संदर्भ:
हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। इन परीक्षणों ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरों को रोकने के लिए भारत की बहु-स्तरीय रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया।
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली क्या है?
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- बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली रडार, सेंसर, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम तथा इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक एकीकृत नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना, उनका पीछा करना (Tracking) तथा लक्ष्य तक पहुँचने से पहले उन्हें नष्ट करना होता है।
- बहु-स्तरीय रक्षा (Multi-Layered Defence) की अवधारणा यह सुनिश्चित करती है कि यदि कोई मिसाइल पहली अवरोधन (Interception) परत से बच निकलती है, तो उसे दूसरी परत द्वारा रोका जा सके। इससे सफल अवरोधन (Interception) की संभावना बढ़ जाती है।
- बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली रडार, सेंसर, कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम तथा इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक एकीकृत नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना, उनका पीछा करना (Tracking) तथा लक्ष्य तक पहुँचने से पहले उन्हें नष्ट करना होता है।
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हालिया परीक्षणों की प्रमुख विशेषताएँ:
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- DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विरुद्ध भारत की बहु-स्तरीय रक्षा क्षमता को प्रदर्शित करते हुए तीन सफल उड़ान परीक्षण किए।
- इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों का सफलतापूर्वक पीछा किया और उन्हें नष्ट कर दिया।
- परीक्षणों ने वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) तथा वायुमंडल के भीतर (Endo-atmospheric) अवरोधन क्षमताओं को प्रमाणित किया।
- रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह प्रणाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) की श्रेणी तक के खतरों का सामना करने में सक्षम है।
- DRDO ने मध्यम दूरी की नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण किया, जिससे भारत की समुद्री आक्रमण क्षमता और मजबूत हुई।
- DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के विरुद्ध भारत की बहु-स्तरीय रक्षा क्षमता को प्रदर्शित करते हुए तीन सफल उड़ान परीक्षण किए।
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विशिष्ट देशों के समूह में शामिल हुआ भारत:
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- इस सफल प्रदर्शन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता उपलब्ध है।
- वर्तमान में केवल कुछ ही देशों, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन और इज़राइल के पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने वाली प्रमाणित मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ हैं।
- इस सफल प्रदर्शन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता उपलब्ध है।
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भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम के बारे में:
चरण-I (Phase-I)
पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD)
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- वायुमंडल के बाहर अवरोधन करने वाली (Exo-atmospheric) इंटरसेप्टर मिसाइल।
- पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करती है।
- पहला सफल परीक्षण वर्ष 2006 में हुआ था।
- वायुमंडल के बाहर अवरोधन करने वाली (Exo-atmospheric) इंटरसेप्टर मिसाइल।
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एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD)
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- वायुमंडल के भीतर अवरोधन करने वाली (Endo-atmospheric) इंटरसेप्टर मिसाइल।
- आने वाली मिसाइलों को वायुमंडल के भीतर ही नष्ट करती है।
- यह रक्षा प्रणाली की दूसरी परत का निर्माण करती है।
- वायुमंडल के भीतर अवरोधन करने वाली (Endo-atmospheric) इंटरसेप्टर मिसाइल।
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चरण-II (Phase-II)
भारत वर्तमान में AD-1 और AD-2 जैसी उन्नत इंटरसेप्टर प्रणालियाँ विकसित कर रहा है, जो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (IRBMs) तथा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) का मुकाबला करने में सक्षम होंगी। हाल के परीक्षण इसी अगली पीढ़ी की BMD संरचना का हिस्सा हैं।
सामरिक महत्व:
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- राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती: इन सफल परीक्षणों से बैलिस्टिक मिसाइल हमलों तथा उभरते हवाई खतरों के विरुद्ध भारत की रक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Credible Nuclear Deterrence): एक सुदृढ़ BMD प्रणाली भारत की परमाणु नीति को मजबूत बनाती है तथा मिसाइल हमलों की स्थिति में उत्तरजीविता (Survivability) बढ़ाती है।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत: ये परीक्षण उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करते हैं तथा विदेशी मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करते हैं।
- समुद्री क्षमता में वृद्धि: मध्यम दूरी की नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक क्षमता मजबूत हुई है तथा जहाज-रोधी युद्ध (Anti-Ship Warfare) के विकल्पों का विस्तार हुआ है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती: इन सफल परीक्षणों से बैलिस्टिक मिसाइल हमलों तथा उभरते हवाई खतरों के विरुद्ध भारत की रक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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निष्कर्ष:
भारत की बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का सफल प्रदर्शन देश की सामरिक रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम स्वदेशी रक्षा कवच विकसित करके भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना को और मजबूत किया है तथा एक व्यापक, आत्मनिर्भर और आधुनिक वायु एवं मिसाइल रक्षा नेटवर्क की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
FAQ:
बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना (Multi-Layered Air Defence Architecture) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
बहु-स्तरीय वायु रक्षा संरचना वायु रक्षा हथियारों की एक एकीकृत प्रणाली है, जिसे विभिन्न दूरी (Ranges) और ऊँचाइयों (Altitudes) पर तैनात किया जाता है ताकि विमान, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हवाई खतरों का पता लगाया जा सके, उनका पीछा (Track) किया जा सके और उन्हें नष्ट किया जा सके। यह अतिव्यापी (Overlapping) सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि यदि एक रक्षा परत विफल हो जाए, तो दूसरी परत लक्ष्य को भेद सकती है।
भारत की वायु रक्षा संरचना की प्रमुख परतें कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारत का वायु रक्षा नेटवर्क पाँच परतों से मिलकर बना है—
1. दीर्घ-दूरी रक्षा परत (Long-Range Defence Layer) – S-400 ट्रायम्फ और प्रोजेक्ट कुशा।
2. बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) परत – PAD, AAD, AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर।
3. मध्यम-दूरी रक्षा परत (Medium-Range Defence Layer) – आकाश और बराक-8 मिसाइल प्रणालियाँ।
4. लघु-दूरी रक्षा परत (Short-Range Defence Layer) – QRSAM और SPYDER प्रणालियाँ।
5. पॉइंट डिफेंस परत (Point Defence Layer) – इग्ला-S MANPADS और उभरते हुए निर्देशित ऊर्जा हथियार (Directed Energy Weapons - DEWs)।
भारत के वायु रक्षा नेटवर्क में S-400 ट्रायम्फ प्रणाली का क्या महत्व है?
उत्तर:
S-400 ट्रायम्फ भारत की प्रमुख दीर्घ-दूरी सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Surface-to-Air Missile System) है, जो 400 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
यह एक साथ अनेक खतरों का पता लगा सकती है और उन्हें नष्ट कर सकती है, जिनमें लड़ाकू विमान (Fighter Aircraft), मानव रहित हवाई वाहन (UAVs), क्रूज़ मिसाइलें तथा कुछ प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। इस प्रकार यह भारत की वायु रक्षा संरचना की बाहरी सुरक्षा ढाल (Outer Shield) का निर्माण करती है।
भारत की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली कैसे कार्य करती है?
उत्तर:
भारत की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली दो-स्तरीय अवरोधन तंत्र (Two-Tier Interception Mechanism) का अनुसरण करती है—
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- PAD (पृथ्वी एयर डिफेंस) शत्रु की बैलिस्टिक मिसाइलों को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) अवरोधित करती है।
- AAD (एडवांस्ड एयर डिफेंस) वायुमंडल के भीतर (Endo-atmospheric) मिसाइलों को अवरोधित करती है।
- PAD (पृथ्वी एयर डिफेंस) शत्रु की बैलिस्टिक मिसाइलों को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर (Exo-atmospheric) अवरोधित करती है।
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नई AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर मिसाइलों को उन्नत बैलिस्टिक तथा हाइपरसोनिक खतरों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया जा रहा है, जिससे भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence Capability) और मजबूत होगी।
प्रोजेक्ट कुशा क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
प्रोजेक्ट कुशा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया जा रहा एक स्वदेशी दीर्घ-दूरी वायु रक्षा कार्यक्रम (Indigenous Long-Range Air Defence Programme) है।
इसका उद्देश्य विमानों, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलों तथा हाइपरसोनिक हथियारों से सुरक्षा प्रदान करना है।
इसके परिचालन में आने के बाद—
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- विदेशी वायु रक्षा प्रणालियों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
- उन्नत वायु रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
- देश की वायु एवं मिसाइल रक्षा क्षमता और अधिक सशक्त होगी।
- विदेशी वायु रक्षा प्रणालियों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
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