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Blog / 11 Apr 2026

भारत का HFC प्रतिबंध 2027: किगाली संशोधन व रणनीति

भारत का HFC प्रतिबंध 2027: किगाली संशोधन व रणनीति

संदर्भ:

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) के उत्पादन के संबंध में हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके तहत 31 दिसंबर 2027 के बाद हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) के उत्पादन के लिए कोई भी नई 'पर्यावरण मंजूरी' (Environmental Clearance - EC) नहीं दी जाएगी।

यह कदम भारत द्वारा किगाली संशोधन के तहत की गई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक निर्णय है।

भारत के लिए 2027 की समयसीमा का महत्व:

भारत ने किगाली संशोधन के तहत 'ग्रुप 2' देशों में शामिल होने का विकल्प चुना है। भारत के लिए 2028 "फ्रीज वर्ष" है। इसका अर्थ है कि 2028 में भारत का हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) उत्पादन और खपत एक निश्चित स्तर (2024-26 के औसत) पर स्थिर हो जाना चाहिए।

2027 का यह नया निर्देश इसी "फ्रीज" को लागू करने का एक साधन है। 2027 के बाद नई फैक्टरियों को मंजूरी न देकर, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि उत्पादन क्षमता उस आधार रेखा (Baseline) से ऊपर न जाए। साथ ही, मौजूदा परियोजनाओं को यह शपथ पत्र देना होगा कि वे 2027 के अंत तक पूरी तरह चालू हो जाएंगी।

HFC और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के बारे में:

HFC का मुद्दा सीधे तौर पर 'मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल' (1987) से जुड़ा है। मूल रूप से, यह संधि ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थों जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) को खत्म करने के लिए थी। जब CFC पर प्रतिबंध लगा, तो उद्योगों ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) को अपनाया क्योंकि ये ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुँचाते थे।

हालाँकि, बाद में यह पाया गया कि HFC अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। इनकी 'ग्लोबल वार्मिंग क्षमता' (GWP) कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में हजारों गुना अधिक है। इस कारण, 2016 में किगाली संशोधन लाया गया, जिसका उद्देश्य HFC के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से कम करना है ताकि सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 0.5°C की वृद्धि को रोका जा सके।

किगाली संशोधन के बारे में:

वर्ष 2016 में रवांडा की राजधानी किगाली में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में एक संशोधन किया गया:

उद्देश्य: 2040 के दशक के अंत तक HFC के उत्पादन और खपत में 80% से अधिक की कटौती करना।

भारत की भूमिका: विकासशील देशों के 'समूह 2' में होने के नाते, भारत को अपनी HFC खपत को भविष्य में एक निश्चित स्तर पर स्थिर (Freeze) करना है।

चुनौतियां और भारत की रणनीति:

भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश के लिए HFC को हटाना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहाँ एसी और रेफ्रिजरेशन में कूलिंग के लिए इसकी मांग बढ़ रही है।

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (ICAP): भारत 2019 में व्यापक कूलिंग योजना शुरू करने वाला पहला देश था। इसका लक्ष्य 2037-38 तक रेफ्रिजरेंट की मांग को 25-30% तक कम करना है।

हरित विकल्प: भारत अब 'लो-GWP' विकल्पों की ओर बढ़ रहा है:

प्राकृतिक रेफ्रिजरेंट: अमोनिया, प्रोपेन और कार्बन डाईऑक्साइड ।

HFOs (हाइड्रोफ्लोरोओलेफिन): ये ओजोन के लिए सुरक्षित हैं और इनकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता बहुत कम है।

आर्थिक प्रभाव: भारत का 70% HFC उत्पादन गुजरात और महाराष्ट्र में होता है। इस बदलाव के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नई तकनीक अपनाने के लिए निवेश की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष:

2027 की समयसीमा भारत के 'नेट जीरो' (2070) लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम है। यह न केवल उत्सर्जन कम करेगा, बल्कि भारतीय उद्योगों को भविष्य की हरित तकनीकों (Green Technologies) में नवाचार करने के लिए प्रेरित भी करेगा।