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Blog / 12 Sep 2026

भारत-रूस संबंध: रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और तकनीक

संदर्भ:

हाल ही में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 11 सितंबर, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत–रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे दायरे की समीक्षा की, जिसमें रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढाँचा और लोगों के बीच संबंध शामिल थे।

बैठक के प्रमुख परिणाम:

      • व्यापार और आर्थिक सहयोग: भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। सहयोग का ध्यान औद्योगिक परियोजनाओं, बुनियादी ढाँचे, रेलवे, सुरंग निर्माण, इस्पात मूल्य शृंखलाओं और व्यापार-से-व्यापार स्तर पर अधिक सहभागिता पर रहेगा। हालाँकि, रूस के पक्ष में बढ़ता व्यापार असंतुलन भारत के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
      • ऊर्जा सुरक्षा: ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। दोनों पक्षों ने रणनीतिक संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से कच्चे तेल और उर्वरकों के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करने पर चर्चा की। भू-राजनीतिक व्यवधानों के बीच यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
      • रक्षा सहयोग: रूस पारंपरिक रूप से भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है, जो Su-30MKI विमान, T-90 टैंक और S-400 वायु रक्षा प्रणालियाँ जैसी रक्षा प्रणालियाँ उपलब्ध कराता रहा है। संबंध तेजी से खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और उत्पादन की ओर बढाने पर चर्चा हुई , जिसमें ब्रह्मोस और AK-203 राइफलें शामिल हैं।
      • असैन्य परमाणु सहयोग: तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत–रूस असैन्य परमाणु सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण बना हुआ है। दोनों देशों ने भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए परमाणु क्षेत्र में आगे सहयोग पर चर्चा की।
      • रूस–यूक्रेन संघर्ष: प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। उन्होंने कहा कि भारत शांति प्रयासों में सहायता करने के लिए तैयार है। नेताओं ने संघर्ष के काला सागर क्षेत्र और भारतीय नाविकों पर प्रभाव पर भी चर्चा की।
      • संपर्क और प्रौद्योगिकी: अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और प्रस्तावित चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा भारत के रूस और यूरेशिया के साथ संपर्क में सुधार कर सकते हैं। अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी और कुशल जनशक्ति के क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा की गई।

India–Russia Relations BRICS summtit 2026

भारत–रूस संबंधों के बारे में:

भारत–रूस संबंधों की गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं। सोवियत संघ के साथ 1971 की शांति, मैत्री और सहयोग संधि ने रणनीतिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। वर्ष 2000 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के रूप में संस्थागत रूप दिया गया और 2010 में इसे विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के रूप में उन्नत किया गया।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • रूस की चीन के साथ बढ़ती निकटता
      • रूस–यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी प्रतिबंध
      • द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन
      • भुगतान और निपटान संबंधी कठिनाइयाँ
      • भारत द्वारा रक्षा खरीद में विविधीकरण
      • वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान

आगे की राह:

भारत को रूस के लिए निर्यात में विविधता लानी चाहिए, रक्षा सह-उत्पादन को मजबूत करना चाहिए, परमाणु और ऊर्जा सहयोग का विस्तार करना चाहिए, भुगतान तंत्र में सुधार करना चाहिए, INSTC का विकास करना चाहिए और महत्वपूर्ण खनिजों तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष:

भारत–रूस साझेदारी पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, संपर्क और औद्योगिक सहयोग की दिशा में विकसित हो रही है। भारत को अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए और उभरती हुई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालते हुए इस रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखना चाहिए।

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