संदर्भ:
हाल ही में भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर, 2026 को लागू हुआ। इस समझौते पर 27 अप्रैल, 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे तथा दोनों देशों द्वारा इसका अनुमोदन किए जाने के बाद इसे लागू किया गया। इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को मजबूत करना है। इसके तहत वर्ष 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके लगभग 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रमुख विशेषताएँ:
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- बाजार तक पहुँच और शुल्क उदारीकरण:
- न्यूजीलैंड ने समझौते के लागू होने के साथ ही भारत के 100% निर्यात पर शून्य-शुल्क के साथ बाजार तक पहुँच प्रदान की है।
- भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश की है, जिससे मूल्य के आधार पर न्यूजीलैंड के लगभग 95% निर्यात को लाभ मिलेगा।
- भारतीय वस्त्र, चमड़ा, जूते, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
- न्यूजीलैंड ने समझौते के लागू होने के साथ ही भारत के 100% निर्यात पर शून्य-शुल्क के साथ बाजार तक पहुँच प्रदान की है।
- संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण:
- भारत ने डेयरी उत्पादों और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है।
- संरक्षित उत्पादों में दूध, पनीर, व्हे (दूध से प्राप्त प्रोटीनयुक्त पदार्थ), प्याज, चीनी, मसाले और खाद्य तेल शामिल हैं।
- यह भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें व्यापार उदारीकरण के साथ-साथ किसानों, ग्रामीण आजीविका और घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा पर भी ध्यान दिया गया है।
- भारत ने डेयरी उत्पादों और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है।
- निवेश प्रतिबद्धता:
- न्यूजीलैंड ने 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
- निवेश के संभावित क्षेत्रों में विनिर्माण, बुनियादी ढाँचा, कृषि उत्पादकता, नवीकरणीय ऊर्जा, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
- न्यूजीलैंड ने 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
- सेवाएँ और पेशेवरों की आवाजाही:
- यह समझौता 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार तक पहुँच प्रदान करता है तथा लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (Most-Favoured-Nation—MFN) संबंधी प्रतिबद्धताएँ शामिल करता है।
- इसके तहत पात्र भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा और युवा भारतीयों के लिए प्रतिवर्ष 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा का प्रावधान किया गया है।
- पात्र भारतीय छात्र पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर प्राप्त कर सकते हैं। STEM विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवधि तीन वर्ष तक तथा डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए चार वर्ष तक हो सकती है।
- यह समझौता 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार तक पहुँच प्रदान करता है तथा लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (Most-Favoured-Nation—MFN) संबंधी प्रतिबद्धताएँ शामिल करता है।
- फार्मास्यूटिकल्स और पारंपरिक चिकित्सा:
- तुलनीय नियामक प्राधिकरणों की निरीक्षण रिपोर्टों को सुव्यवस्थित तरीके से स्वीकार करने से भारतीय फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करने में सुविधा मिल सकती है।
- आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों में सहयोग से भारत के आयुष (AYUSH) क्षेत्र से जुड़े अवसरों का विस्तार हो सकता है।
- तुलनीय नियामक प्राधिकरणों की निरीक्षण रिपोर्टों को सुव्यवस्थित तरीके से स्वीकार करने से भारतीय फार्मास्यूटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करने में सुविधा मिल सकती है।
- बाजार तक पहुँच और शुल्क उदारीकरण:
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आर्थिक महत्त्व:
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- भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुँच का विस्तार करता है।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), कारीगरों और श्रम-प्रधान उद्योगों को समर्थन प्रदान करता है।
- विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करता है।
- निर्यात विविधीकरण और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण को बढ़ावा देता है।
- भारतीय फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा करता है।
- भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुँच का विस्तार करता है।
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रणनीतिक महत्त्व:
यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के न्यूजीलैंड और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ संबंधों को मजबूत करता है। यह आर्थिक कूटनीति, लचीली आपूर्ति शृंखलाओं और एक विकसित अर्थव्यवस्था के साथ निकट सहयोग को बढ़ावा देता है। साथ ही, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के बीच यह भारत की निर्यात बाजारों में विविधता लाने की व्यापक रणनीति का पूरक है।
निष्कर्ष:
भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता व्यापार उदारीकरण के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें व्यापक निर्यात अवसरों के साथ संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों के लिए सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं। इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय निर्यातकों की अधिक भागीदारी तथा निवेश संबंधी प्रतिबद्धताओं को वास्तविक उत्पादक आर्थिक गतिविधियों में बदलने पर निर्भर करेगी।

