होम > Blog

Blog / 21 Aug 2026

भारत–जापान समुद्री सुरक्षा सहयोग: हिंद-प्रशांत साझेदारी को मजबूत करना

संदर्भ:

हाल ही में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने नई दिल्ली में जापानभारत रक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित की। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन(MoA) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन समन्वय को मजबूत करना और महत्वपूर्ण समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा करना है।

समुद्री सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

      • यह MoA भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स(JMSDF) के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है, विशेष रूप से:
        • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) और सूचना साझा करना।
        • खोज एवं बचाव (SAR) अभियान।
        • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)
        • नौसैनिक यात्राओं, संयुक्त अभ्यासों, कार्मिकों और विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान के माध्यम से SLOCs की सुरक्षा।
        • बंदरगाहों तथा रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं तक पहुँच सहित रसद सहयोग।

India, Japan agree to deepen Maritime Security Cooperation following  bilateral meeting - The HinduBusinessLine

रक्षा प्रौद्योगिकी और जहाज निर्माण:

      • भारत और जापान ने नौसैनिक जहाज निर्माण और डिजाइन में संयुक्त विकास की संभावनाएँ तलाशने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं को मेक इन इंडिया के तहत संयोजित किया जाएगा।
      • दोनों देशों ने माइन-काउंटरमेजर क्षमताओं को मजबूत करने और जहाजों की मरम्मत सुविधाओं तक पारस्परिक पहुँच की दिशा में काम करने पर भी सहमति जताई।
      • UNICORN एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली को दोनों देशों के बीच पहली रक्षा उपकरण हस्तांतरण परियोजना के रूप में रेखांकित किया गया, जो उनकी बढ़ती रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी का प्रतीक है।

सैन्य अभ्यास:

      • दोनों देशों ने प्रमुख द्विपक्षीय अभ्यासों में हुई प्रगति का स्वागत किया:
        • धर्म गार्जियनथल सेना अभ्यास।
        • JAIMEXसमुद्री अभ्यास।
        • वीर गार्जियन 26वायु सेना अभ्यास।
      • वीर गार्जियन 26 के लिए जापानी लड़ाकू विमानों के पहली बार भारत आने की योजना है। दोनों पक्षों ने अभ्यासों की जटिलता बढ़ाने और मानवरहित प्रणालियों को एकीकृत करने पर भी सहमति व्यक्त की।

संस्थागत तंत्र:

एक महानिदेशक/संयुक्त सचिव स्तर का कार्य समूह परिचालन, खुफिया, उपकरण, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का समन्वय करेगा। इस तंत्र का उद्देश्य कार्यान्वयन में तेजी लाना और अधिकतम तालमेल स्थापित करना है।

व्यापक हिंद-प्रशांत सहयोग:

भारत और जापान ने फरवरी 2026 में आयोजित पहले भारतजापानइंडोनेशिया त्रिपक्षीय नौसैनिक PASSEX का स्वागत किया। दोनों देशों ने कार्मिकों और आपूर्ति की आपदा राहत परिवहन के लिए हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) के माध्यम से सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की।

रणनीतिक महत्व:

यह साझेदारी निम्नलिखित को मजबूत करती है:

      • समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता।
      • महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा।
      • रक्षा औद्योगिक सहयोग और आत्मनिर्भरता।
      • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति।
      • स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत की स्थापना।

निष्कर्ष:

अगस्त 2026 का यह समझौता भारतजापान रक्षा सहयोग को पारंपरिक सैन्य अभ्यासों से आगे बढ़ाकर परिचालन, तकनीकी और औद्योगिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण विस्तार दर्शाता है। समुद्री जागरूकता, SLOCs की सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करके यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा में योगदान देता है।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj