संदर्भ:
हाल ही में, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बैठकों ने भारत–कनाडा संबंधों को फिर से मजबूत करने के प्रयासों को उजागर किया। चर्चा का केंद्र व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संबंध रहे। यह संपर्क वर्ष 2023–2024 के तनाव के बाद कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को फिर से स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाता है। दोनों देश संवाद बहाल करने और सहयोग का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भारत–कनाडा संबंध:
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- भारत और कनाडा ने वर्ष 1947 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। शुरुआती संबंध राष्ट्रमंडल के जुड़ाव और कनाडा की विकास सहायता से प्रभावित थे। हालाँकि, वर्ष 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण ‘स्माइलिंग बुद्धा’ के बाद संबंध बिगड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप कनाडा ने वर्ष 1976 में परमाणु सहयोग रोक दिया।
- वर्ष 1985 में सिख चरमपंथियों द्वारा एयर इंडिया की उड़ान 182 (कनिष्क) पर किए गए बम विस्फोट ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया। वर्ष 1990 के दशक में भारत के आर्थिक उदारीकरण के बाद व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संपर्क का विस्तार हुआ। वर्ष 2015 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया।
- वर्ष 2023–2024 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से संबंधित कनाडा के आरोपों के बाद संबंधों को बड़ा झटका लगा, जिन्हें भारत ने खारिज कर दिया। राजनयिकों के निष्कासन और प्रतिबंधों ने तनाव को और गहरा किया तथा द्विपक्षीय संपर्क को कमजोर किया।
- इन मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में संवाद एवं सहयोग के माध्यम से संबंधों को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया है।
- भारत और कनाडा ने वर्ष 1947 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। शुरुआती संबंध राष्ट्रमंडल के जुड़ाव और कनाडा की विकास सहायता से प्रभावित थे। हालाँकि, वर्ष 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण ‘स्माइलिंग बुद्धा’ के बाद संबंध बिगड़ गए, जिसके परिणामस्वरूप कनाडा ने वर्ष 1976 में परमाणु सहयोग रोक दिया।
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सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:
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- नागरिक परमाणु ऊर्जा: भारत और कनाडा ने यूरेनियम सहयोग को आगे बढ़ाया है। यूरेनियम अयस्क सांद्रण के लिए लगभग 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर के कथित दीर्घकालिक कैमेको (Cameco) अनुबंध से, जो वर्ष 2027–2035 की अवधि को कवर करता है, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और कम-कार्बन बिजली संबंधी लक्ष्यों को समर्थन मिल सकता है।
- व्यापार और अर्थव्यवस्था: दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार का एक लक्ष्य बताया गया है। प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) व्यापार संबंधी बाधाओं को कम कर सकता है और निवेश को बढ़ावा दे सकता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ ऊर्जा: सहयोग से महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं, ऊर्जा भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा को मजबूत किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों में कनाडा की भागीदारी आगे और अवसर उत्पन्न कर सकती है।
- रक्षा और सुरक्षा: संस्थागत संवाद, समुद्री सहयोग और आतंकवाद-रोधी गतिविधियों में सहभागिता साझा सुरक्षा चिंताओं का समाधान कर सकती है।
- प्रवासी समुदाय और शिक्षा: भारतीय मूल के 18 लाख से अधिक कनाडाई सांस्कृतिक, वाणिज्यिक और सामाजिक संबंधों में योगदान देते हैं। शिक्षा और कुशल श्रमिकों की आवाजाही भी द्विपक्षीय संबंधों के महत्त्वपूर्ण घटक रहे हैं।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा: भारत और कनाडा ने यूरेनियम सहयोग को आगे बढ़ाया है। यूरेनियम अयस्क सांद्रण के लिए लगभग 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर के कथित दीर्घकालिक कैमेको (Cameco) अनुबंध से, जो वर्ष 2027–2035 की अवधि को कवर करता है, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और कम-कार्बन बिजली संबंधी लक्ष्यों को समर्थन मिल सकता है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- खालिस्तानी चरमपंथ: भारत ने कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थक अलगाववादी गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की है।
- कूटनीतिक तनाव: निज्जर की हत्या से संबंधित कनाडा के आरोपों के कारण गंभीर कूटनीतिक टकराव उत्पन्न हुआ, जिसमें राजनयिकों का निष्कासन भी शामिल था। भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
- व्यापार संबंधी बाधाएँ: कृषि उत्पादों, जिनमें दालें भी शामिल हैं, को लेकर मतभेद तथा निवेश और बौद्धिक संपदा संबंधी नियम आर्थिक वार्ताओं को जटिल बनाते हैं।
- विश्वास की कमी: सुरक्षा संबंधी असहमतियाँ तथा संप्रभुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अलग-अलग व्याख्याएँ सहयोग में बाधा उत्पन्न करती हैं।
- खालिस्तानी चरमपंथ: भारत ने कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थक अलगाववादी गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की है।
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आगे की राह:
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- नियमित उच्च-स्तरीय कूटनीतिक परामर्श को फिर से शुरू करना।
- CEPA वार्ताओं को आगे बढ़ाना और गैर-टैरिफ बाधाओं का समाधान करना।
- साक्ष्य-आधारित कानून प्रवर्तन तंत्र और उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग को मजबूत करना।
- परमाणु ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिजों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करना।
- दोनों देशों की संप्रभुता और कानूनों का सम्मान करते हुए प्रवासी समुदाय के हितों की रक्षा करना।
- नियमित उच्च-स्तरीय कूटनीतिक परामर्श को फिर से शुरू करना।
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निष्कर्ष:
भारत–कनाडा संबंध उन लोकतांत्रिक देशों के बीच साझेदारी की जटिलता को दर्शाते हैं, जिनके सामाजिक संबंध मजबूत हैं, लेकिन सुरक्षा संबंधी चिंताएँ अलग-अलग हैं। निरंतर संवाद, आर्थिक परस्पर निर्भरता और आपसी सम्मान वर्ष 2026 में शुरू हुए कूटनीतिक पुनर्स्थापन को एक स्थायी रणनीतिक साझेदारी में बदलने में मदद कर सकते हैं।
