्री उत्पादों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन रहा है
• अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और पूर्वी एशियाई खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ मजबूत एकीकरण
चुनौतियाँ:
रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद कुछ संरचनात्मक समस्याएँ बनी हुई हैं:
• झींगा (Shrimp) निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता (कम उत्पाद विविधीकरण)
• अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में मांग में उतार-चढ़ाव
• विकसित देशों में कड़े गुणवत्ता और स्वच्छता मानक
• तटीय जलीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
• वियतनाम, इक्वाडोर और थाईलैंड जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
• उच्च इनपुट लागत के कारण छोटे किसानों की लाभप्रदता पर दबाव
आगे की राह:
निर्यात वृद्धि को बनाए रखने के लिए भारत को:
• झींगा से आगे बढ़कर समुद्री खाद्य उत्पादों का विविधीकरण करना
• मूल्य संवर्धित (Value-added) समुद्री उत्पादों में निवेश बढ़ाना
• कोल्ड चेन और प्रसंस्करण अवसंरचना को मजबूत करना
• अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन में सुधार करना
• ब्लू इकॉनमी ढांचे के तहत सतत जलीय कृषि को बढ़ावा देना
• अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका में बाजार विस्तार करना
निष्कर्ष:
2025–26 में भारत का रिकॉर्ड समुद्री खाद्य निर्यात वैश्विक समुद्री व्यापार में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। हालांकि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता होगी। ब्लू इकॉनमी को मजबूत करके समुद्री निर्यात को भारत की निर्यात रणनीति और तटीय विकास मॉडल का एक स्थायी स्तंभ बनाया जा सकता है।
