संदर्भ:
हाल ही में, भारत ने 2030 तक हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित एक साइड इवेंट को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने वायरल हेपेटाइटिस से निपटने के लिए भारत की व्यापक और जन-केंद्रित रणनीति पर प्रकाश डाला।
वायरल हेपेटाइटिस के बारे में:
वायरल हेपेटाइटिस हेपेटाइटिस वायरस के कारण होने वाले यकृत (Liver) में सूजन को कहा जाता है। हेपेटाइटिस B (HBV) और हेपेटाइटिस C (HCV) विशेष रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएँ हैं, क्योंकि लंबे समय तक संक्रमण रहने पर लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर हो सकता है।
हेपेटाइटिस B बनाम हेपेटाइटिस C:
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मापदंड |
हेपेटाइटिस B |
हेपेटाइटिस C |
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वायरस |
DNA वायरस |
RNA वायरस |
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प्रमुख संचरण |
रक्त, यौन संपर्क और माँ से बच्चे में |
मुख्यतः संक्रमित रक्त के माध्यम से |
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टीका |
उपलब्ध है |
कोई टीका उपलब्ध नहीं |
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उपचार |
एंटीवायरल दवाओं से दीर्घकालिक प्रबंधन |
आमतौर पर DAA दवाओं से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है |
जहाँ हेपेटाइटिस B को टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है, वहीं हेपेटाइटिस C के लिए वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि, हेपेटाइटिस C का सामान्यतः डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल (DAA) दवाओं के माध्यम से इलाज किया जा सकता है।
भारत में रोग का बोझ:
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- भारत में लंबे समय तक रहने वाले हेपेटाइटिस B और C संक्रमण का महत्वपूर्ण बोझ है। एक बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमित कई व्यक्ति लंबे समय तक बिना लक्षणों के रहते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है और उपचार में भी देरी होती है।
- इसलिए, 2030 के उन्मूलन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्क्रीनिंग, जांच और उपचार की पहुँच का विस्तार करना आवश्यक है।
- भारत में लंबे समय तक रहने वाले हेपेटाइटिस B और C संक्रमण का महत्वपूर्ण बोझ है। एक बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमित कई व्यक्ति लंबे समय तक बिना लक्षणों के रहते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है और उपचार में भी देरी होती है।
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भारत की राष्ट्रीय पहल:
भारत सरकार ने वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, निदान, उपचार और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (National Viral Hepatitis Control Programme-NVHCP) शुरू किया।
इसके प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
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- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत हेपेटाइटिस B का टीकाकरण।
- माँ से बच्चे में संक्रमण को रोकने के लिए प्रसवपूर्व (Antenatal) स्क्रीनिंग।
- राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत निःशुल्क जांच और उपचार।
- सुरक्षित रक्त संक्रमण और इंजेक्शन संबंधी प्रक्रियाएँ।
- संवेदनशील आबादी के लिए परामर्श और सहायता।
- जागरूकता बढ़ाना और रोग की निगरानी।
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत हेपेटाइटिस B का टीकाकरण।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- बीमारी के अधिकांश मामलों में लक्षण न होने के कारण संक्रमण का पता न चल पाना।
- संक्रमण के प्रसार और रोकथाम के संबंध में सीमित जागरूकता।
- जांच और उपचार तक असमान पहुँच।
- हेपेटाइटिस B के माँ से बच्चे में संक्रमण का लगातार बना जोखिम।
- बेहतर रोग निगरानी और स्वास्थ्य अवसंरचना की आवश्यकता।
- सस्ती दवाओं और जांच सुविधाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- बीमारी के अधिकांश मामलों में लक्षण न होने के कारण संक्रमण का पता न चल पाना।
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आगे की राह:
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- भारत को टीकाकरण, प्रसवपूर्व स्क्रीनिंग, लक्षित जांच, प्रारंभिक उपचार, सुरक्षित रक्त एवं इंजेक्शन प्रक्रियाओं, जागरूकता और मजबूत रोग निगरानी को एकीकृत करने वाला दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
- निदान, दवाओं, तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
- भारत को टीकाकरण, प्रसवपूर्व स्क्रीनिंग, लक्षित जांच, प्रारंभिक उपचार, सुरक्षित रक्त एवं इंजेक्शन प्रक्रियाओं, जागरूकता और मजबूत रोग निगरानी को एकीकृत करने वाला दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
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निष्कर्ष:
हेपेटाइटिस B और C को समाप्त करने की भारत की नई प्रतिबद्धता उपचार-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाती है। 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर सरकारी प्रयास, सामुदायिक भागीदारी, मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी।

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