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Blog / 12 Sep 2026

भारत-ईरान संबंध: चाबहार, ऊर्जा सुरक्षा और ब्रिक्स

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर, 2026 को BRICS शिखर सम्मेलन 2026 से पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। दोनों देशो ने पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, चाबहार बंदरगाह, संपर्क और BRICS सहयोग पर चर्चा की।

बैठक के प्रमुख परिणाम:

      • पश्चिम एशिया संघर्ष: भारत ने दोहराया कि चल रहे अमेरिकाईरान और व्यापक पश्चिम एशिया संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
      • नौवहन की स्वतंत्रता: भारत ने नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
      • ऊर्जा सुरक्षा: नेताओं ने क्षेत्रीय तनावों के वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभावों पर चर्चा की। ईरान के पर्याप्त तेल और गैस भंडार इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों ने ऊर्जा व्यापार को सीमित कर दिया है।
      • चाबहार बंदरगाह: भारत ने पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच के लिए चाबहार बंदरगाह के रणनीतिक महत्व को दोहराया। भारत ने मई 2024 में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10-वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।
      • संपर्क और INSTC: दोनों देश अंतरराष्ट्रीय उत्तरदक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) में महत्वपूर्ण साझेदार बने हुए हैं, जिसका उद्देश्य भारत को ईरान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से जोड़ना तथा परिवहन समय और लागत को कम करना है।
      • ब्रिक्स (BRICS) सहयोग: ईरान की BRICS में भागीदारी भारतईरान आर्थिक और रणनीतिक सहभागिता के लिए एक नया मंच प्रदान करती है। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक उपयोग का समर्थन किया और बुनियादी ढाँचे तथा ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 10 अरब डॉलर की प्रारंभिक पूंजी वाली संयुक्त BRICS बीमा कंपनी का प्रस्ताव रखा।
      • आर्थिक और व्यापार सहयोग: दोनों पक्षों ने गैर-तेल व्यापार के विस्तार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जिसमें बासमती चावल, चाय और फार्मास्यूटिकल्स के भारतीय निर्यात तथा ईरानी फलों और अन्य वस्तुओं के आयात शामिल हैं।
      • क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग: भारत ने BRICS और SCO में ईरान की भागीदारी का स्वागत किया और क्षेत्रीय स्थिरता, संपर्क और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से अधिक सहयोग पर जोर दिया।

India's Iran Balancing Act: Energy Security, Hormuz And Strategic Autonomy

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

भारतईरान संबंधों में लगभग 2,500 वर्षों के सभ्यतागत संबंध हैं। औपचारिक राजनयिक संबंध 1950 की मैत्री संधि के माध्यम से स्थापित हुए। तेहरान घोषणा (2001) और नई दिल्ली घोषणा (2003) ने रणनीतिक सहयोग को मजबूत किया।

भारत के लिए महत्व:

      • ऊर्जा सुरक्षा: ईरानी ऊर्जा संसाधनों तक भारत की पहुँच।
      • संपर्क: चाबहार और INSTC मध्य एशिया और यूरोप तक भारत की पहुँच को बढ़ाते हैं।
      • भूरणनीतिक महत्व: ईरान फारस की खाड़ी, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के स्थित के कारण भारत के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
      • व्यापार: अधिक गैर-तेल व्यापार की संभावनाएँ।
      • क्षेत्रीय स्थिरता: सहयोग पश्चिम एशिया में शांति का समर्थन कर सकता है।
      • बहुपक्षवाद: ईरान की SCO (2023) और BRICS (2024) की सदस्यता सहभागिता के लिए नए मंच तैयार करती है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

अमेरिकी प्रतिबंध, इज़राइलईरान तनाव, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता, चीनईरान रणनीतिक सहयोग, बैंकिंग प्रतिबंध और धीमी संपर्क परियोजनाएँ भारत की सहभागिता को जटिल बनाती हैं।

निष्कर्ष:

भारतईरान संबंध ऊर्जा, संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्रतिस्पर्धी भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत को अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए।

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