संदर्भ:
हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहे। भारत के प्रधानमंत्री और कनाडा के प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक कूटनीतिक तनाव के एक दौर के बाद संबंधों में “रणनीतिक पुनर्संतुलन (Strategic Reset)” का संकेत मानी जा रही है। कनाडा के प्रधानमंत्री की यह, भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जिसने भारत–कनाडा द्विपक्षीय संबंधों में नई गति को रेखांकित किया। यह यात्रा 75 वर्षों से अधिक पुराने साझेदारी संबंधों को पुनर्जीवित करने और उन्हें नई दिशा देने का अवसर प्रदान करती है।
बैठक के प्रमुख परिणाम:
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क्षेत्र |
निर्णय / परिणाम |
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व्यापार लक्ष्य |
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति। |
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व्यापार समझौता (CEPA) |
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) को 2026 के अंत तक निष्कर्षित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। |
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निजी क्षेत्र सहभागिता |
बिज़नेस-टू-बिज़नेस सहयोग और संयुक्त उपक्रमों के लिए रोडमैप। |
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नवाचार व प्रौद्योगिकी |
एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर विकास में सहयोग का विस्तार। |
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महत्वपूर्ण खनिज |
महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करने हेतु समझौता ज्ञापन (MoU)। |
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ऊर्जा साझेदारी |
“नेक्स्ट जेनरेशन एनर्जी पार्टनरशिप” की शुरुआत — हाइड्रोकार्बन, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण शामिल। |
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जलवायु मंच |
कनाडा ने International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance में शामिल होने की घोषणा की। |
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परमाणु सहयोग |
दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता; स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और उन्नत रिएक्टरों पर सहयोग। |
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कृषि |
भारत–कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना। |
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रक्षा व सुरक्षा |
रक्षा औद्योगिक सहयोग, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, सैन्य आदान-प्रदान और भारत–कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने पर सहमति। |
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शिक्षा व संस्कृति |
भारत में कनाडाई विश्वविद्यालयों के विस्तार; सांस्कृतिक और स्वदेशी समुदाय आदान-प्रदान पर MoU। |
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क्षेत्रीय सहयोग |
कनाडा ने Indian Ocean Rim Association में डायलॉग पार्टनर बनने में रुचि व्यक्त की। |
भारत–कनाडा संबंध-
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- भारत–कनाडा संबंध 1950 के कोलंबो प्लान के तहत सहयोगात्मक रूप में प्रारंभ हुए।
हालांकि, 1974 में भारत के शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षणों के बाद संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ, क्योंकि कनाडा ने पूर्व में परमाणु प्रौद्योगिकी प्रदान की थी। - 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर बमबारी ने सुरक्षा चिंताओं को द्विपक्षीय विमर्श का प्रमुख हिस्सा बना दिया।
- 21वीं सदी में संबंधों में पुन: सुधार देखा गया। 2010 के परमाणु सहयोग समझौते ने असैन्य परमाणु व्यापार को पुनः प्रारंभ किया और 2018 में साझेदारी को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया।
- भारत–कनाडा संबंध 1950 के कोलंबो प्लान के तहत सहयोगात्मक रूप में प्रारंभ हुए।
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2023 का कूटनीतिक संकट:
2023 में सरे (Surrey) में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर संलिप्तता का आरोप लगाया, जिसका भारत ने जोर से विरोध किया। इसके बाद राजनयिक निष्कासन हुए और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता स्थगित कर दी गई।
संबंधों में पुनर्संतुलन के कारक:
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- 2025 के G20 शिखर सम्मेलन के दौरान उच्च-स्तरीय संवाद।
- मजबूत आर्थिक आधार: 2024 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 13 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक।
- कनाडाई पोर्टफोलियो निवेश भारत में 100 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक।
- लगभग 600 कनाडाई कंपनियाँ भारत में कार्यरत।
- 2025 के G20 शिखर सम्मेलन के दौरान उच्च-स्तरीय संवाद।
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आगे की राह:
भारत–कनाडा संबंधों में दीर्घकालिक और स्थायी पुनर्संतुलन सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों को बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। आतंकवाद-रोधी सहयोग को संस्थागत स्वरूप देना आवश्यक है, ताकि उग्रवादी गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का प्रभावी समाधान किया जा सके। उभरते क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिक्षा में सहयोग का विस्तार दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
निष्कर्ष:
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा केवल औपचारिक विदेश दौरा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने, राजनयिक तनावों को कम करने तथा वैश्विक मंच पर साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका सकारात्मक परिदृश्य भारत की विदेश नीति और कनाडा के साथ उसके सहयोग की दिशा में नए अवसरों को उजागर करता है।

