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Blog / 22 Oct 2026

सितंबर 2026 में भारत के मुख्य उद्योगों में 7.9% की वृद्धि हुई

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (Index of Core Industries - ICI) सितंबर 2026 में वर्ष-दर-वर्ष 7.9% की वृद्धि दर्ज करते हुए 30 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। यह 2022–23 को आधार वर्ष मानने वाली संशोधित श्रृंखला के अंतर्गत दर्ज की गई सबसे अधिक वृद्धि है। अगस्त 2026 में यह वृद्धि 5.9% और सितंबर 2025 में 3.1% थी।

प्रमुख उद्योग क्या हैं?

      • प्रमुख उद्योग वे बुनियादी क्षेत्र हैं, जो अन्य उद्योगों और अवसंरचना परियोजनाओं को आवश्यक इनपुट प्रदान करते हैं। इनका प्रदर्शन विनिर्माण, निर्माण, ऊर्जा की उपलब्धता और समग्र आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।
      • प्रमुख उद्योगों के संशोधित सूचकांक में अब नौ क्षेत्र शामिल हैं। पहले इसमें आठ उद्योग शामिल थे, लेकिन लौह अयस्क को जोड़ने के बाद इनकी संख्या बढ़कर नौ हो गई है। संशोधित श्रृंखला में 2022–23 को आधार वर्ष बनाया गया है, जिसने पहले के 2011–12 आधार वर्ष का स्थान लिया है।
      • इस सूचकांक का संकलन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा किया जाता है।

India’s Core Industries Grow 7.9% in September 2026

नौ प्रमुख उद्योग और उनका भारांक:

उद्योग

भारांक (%)

विद्युत

30.932

रिफाइनरी उत्पाद

22.572

इस्पात

17.584

कच्चा तेल

7.430

कोयला

5.596

लौह अयस्क

4.905

सीमेंट

4.410

प्राकृतिक गैस

3.841

उर्वरक

2.731

कुल

100.000

सितंबर 2026 में क्षेत्रवार प्रदर्शन:

उद्योग

वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि

लौह अयस्क

18.4%

विद्युत

11.4%

कोयला

10.7%

रिफाइनरी उत्पाद

10.3%

सीमेंट

9.8%

इस्पात

4.9%

कच्चा तेल

−1.4%

प्राकृतिक गैस

−4.6%

उर्वरक

−11.7%

नौ में से छह उद्योगों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जबकि उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट आई। लौह अयस्क सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्व:

      • अवसंरचना विकास: इस्पात, सीमेंट और विद्युत के उत्पादन में वृद्धि सड़क, रेलवे, बंदरगाह, आवास और औद्योगिक परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करती है।
      • निवेश और उत्पादन: प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में वृद्धि औद्योगिक मांग में मजबूती का संकेत दे सकती है और निजी निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है।
      • ऊर्जा सुरक्षा: कोयले और रिफाइनरी उत्पादों का अधिक उत्पादन घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता कर सकता है, हालाँकि कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस चिंता के विषय बने हुए हैं।
      • अग्रणी संकेतक: प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production - IIP) के महत्त्वपूर्ण इनपुट हैं। स्थापित ढाँचे के अंतर्गत इनका IIP के भारांक में लगभग 40% योगदान है।

चुनौतियाँ:

      • उर्वरक और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में लगातार गिरावट।
      • आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव।
      • कोयले और संसाधनों का अधिक उपयोग करने वाले उद्योगों से जुड़ी पर्यावरणीय लागत।
      • विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन में असमानता।
      • औद्योगिक विकास को बनाए रखने और उसे रोजगार सृजन में बदलने की आवश्यकता।

आगे की राह:

भारत को घरेलू ऊर्जा अन्वेषण में सुधार करना चाहिए, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी चाहिए, औद्योगिक लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना चाहिए और स्वच्छ उत्पादन तकनीकों को प्रोत्साहित करना चाहिए। अवसंरचना, संसाधन दक्षता और सतत विनिर्माण में अधिक निवेश से पर्यावरणीय लागत को कम करते हुए आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष:

सितंबर 2026 में 7.9% की वृद्धि भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में नई गति का संकेत देती है। हालाँकि, उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादन में लगातार कमजोरी संतुलित विकास, बेहतर ऊर्जा सुरक्षा और सतत औद्योगिक विकास की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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