संदर्भ:
हाल ही में भारत और साइप्रस ने 22 मई 2026 को साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स (Nikos Christodoulides) की नई दिल्ली यात्रा के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को आधिकारिक रूप से “रणनीतिक साझेदारी” (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया। इस दौरान दोनों देशों ने छह प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
प्रमुख समझौते एवं पहलें:
द्विपक्षीय रक्षा सहयोग रोडमैप (2026–2031)
• 5 वर्षीय संरचित रक्षा सहयोग ढांचा
• क्षमता निर्माण, संयुक्त प्रशिक्षण और खोज एवं बचाव (SAR) अभियानों पर सहयोग
• रक्षा उत्पादन (Co-production) को बढ़ावा
• भारतीय रक्षा कंपनियों को यूरोपीय संघ के €150 अरब SAFE कार्यक्रम के तहत साइप्रस कंपनियों के साथ सहयोग का अवसर
सुरक्षा एवं आतंकवाद-रोधी सहयोग
• आतंक वित्तपोषण नेटवर्क पर सूचना साझा करने हेतु संयुक्त कार्य समूह (JWG) का गठन
• द्विपक्षीय साइबर सुरक्षा संवाद (Bilateral Cybersecurity Dialogue) की शुरुआत
वित्तीय एवं डिजिटल एकीकरण
• UPI को 2027 तक यूरोप की TIPS भुगतान प्रणाली से जोड़ने की योजना
• सीमा-पार डिजिटल भुगतान और फिनटेक सहयोग को बढ़ावा
IMEC और कनेक्टिविटी
• भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) के तहत द्विपक्षीय संपर्क संवाद की शुरुआत
• साइप्रस को यूरोप में भारतीय वस्तुओं के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की योजना
शिक्षा एवं प्रतिभा गतिशीलता
• ICAI और साइप्रस के ICPAC के बीच योग्यता मान्यता समझौता
• राजनयिक प्रशिक्षण पर MoU
• शैक्षणिक एवं पेशेवर गतिशीलता को बढ़ावा
व्यापार एवं संस्थागत पहल
• साइप्रस द्वारा मुंबई में व्यापार कार्यालय खोलने की घोषणा
• साइप्रस का भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होना
• भारत–ग्रीस–साइप्रस (IGC) बिजनेस एंड इन्वेस्टमेंट काउंसिल को सक्रिय किया गया
भारत और साइप्रस संबंध:
भारत और साइप्रस गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के संस्थापक सदस्य रहे हैं।
साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNFICYP) में भारत की सक्रिय भूमिका ने रक्षा सहयोग की नींव मजबूत की।
आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध
साइप्रस से भारत को अब तक लगभग 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर का FDI प्राप्त हुआ है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 214 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है।
लक्ष्य: 2030 तक व्यापार को दोगुना करना।
प्रमुख भारतीय निर्यात: दवाइयाँ, रसायन, इस्पात उत्पाद।
भू-राजनीतिक महत्व:
रणनीतिक संतुलन
तुर्की–पाकिस्तान गठजोड़ के संदर्भ में साइप्रस के साथ भारत की साझेदारी रणनीतिक संतुलन प्रदान करती है। साइप्रस मुद्दे पर भारत ने उसकी संप्रभुता, अखंडता और UN-आधारित समाधान का समर्थन किया।
हिंद-प्रशांत और यूरोप के बीच कड़ी:
भारत और साइप्रस की यह साझेदारी हिंद-प्रशांत और यूरोप के बीच एक रणनीतिक सेतु (Strategic Bridge) बनाती है। IMEC के माध्यम से भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका मजबूत होती है।
चुनौतियाँ:
वित्तीय अपारदर्शिता
• साइप्रस का पूर्व टैक्स-हेवन के रूप में इतिहास
• राउंड ट्रिपिंग और वित्तीय निगरानी की चुनौती
IMEC क्रियान्वयन
• पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता
• लॉजिस्टिक और सुरक्षा चुनौतियाँ
प्रमुख अवसर:
• यूरोपीय बाजारों तक भारत की सीधी पहुँच
• डिजिटल भुगतान और फिनटेक विस्तार
• रक्षा उत्पादन में संयुक्त उद्यम
• वैकल्पिक वैश्विक व्यापार मार्गों का विकास
निष्कर्ष:
भारत–साइप्रस सामरिक साझेदारी हिंद-प्रशांत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण भू-रणनीतिक सेतु के रूप में उभर रही है। रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुए समझौते इसे एक बहु-आयामी और भविष्य-उन्मुख साझेदारी बनाते हैं। यदि भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना (2025–2029) के लक्ष्यों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर सकती है।
